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5 cricketers played Most consecutive test matches: क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में टेस्ट क्रिकेट को आज भी खेल का सबसे कठिन और वास्तविक इम्तिहान माना जाता है. पांच दिनों तक चलने वाले इस खेल में न केवल खिलाड़ी के कौशल, बल्कि उसकी मानसिक दृढ़ता, शारीरिक फिटनेस और अटूट प्रतिबद्धता की भी परीक्षा होती है. इस कड़े इम्तिहान के बीच, कुछ ऐसे ‘लौहपुरुष’ हुए हैं जिन्होंने चोटों, खराब फॉर्म और थकान को मात देते हुए लगातार बिना एक भी मैच छोड़े अपनी टीम के लिए मैदान संभाला. टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले इन दिग्गजों की कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि उनके फौलादी इरादों की दास्तान है.
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और दिग्गज ओपनर एलिस्टर कुक (Alastair Cook) के नाम टेस्ट इतिहास में लगातार सबसे ज्यादा मैच खेलने का वो रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे तोड़ना मॉडर्न क्रिकेट में नामुमकिन सा नजर आता है. कुक ने 11 मई 2006 से लेकर 7 सितंबर 2018 को अपने संन्यास तक लगातार 159 टेस्ट मैच खेले. इंग्लैंड जैसी टीम के लिए, जो साल में सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलती है, एक सलामी बल्लेबाज के रूप में बिना थके और बिना ड्रॉप हुए 12 साल तक लगातार खेलना उनके अविश्वसनीय फिटनेस स्तर और मानसिक मजबूती को दर्शाता है.

दिलचस्प बात यह है कि एलिस्टर कुक के इस सिलसिले की शुरुआत भारत के खिलाफ 2006 में हुई थी और इसका अंत भी 2018 में भारत के खिलाफ ही हुआ. अपने आखिरी टेस्ट मैच में उन्होंने शानदार शतक जड़कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के एलन बॉर्डर का सालों पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था. कुक के इस सफर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इंग्लैंड की बदलती पिचों और कड़कड़ाती ठंड में भी उनका शरीर और उनका बल्ला कभी नहीं डिगा.

कुक से पहले इस जादुई सूची में शीर्ष पर रहने वाले खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर (Allan Border) थे. बॉर्डर ने 10 मार्च 1979 से 25 मार्च 1994 के बीच लगातार 153 टेस्ट मैच खेले थे. यह वह दौर था जब ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बदलाव के दौर से गुजर रहा था और बॉर्डर ने अकेले दम पर टीम को संभाला था. लगातार 153 मैचों तक मैदान पर डटे रहना यह साबित करता है कि बॉर्डर न केवल एक बेहतरीन बल्लेबाज थे, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की रीढ़ की हड्डी थे.
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80 और 90 के दशक में आज की तरह आधुनिक फिजियोथेरेपी और स्पोर्ट्स साइंस की सुविधाएं नहीं थीं. उस दौर में वेस्टइंडीज के खूंखार गेंदबाजों की तेजतर्रार गेंदों का सामना करते हुए, बिना हेलमेट या बुनियादी सुरक्षा उपकरणों के साथ लगातार 153 मैच खेलना किसी चमत्कार से कम नहीं था. बॉर्डर ने अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में ही निरंतरता का एक ऐसा पैमाना सेट किया, जिसने आगे चलकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के दबदबे की नींव रखी.

ऑस्ट्रेलिया के सबसे कलात्मक बल्लेबाजों में शुमार मार्क वॉ इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर आते हैं. ‘जूनियर’ के नाम से मशहूर मार्क वॉ ने 3 जून 1993 से 19 अक्टूबर 2002 के बीच लगातार 107 टेस्ट मैच खेले. जहां उनके जुड़वां भाई स्टीव वॉ अपनी कड़क बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे, वहीं मार्क वॉ अपनी सहज और कलात्मक शैली के लिए प्रसिद्ध थे. लेकिन इस सहजता के पीछे एक बेहद मजबूत और फिट खिलाड़ी छिपा था जिसने एक दशक तक ऑस्ट्रेलिया के स्वर्णिम काल में एक भी मैच मिस नहीं किया.

मार्क वॉ (Mark Waugh) की इस निरंतरता का एक बड़ा कारण उनकी लाजवाब फील्डिंग भी थी. वह स्लिप के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फील्डर माने जाते थे, जहां उंगलियों और कलाई में चोट लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसके बावजूद, उन्होंने चोटों को खुद पर हावी नहीं होने दिया और लगातार 107 मैचों तक ऑस्ट्रेलियाई मिडिल ऑर्डर और स्लिप कोर्डन को संभाले रखा. उनका यह सफर 2002 में पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज के दौरान थमा.

भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे महान सलामी बल्लेबाजों में से एक सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) इस सूची में चौथे स्थान पर हैं. गावस्कर ने 23 जनवरी 1975 से 3 फरवरी 1987 के बीच भारत के लिए लगातार 106 टेस्ट मैच खेले. उस दौर में जब भारतीय क्रिकेट के पास आज जैसी सुविधाएं नहीं थीं और खिलाड़ियों को लगातार यात्राएं करनी पड़ती थीं, गावस्कर का यह रिकॉर्ड उनके अद्वितीय समर्पण को बयां करता है.

गावस्कर की इस उपलब्धि का महत्व तब और बढ़ जाता है जब हम यह याद करते हैं कि उन्होंने अपने करियर का अधिकांश समय बिना ग्रिल वाले हेलमेट या सिर्फ एक मामूली कैप पहनकर खेला. दुनिया के सबसे खतरनाक वेस्टइंडीज और पाकिस्तानी तेज गेंदबाजों के सामने पारी की शुरुआत करते हुए लगातार 106 मैचों तक फिट रहना और रन बनाना उनकी तकनीकी श्रेष्ठता और मानसिक दृढ़ता का सबसे बड़ा प्रमाण है. इस दौरान उन्होंने कई बार चोटिल होने के बावजूद देश के लिए खेलना जारी रखा.

न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ब्रेंडन मैकुलम का नाम इस लिस्ट में सबसे अनोखा है. मैकुलम ने 10 मार्च 2004 को अपना टेस्ट डेब्यू किया और 20 फरवरी 2016 को अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला. इस पूरे करियर के दौरान उन्होंने लगातार 101 टेस्ट मैच खेले. इसका मतलब यह है कि मैकुलम ने अपने पूरे टेस्ट करियर में कभी भी ड्रॉप होने या चोट के कारण बाहर बैठने का स्वाद नहीं चखा. वह डेब्यू से लेकर संन्यास तक लगातार खेलने वाले दुनिया के एकमात्र क्रिकेटर हैं.

मैकुलम के इस रिकॉर्ड की संजीदगी को इस बात से समझा जा सकता है कि उन्होंने अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा एक विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में बिताया. टेस्ट क्रिकेट में विकेटकीपिंग करना शारीरिक रूप से सबसे थकाऊ काम माना जाता है, जिसमें घुटनों और पीठ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. बाद में पीठ की गंभीर समस्या के कारण उन्होंने कीपिंग छोड़ी, लेकिन एक शुद्ध बल्लेबाज और कप्तान के रूप में खेलना जारी रखा. अपने आखिरी टेस्ट में भी उन्होंने इतिहास का सबसे तेज शतक (54 गेंदों में) लगाकर अपने इस जादुई और निरंतर सफर का अंत किया.


