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काबुल से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे एक अफगानी नागरिक ने एक किलो हेरोइन गटक रखी थी. यह हेरोइन गटकने से पहले कैप्सूल्स में भरा गया था. वहीं, पकड़े जाने के बाद कोर्ट में कुछ ऐसा हुआ कि आरोपी अफगानी नागरिक को रिहा कर दिया गया.
करीब एक किलो हेरोइन गटक पर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे अफगानी नागरिक को कोर्ट से बरी कर दिया गया है.
NCB News: यह मामला एक अफगानी मूल के नागरिक से जुड़ा हुआ है. करीब पांच साल पहले यह अफगानी नागरिक करीब एक किलो हेरोइन निगली और फ्लाइट पकड़कर दिल्ली पहुंच गया. दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अफसरों ने उसे अरेस्ट कर लिया. कोर्ट में करीब पांच साल तक इस मामले की सुनवाई चलती रही. इसी बीच, कोर्ट में कुछ ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने न केवल जज साहब को सोचने पर मजबूर कर दिया, बल्कि एनसीबी भी चकरा गई. आखिर में, कोर्ट ने इस अफगानी नागरिक में लगे आरोपों को खारिज कर उसे रिहा कर दिया.
दरअसल, यह मामला नवंबर 2020 का है. अहमद जान सिद्दीकी नाम का यह अफगानी नागरिक काबुल से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था. यही से एनसीबी के अधिकारियों ने अहमद को अरेस्ट कर लिया था. एजेंसी का दावा था कि उसने करीब 918 ग्राम हेरोइन से भरे कैप्सूल्स निगल रखे हैं. इसके बाद, अहमद को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. 6 से 10 नवंबर के बीच डॉक्टर्स की निगरानी में उसके पेट से 87 कैप्सूल बाहर निकाले थे. इस बरामदगी के बाद एनसीबी ने अहमद को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश किया था.
पांच साल चली सुनवाई के दौरान एनसीबी की तरफ से रखे गए तमाम सबूत कोर्ट में टिक नहीं सके. नतीजतन, कोर्ट से उसे बरी कर दिया गया. पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष एनडीपीएस जज जितेंद्र प्रताप सिंह ने 17 अप्रैल को दिए अपने आदेश में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष कई जरूरी बातों को साबित करने में नाकाम रहा है. इस केस में सबसे कमजोर कड़ी कोर्ट में पेश किए गए मेडिकल सबूत रहे. अदालत ने कहा कि मामले में एक्स-रे रिपोर्ट, रेडियोलॉजी फिल्म या अस्पताल के पूरे रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए. जबकि यह मामला इस बात पर आधारित था कि आरोपी ने ड्रग्स निगली थी.
इस मामले में कोर्ट ने और क्या-क्या कहा?
- ठोस दस्तावेजों न होने के चलते यह साबित नहीं हो सका कि वास्तव में उसके शरीर के अंदर कोई नशीला पदार्थ था. मामले में गवाह डॉ. भूर सिंह ने शुरुआत में कहा था कि सिद्दीकी के पेट से अस्पताल में कैप्सूल बाहर निकाले गए.
- लेकिन जिरह के दौरान उन्होंने कई अहम बातें नकार दीं. उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद आरोपी को शौच करते नहीं देखा, न ही उन्होंने कैप्सूल को धोते या पैकेट में रखते देखा. अदालत ने इन खामियों को बहुत गंभीर माना है.
- जज ने कहा कि अगर डॉक्टर खुद इन अहम प्रक्रियाओं के गवाह नहीं हैं, तो यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि जो कैप्सूल जब्त किए गए, वही आरोपी के शरीर से निकले थे.
- कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपी को उसके अधिकारों की सही जानकारी नहीं दी गई. कानून के तहत किसी भी संदिग्ध को यह बताना जरूरी होता है कि वह अपनी तलाशी मजिस्ट्रेट या किसी गजटेड अधिकारी के सामने करवा सकता है.
- लेकिन अदालत ने पाया कि इस प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. चूंकि सिद्दीकी एक विदेशी नागरिक है, इसलिए यह और भी जरूरी था कि उसे उसकी समझ की भाषा में उसके अधिकार बताए जाएं.
- लेकिन ट्रांसलेटर की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठे. अदालत ने कहा कि यह साफ नहीं है कि एयरपोर्ट पर अनुवादक मौजूद था या नहीं, उसने क्या अनुवाद किया और क्या उसने दस्तावेजों पर सही तरीके से हस्ताक्षर किए.
- इसके अलावा, ड्रग्स के सबूतों के तौर पर जब्त करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अदालत ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था, न ही कोई फोटो, वीडियो या सीसीटीवी फुटेज पेश की गई.
- अस्पताल में रखे गए सामान का भी सही रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया. एनसीबी का यह भी दावा था कि यह हेरोइन एक सह-आरोपी के लिए लाई जा रही थी, जो अब फरार है और उसे 2026 में घोषित अपराधी घोषित किया गया है.
- लेकिन मुख्य आरोपी के खिलाफ कोई भी सबूत पेश नहीं किए जा सके. इन सभी खामियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे जाकर अपराध साबित करने में असफल रहा है. इसलिए सिद्दीकी को बरी किया जाता है.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें


