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ईरान के विदेश मंत्री का यह फोन कॉल भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत का प्रमाण है. पाकिस्तान और रूस के बाद भारत को इस संवाद में शामिल करना यह साबित करता है कि दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच की कड़ी के रूप में भारत की भूमिका कितनी निर्णायक हो गई है. आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि जयशंकर और अराघची के बीच हुई यह विस्तृत चर्चा सीजफायर की दिशा में क्या कोई नया रास्ता खोल पाती है या नहीं.
ईरानी विदेश मंत्री ने जयशंकर से फोन पर बात की.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बुधवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को फोन किया और उनसे मिडिल ईस्ट के हालात पर ‘बेहद महत्वपूर्ण’ चर्चा की. इसकी टाइमिंग खास है. क्योंकि अमेरिका के साथ बातचीत टूटने के बाद से अराघची पहले पाकिस्तान गए, ओमान गए, वहां से फिर पाकिस्तान गए, उन्हें ईरान की शर्तें बताईं. फिर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए सेंट पीट्सबर्ग चले गए. वहां से लौटते ही उन्होंने जयशंकर से बात की है.
कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि रूस से लौटते ही भारत के विदेश मंत्री को फोन करना यह संकेत है कि ईरान, भारत को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की प्रक्रिया में एक अनिवार्य खिलाड़ी मानता है. बातचीत के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा, ईरान के विदेश मंत्री अराघची का फोन आया. हमने मौजूदा स्थिति के कई पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की है.भविष्य में भी निरंतर और करीबी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई है.
होर्मुज संकट और दुनिया की चिंता
इस फोन कॉल के पीछे सबसे बड़ा कारण होर्मुज में बढ़ता तनाव है. जयशंकर और अराघची की बातचीत में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर न पड़े. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत हद तक निर्भर है, इसलिए नई दिल्ली के लिए यह चर्चा सामरिक रूप से बेहद अहम है.
Received a phone call from Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi of Iran this evening. @araghchiHad a detailed conversation about various aspects of the current situation. We agreed to remain in close touch.


