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बीजेपी के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपाध्यक्ष बलबीर पुंज का निधन हो गया. राज्यसभा सदस्य, लंबे समय तक पत्रकार रहे, 2022 में लाइफटाइम देवर्षि नारद सम्मान मिला. वे हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों ही भाषाओं के प्रकाशनों के लिए नियमित रूप से लेखन कार्य करते रहे
बलबीर पुंज बीेजेपी के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और इसके पूर्व उपाध्यक्ष बलबीर पुंज का शनिवार शाम निधन हो गया. उनके निधन के साथ ही राजनीति, पत्रकारिता और सार्वजनिक चिंतन के क्षेत्र में एक लंबे और प्रभावशाली करियर का अंत हो गया. पुंज को बीजेपी की प्रमुख बौद्धिक आवाज़ों में से एक माना जाता था. उन्होंने राज्यसभा में भी अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर होने वाली बहसों में सक्रिय रूप से भाग लिया. इन वर्षों के दौरान, उन्होंने एक स्तंभकार, टिप्पणीकार और सार्वजनिक विचारक के रूप में अपनी एक मज़बूत पहचान बनाई, जिसकी राजनीतिक और मीडिया, दोनों ही क्षेत्रों में गहरी पैठ थी.
सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले, पुंज का पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और सफल करियर रहा था. उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत वर्ष 1971 में ‘द मदरलैंड’ (The Motherland) से की थी. इसके बाद, वर्ष 1974 में वे ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ (Financial Express) से जुड़ गए, जहां उन्होंने वर्ष 1996 तक, यानी दो दशकों से भी अधिक समय तक कार्य किया. तत्पश्चात, मई 1996 से मार्च 2000 तक उन्होंने ‘द ऑब्ज़र्वर ऑफ़ बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स’ (The Observer of Business and Politics) के कार्यकारी संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दीं.
पुंज का पत्रकारों के विभिन्न संगठनों और मीडिया संस्थानों के साथ भी गहरा जुड़ाव रहा. वर्ष 1989 से 1991 के बीच, उन्होंने लगातार दो कार्यकालों तक ‘दिल्ली पत्रकार संघ’ (Delhi Journalists Association) के अध्यक्ष का पद संभाला. इसके अतिरिक्त, वर्ष 1993 से 1995 तक वे ‘नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स’ (National Union of Journalists) के महासचिव भी रहे. मार्च 2000 तक, यानी दो वर्षों की अवधि के लिए, उन्होंने IIMC से संबद्ध एक दक्षिण-पूर्व एशियाई मीडिया प्रशिक्षण संगठन की अध्यक्षता भी की. यह तथ्य मीडिया के विकास और शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर जुड़ाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है.
पत्रकारिता और राजनीति के अतिरिक्त, पुंज ने कई अन्य सार्वजनिक भूमिकाएँ भी निभाईं. उन्होंने ‘राष्ट्रीय युवा आयोग’ (National Commission for Youth) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, और वर्ष 1996-97 के दौरान वे ‘दिल्ली वित्त आयोग’ (Delhi Finance Commission) के सदस्य भी रहे. इन दायित्वों ने इस बात को रेखांकित किया कि समाचार-कक्ष (Newsroom) और संसद की परिधि से बाहर निकलकर भी, वे शासन-प्रशासन और युवाओं से संबंधित सार्वजनिक नीति के मुद्दों में कितनी गहराई से संलग्न थे.
एक लेखक और स्तंभकार के रूप में, पुंज अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक सक्रिय रहे; वे हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों ही भाषाओं के प्रकाशनों के लिए नियमित रूप से लेखन कार्य करते रहे. वर्ष 2022 में, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालिक एवं अमूल्य योगदान को सम्मानित करते हुए, उन्हें ‘लाइफ़टाइम देवर्षि नारद सम्मान’ (Lifelong Devrishi Narad Samman Award) से अलंकृत किया गया.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें


