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Ghazibad News: गाजियाबाद के विकास भवन परिसर में शुरू हुआ ग्रामीण बाजार अब किसानों और शहरवासियों दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. यहां किसान अपनी खेतों से ताजी और ऑर्गेनिक सब्जियां सीधे लोगों तक पहुंचा रहे हैं. इससे किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिल रहा है, वहीं लोगों को बिना रसायन वाली ताजी सब्जियां सस्ते दामों पर मिल रही हैं. खास बात यह है कि इस पहल से किसानों की बिचौलियों और मंडियों पर निर्भरता भी कम हो रही है.
गाजियाबाद: विकास भवन परिसर में शुरू हुआ ग्रामीण बाजार इन दिनों स्थानीय किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण बन गया है. इस बाजार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां किसान अपने खेतों से सीधे ताजी और पूरी तरह ऑर्गेनिक सब्जियां लेकर पहुंच रहे हैं. इससे जहां एक तरफ किसानों को अपनी फसल का सही और पूरा दाम मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के लोगों को बिना किसी केमिकल या कीटनाशक वाली सेहतमंद सब्जियां आसानी से मिल रही हैं. इस पहल ने किसानों की मंडियों और बिचौलियों पर सालों पुरानी निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है.
दफ्तरों के पास होने से शाम को उमड़ती है भारी भीड़
यह बाजार गाजियाबाद के विकास भवन, कलेक्ट्रेट और कचहरी जैसे बड़े सरकारी दफ्तरों के ठीक पास लगाया जा रहा है. इस वजह से यहां दिन भर अधिकारियों, कर्मचारियों, वकीलों और आम जनता की आवाजाही बनी रहती है. खासकर शाम के वक्त, जब लोग अपने दफ्तरों से घर के लिए निकलते हैं, तो यहां ताजी सब्जियों और ग्रामीण सामानों की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. आम मंडियों के मुकाबले यहां की सब्जियां न सिर्फ सस्ती हैं, बल्कि क्वालिटी के मामले में भी बहुत बेहतर हैं.
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिला नया रोजगार
इस पूरी मुहिम में फिलहाल तीन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) और चार स्वयं सहायता समूह (SHG) मिलकर काम कर रहे हैं. गांव की महिलाएं भी इस बाजार में अपने हाथों से तैयार किए गए अलग-अलग ग्रामीण उत्पाद बेच रही हैं. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को एक नई पहचान और आमदनी का पक्का जरिया मिल गया है. जिला प्रशासन की योजना आने वाले समय में और अधिक किसानों और महिला समूहों को इस बाजार से जोड़ने की है.
जर्मनी-इटली के बाद अब विदेश जाएगी मुरादनगर की लौकी
मुरादनगर ब्लॉक के सुराना गांव के रहने वाले किसान जयवीर यादव बताते है कि वह पिछले कई सालों से पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं. वे अपनी और लीज पर ली गई जमीन पर भिंडी, बैंगन, पालक, टमाटर, लौकी, आलू और टिंडा जैसी कई सब्जियां उगाते हैं. उनके खेतों की सब्जियों के सैंपल इटली और जर्मनी जैसे देशों में भेजे जा चुके हैं और इस बार गाजियाबाद की ऑर्गेनिक लौकी विदेश भेजी जाने की तैयारी है.
बाजार से कम दामों पर मिल रही हैं सब्जियां
किसान जयवीर बताते हैं कि वे अपनी फसलों में किसी भी तरह की रासायनिक खाद या जहरीली दवाइयों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि सिर्फ गोबर की खाद और जैविक खाद का उपयोग करते हैं. उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में ऑर्गेनिक खेती करने वालों के लिए अपनी फसल बेचने का कोई बड़ा प्लेटफॉर्म नहीं था, लेकिन इस ग्रामीण बाजार ने उनकी यह चिंता दूर कर दी है. यहां टमाटर, खीरा, भिंडी, तोरई, लौकी, आलू और प्याज जैसी जरूरी सब्जियां बाजार से काफी कम दामों पर उपलब्ध हैं. जयवीर के मुताबिक, यह काम सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत सुधारने के लिए भी है.
किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश
जिला विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव का कहना है कि यह ग्रामीण बाजार किसानों को अपने पैरों पर खड़ा करने और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत बड़ा और कारगर कदम है. प्रशासन की पूरी कोशिश है कि आने वाले समय में इस सफल मॉडल को और बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, ताकि गांव के हर छोटे-बड़े उत्पाद को शहर में एक स्थायी बाजार मिल सके और किसानों की कमाई में लगातार इजाफा होता रहे.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें


