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Amethi News: अमेठी जिले के आसपास ऐसे स्थान हैं, जिसे देखने और उसकी अहमियत समझने के लिए लोग हमेशा उत्साहित रहते हैं. ऐसा ही है कुछ इतिहास जामों के एक अनोखी रियासत का. इस रियासत को संग्रहालय के रूप में भी देखा जाता है, क्योंकि यहां पर पुरानी चीज धरोहर के रूप में संरक्षित कर रखी गई है. पुरानी कार से लेकर दुर्लभ प्रजाति के पशु-पक्षी यहां धरोहर के रूप में मौजूद हैं.
अमेठी के जामों राज महल में प्राचीन चिड़ियाघर भी मौजूद है, जहां पर तोता-मैना और तरह-तरह के पक्षी के साथ विभिन्न प्रजाति के पशु भी मौजूद हैं और अलग-अलग स्थान पर उन्हें सुरक्षित रखा गया है. इसमें मैरून टेल कूनूर का तोता सहित अन्य चीज मौजूद हैं. इस चिड़ियाघर में आम लोग भी जाते हैं.

अमेठी का जामों राज महल किसी मिनी म्यूजियम से कम नहीं है. यहां पुरानी स्कूटर अंग्रेजों के जमाने की गाड़ियां के साथ विंटेज चीज जो धरोहर के रूप में है, वह मौजूद है. यहां पर जर्मनी, फ्रांस, यूएसए तक की गाड़ियां मौजूद हैं, जिसे लोग दूर-दूर से देखने के लिए आते हैं. अमेठी का जामो राजमहल काफी प्राचीन और ऐतिहासिक माना जाता है.

राजमहल के परिसर में यूएस वाई 63 यानी 1963 मॉडल की गाड़ियां भी मौजूद है. 1963 की यह कार किसी समय में एक धरोहर के रूप में जानी जाती थी, जिसे आज अमेठी के जामों राजमहल में संरक्षित करके रखा गया है. आज भी इसका प्रयोग राजमहल के विशिष्ट कार्यक्रमों में किया जाता है.
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इस राजमहल में छोटी गाय भी मौजूद है, जहां लोग इसे आकर्षण का केंद्र मानते हैं. जामों के राजा गोपाल जी की इस अनोखी वस्तुओं की श्रृंखला में चित्तूर की छोटी देसी गाय भी मौजूद है, जिसकी लंबाई-चौड़ाई अनुमानित तीन से चार फीट होगी. इसे भी लोग देखने के लिए आते हैं. यह भी एक अनोखी चीज राजमहल के परिसर में मौजूद है.

राजमहल के अंदर एक प्राचीन सरोवर भी मौजूद है, जहां विभिन्न प्रकार की मछलियां और बत्तख पानी के अंदर खूबसूरती और सुकून का एहसास कराती हैं. राजमहल में इसे भी लोग देखने के लिए आते हैं. खास बात यह है कि किसी प्रकार का कोई शुल्क यहां नहीं है. इंसान यहां आकर चीज देखकर उसे अपने कैमरे में कैद कर सकता है.

अमेठी के जामों राज महल की रियासत पहले राजा शिव प्रताप सिंह के पास थी और उनके ही समय में इस राज महल को बेहतर तरीके से विकसित किया गया. वर्तमान समय में राजमहल की रियासत के मुखिया अक्षय प्रताप सिंह गोपाल जी हैं, जो इस विरासत और यहां की चीजों को संभाल रहे हैं.

विभिन्न प्रजाति की चिड़िया और कबूतर भी राजमहल के चिड़ियाघर में मौजूद हैं. सभी के लिए रहने खाने और बैठने का पूरा सुरक्षित इंतजाम किया गया है. किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं होती और इन सब व्यवस्थाओं के लिए बकायदा कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है, जिससे किसी प्रकार की समस्या ना हो.

गाड़ियों के साथ-साथ आज के कई वर्ष पहले की पुरानी साइकिल जिसमें बैटरी और इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल होता था, वह भी इस राजमहल के परिसर में धरोहर के रूप में संरक्षित है और आज भी वह पूरी तरीके से चलती है और नई जैसी है.


