तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त जो कुछ हो रहा है, वह किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. सिनेमा के पर्दे पर राज करने वाले थलापति विजय अब तमिलनाडु की सत्ता के ‘सिंहासन’ पर बैठने को बेताब हैं. उनकी पार्टी टीवीके (TVK) ने 108 सीटें जीतकर सबको हैरान तो कर दिया है, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 अब भी उनसे 10 सीट दूर है. इसके बावजूद, सियासी गलियारों में खबर आग की तरह फैली है कि विजय आगामी 7 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. विजय ने शपथ ग्रहण के लिए 7 मई की तारीख बहुत सोच-समझकर चुनी है. यह तारीख न केवल उनके आत्मविश्वास को दर्शाती है, बल्कि विपक्षी खेमे में खलबली मचाने का एक बड़ा जरिया भी है. तमिलनाडु की जनता अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर बिना बहुमत के विजय राजभवन तक का सफर कैसे तय करेंगे और उनकी कैबिनेट में कौन-कौन से दिग्गज शामिल होने जा रहे हैं. तो चलिए समझते हैं सिलसिलेवार पूरी कहानी.
7 मई की तारीख का स्टालिन कनेक्शन
तमिलनाडु की राजनीति में प्रतीकों और तारीखों का बड़ा महत्व होता है. इसी को देखते हुए विजय का 7 मई को शपथ लेने का फैसला सीधे तौर पर एम.के. स्टालिन को संदेश देना है. असल में इसके पीछे बहुत बड़ी कहानी है. साल 2021 में इसी 7 मई को स्टालिन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. विजय चाहते हैं कि वे उसी तारीख को सत्ता संभालें ताकि जनता के बीच यह संदेश जाए कि द्रविड़ राजनीति का पुराना अध्याय खत्म हो चुका है और ‘विजय युग’ की शुरुआत हो गई है.
सबसे बड़े दल का संवैधानिक दांव
जब किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता, तो राज्यपाल के पास यह विशेषाधिकार होता है कि वह ‘सबसे बड़े दल’ (Single Largest Party) को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करे. विजय इसी संवैधानिक रास्ते पर चलने की तैयारी कर रहे हैं. 108 सीटों के साथ टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है. न्यूज़18-तमिल की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर दो हफ्ते का समय मांगा है ताकि वे अपना बहुमत साबित कर सकें. इस दौरान वे निर्दलीयों और छोटे दलों जैसे कांग्रेस और सीपीआई के विधायकों का समर्थन हासिल करने की जुगत में हैं.
होटल में कैद माननीय और सुरक्षा
राजनीति में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर हमेशा बना रहता है. विजय इस खेल के नए खिलाड़ी हैं, इसलिए वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहते. खबर है कि टीवीके के सभी 107 विजयी विधायकों को चेन्नई के पनायूर स्थित कार्यालय में मीटिंग के बाद एक आलीशान स्टार होटल में शिफ्ट कर दिया गया है. न्यूज़18-तमिल के अनुसार, इन विधायकों की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता. 7 मई को शपथ ग्रहण तक इन सभी को वहीं रखा जाएगा ताकि विपक्षी दल कोई सेंधमारी न कर सकें.
विजय कैबिनेट के वो संभावित चेहरे
थलापति विजय की कैबिनेट को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. सूत्रों और न्यूज़18-तमिल की जानकारी के मुताबिक, इस मंत्रिमंडल में अनुभव और नए जोश का तड़का देखने को मिलेगा. एन. आनंद और आधव अर्जुन जैसे करीबियों का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. इसके अलावा, एआईएडीएमके के पूर्व दिग्गज सेनगोट्टैयन का नाम भी चर्चा में है, जो अपने प्रशासनिक अनुभव से विजय की सरकार को मजबूती दे सकते हैं. विजय चाहते हैं कि उनकी टीम ऐसी हो जो पहले दिन से ही जनता के काम करना शुरू कर दे.
रणनीतिकार जॉन अरोकियासामी का मास्टर प्लान
विजय की इस पूरी जीत के पीछे जॉन अरोकियासामी का दिमाग बताया जा रहा है. पनायूर कार्यालय में हुई बैठकों में जॉन ने ही यह सुझाव दिया था कि 7 मई को शपथ लेना एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित होगा. न्यूज़18-तमिल की खबर कहती है कि जॉन अरोकियासामी ने न केवल चुनाव प्रचार संभाला, बल्कि अब वे बैकडोर चैनल से निर्दलीय विधायकों से भी बात कर रहे हैं. उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शपथ ग्रहण के बाद जब सदन में शक्ति परीक्षण हो, तो विजय के पास 118 से ज्यादा विधायकों का समर्थन मौजूद हो.
मंत्रिमंडल में युवाओं को मिलेगा मौका
विजय की पार्टी टीवीके का मूल मंत्र ही बदलाव है. ऐसे में यह माना जा रहा है कि उनके मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को जगह दी जाएगी. न्यूज़18-तमिल की रिपोर्ट के अनुसार, निर्मल कुमार, श्रीनाथ और अरुण राज जैसे युवा नेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. विजय का विजन है कि तमिलनाडु के शासन में तकनीक और आधुनिकता का समावेश हो. पुराने ढर्रे की राजनीति को बदलकर वे एक पारदर्शी सिस्टम बनाना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें एक वफादार और मेहनती टीम की जरूरत है.
द्रविड़ किलों को ढहाने की तैयारी
पिछले 50 सालों से तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके का ही बोलबाला रहा है. विजय ने 108 सीटें जीतकर इस ‘बाइपोलर’ राजनीति को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं. न्यूज़18-तमिल के मुताबिक, विजय की नजर उन सीटों पर है जहां हार-जीत का अंतर बहुत कम रहा है. 7 मई को शपथ लेकर वे न केवल सत्ता संभालेंगे, बल्कि विपक्षी विधायकों को भी अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश करेंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विजय अपनी इस ‘विजया’ यात्रा को स्थायित्व दे पाते हैं या नहीं.


