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तमिलनाडु में हर नई सरकार आते ही शराब की दुकानें क्यों बंद कर देती है? पहले किसने ऐसा किया

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तमिलनाडु में हर नई सरकार आते ही शराब की दुकानें क्यों बंद कर देती है?

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जनता का गुस्सा या खजाने की मजबूरी? तमिलनाडु में जयललिता से लेकर विजय तक, शराब की दुकानें बंद करने के पीछे का असल सच क्या है?

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तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनते ही विजय ने शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला किया है.

12 मई 2026 को मुख्यमंत्री विजय ने शपथ लेने के दो दिन के भीतर एक ऐसा फैसला किया, जिस पर तमिलनाडु ही नहीं पूरे देश में चर्चा होने लगी. विजय ने आदेश दिया कि शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों और प्रमुख बस स्टैंडों के 500 मीटर के दायरे में आने वाली 717 शराब की दुकानों को तुरंत बंद कर दिया जाए. इनमें से 276 दुकानें धार्मिक स्थलों के पास, 186 शिक्षण संस्थानों के पास और 255 बस स्टैंडों के पास थीं. मगर ऐसा क्यों होता है कि तमिलनाडु में हर नई सरकार आते ही कुछ न कुछ शराब की दुकानें बंद करती ही है.

लेकिन क्या ऐसा पहली बार हुआ है? बिल्कुल नहीं.

पहले समझते हैं TASMAC क्या है?
आसान शब्दों में कहें तो TASMAC (टासमैक) तमिलनाडु सरकार की अपनी एक कंपनी है, जिसे हिंदी में ‘तमिलनाडु राज्य विपणन निगम’ कह सकते हैं. तमिलनाडु में शराब बेचने का अधिकार सिर्फ इसी सरकारी कंपनी के पास है. वहां कोई भी निजी व्यक्ति अपनी शराब की दुकान नहीं खोल सकता. चाहे शराब की थोक सप्लाई हो या मोहल्ले की छोटी दुकान, सब कुछ सरकार ही चलाती है. साल 1983 में बनी यह कंपनी आज सरकार की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है, जिससे हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को मिलता है. लेकिन क्योंकि ये दुकानें अक्सर बस्तियों, मंदिरों या स्कूलों के पास होती हैं, इसलिए वहां की महिलाएं इनका कड़ा विरोध करती हैं. इसी जनता की नाराजगी को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अब इसकी 717 दुकानों पर ताला लगाने का बड़ा फैसला लिया है. और यही पहले की सरकारों ने भी किया है.

यह परंपरा पुरानी है, हर नई सरकार ने यही किया

23 मई 2016:
जयललिता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के पहले ही दिन 500 TASMAC दुकानें बंद करने का आदेश दिया. साथ ही उन्होंने दुकानों का समय भी घटा दिया. पहले दुकानें सुबह 10 बजे खुलती थीं, जिसे बदलकर दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक कर दिया गया. यह उनके चुनावी वादे का हिस्सा था, जिसे उन्होंने ‘क्रमिक शराबबंदी’ का नाम दिया था.

फरवरी 2017: जयललिता के निधन के बाद के पलानीस्वामी की सरकार ने जयललिता की जयंती 24 फरवरी के मौके पर 500 TASMAC दुकानें और उनसे जुड़े 169 बार बंद किए. इस तरह 2016-17 के दौरान कुल 1,000 दुकानें बंद हुईं.

2023: एमके स्टालिन की DMK सरकार ने भी अपने चुनावी घोषणापत्र के वादे को निभाते हुए 500 TASMAC दुकानें बंद कीं.

मई 2026: अब विजय ने 717 दुकानें बंद की हैं, जो अब तक किसी भी मुख्यमंत्री की ओर से एक बार में बंद की गईं शराब की सबसे ज्यादा दुकानें हैं.

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Dushyant KumarAssociate Editor

मैं नेटवर्क-18 में एसोसिएट एडिटर हूं। News18 ऐप में बतौर लीड काम कर रहा हूं। कंटेंट स्ट्रैटेजी बनाने के साथ-साथ डिजिटल मीडिया और न्यूज़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नए प्रयोगों पर काम कर रहा हूं। अपनी पसं…और पढ़ें

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