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UP News: छात्रा पर आरोप है कि उसने नाबालिग छात्रा का ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला. कोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता स्थापित हो सके. आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5 (1) के तहत एफआईआर दर्ज है. अदालत को बताया गया कि मामले में मुख्य आरोप सह-अभियुक्त अलीना के खिलाफ हैं, जिसे हाईकोर्ट पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है.
अदालत मुख्य आरोपी सह-अभियुक्त अलीना को पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है. फोटो AI
प्रयागराज. नाबालिग छात्रा को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी छात्रा की अग्रिम जमानत अर्जी की मंजूर कर ली है. याची छात्रा पर आरोप है कि उसने नाबालिग छात्रा का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला था. कोर्ट ने आरोपी छात्रा मालिश्का उर्फ मालिश्का फातिमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके. जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है.
सरकार की ओर से जमानत का विरोध
आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है. मुरादाबाद के थाना बिलारी में एफआईआर दर्ज किया गया था. आरोप लगाया गया कि आरोपी मालिश्का फातिमा ने उसकी नाबालिग बहन का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उसका ब्रेनवॉश किया. यह भी कहा गया कि 20 दिसंबर 2025 को उसे जबरन बुर्का दिया गया और लगातार धर्म बदलने का दबाव बनाया गया. राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि पीड़िता के बयान से स्पष्ट है कि उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा था. एफआईआर दर्ज करने में देरी के संबंध में यह दलील दी गई कि पीड़िता आरोपी के प्रभाव में थी, इसलिए जानकारी मिलने में समय लगा.
और क्या बोली अदालत
आरोपी की ओर से कहा गया कि वह पीड़िता से पहले से उसी विद्यालय में पढ़ रही थी और उसके खिलाफ किसी अन्य छात्रा को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने की कोई शिकायत नहीं है. अदालत को यह भी बताया गया कि मामले के मुख्य आरोप सह-अभियुक्त अलीना के खिलाफ हैं, जिसे हाईकोर्ट की एक पीठ पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है. हाईकोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत पर विचार करते समय आरोपों की गंभीरता, गिरफ्तारी की आशंका पर विचार किया जाता है. आरोपी का आपराधिक इतिहास, झूठे फंसाए जाने की संभावना, हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता, जांच में सहयोग और फरार होने के जोखिम जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाता है. कोर्ट ने पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पीड़िता के बयान के अलावा उसके खिलाफ अन्य स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं. अदालत ने माना कि आरोपी के फरार होने की संभावना कम है. याची ने जांच और ट्रायल में सहयोग का आश्वासन दिया है. हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी छात्रा को अग्रिम जमानत दे दी है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


