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बुलंद दरवाजे से पंच महल तक… फतेहपुर सीकरी का हर कोना सुनाता है मुगलकाल की कहानी, देखिए तस्वीरें

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उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित फतेहपुर सीकरी मुगलकालीन इतिहास, भव्य वास्तुकला और रोचक कहानियों का अद्भुत संगम है. यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल यह ऐतिहासिक स्थल कभी मुगल बादशाह अकबर की राजधानी हुआ करता था. यहां बुलंद दरवाजा, पंच महल, दीवान-ए-खास, अनूप तालाब और शेख सलीम चिश्ती की दरगाह जैसी कई ऐतिहासिक इमारतें मौजूद हैं, जो आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

फतेहपुर सीकरी में बनी यह इमारत लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है. इसके अंदर सफेद संगमरमर की एक खूबसूरत इमारत स्थित है, जहां शेख सलीम चिश्ती की दरगाह मौजूद है. वर्तमान समय में भी लोग यहां आकर दुआएं मांगते हैं और उनकी मुरादें पूरी होती हैं.

किस्से

फतेहपुर सीकरी में विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा बुलंद दरवाजा स्थित है. बताया जाता है कि मुगल बादशाह सम्राट अकबर ने गुजरात विजय के बाद अपने प्रवेश के लिए इस भव्य दरवाजे का निर्माण कराया था. इस विशाल गेट पर कुरान की कई आयतें भी लिखी हुई हैं, जो इसकी खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाती हैं.

किस्से

उत्तर प्रदेश के आगरा में कई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं, जिनके पीछे कई रोचक किस्से और कहानियां जुड़ी हुई हैं. आज हम आपको यूनेस्को विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी के बारे में ऐसी जानकारी देंगे, जिसे बेहद कम लोग जानते हैं. फतेहपुर सीकरी वह स्थान माना जाता है, जहां मुगल बादशाह अकबर को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिला था. बताया जाता है कि सीकरी के सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की दुआओं और आशीर्वाद से ही अकबर को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी. बाद में उसी पुत्र का नाम सलीम रखा गया, जो आगे चलकर जहांगीर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

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किस्से

फतेहपुर सीकरी में एक ऐसा स्थान भी मौजूद है, जिसे “आंख मिचौली” इमारत के नाम से जाना जाता है. बताया जाता है कि मुगल बादशाह अकबर मनोरंजन के लिए यहां आया करते थे और अपनी रानियों के साथ लुका-छिपी का खेल खेलते थे. इसी वजह से इस इमारत का नाम “आंख मिचौली” पड़ गया.

किस्से

फतेहपुर सीकरी में एक ऐसी इमारत भी मौजूद है, जिसे पंच महल कहा जाता है. यह इमारत बौद्ध विहारों से प्रेरित होकर बनवाई गई थी और पांच मंजिला संरचना के रूप में तैयार की गई है. यह पूरी इमारत खंभों पर टिकी हुई है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाती है. बताया जाता है कि यह स्थान काफी हवादार था, इसलिए मुगलकाल में रानियां और शाही महिलाएं गर्मियों के दौरान यहां समय बिताया करती थीं और मनोरंजन किया करती थीं.

किस्से

फतेहपुर सीकरी को मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है. यहां स्थित दीवान-ए-खास में एक विशाल नक्काशीदार खंभा बना हुआ है. बताया जाता है कि मुगल बादशाह अकबर इसी स्थान पर बैठकर अपने नवरत्नों के साथ महत्वपूर्ण चर्चाएं किया करते थे.

किस्से

फतेहपुर सीकरी एक समय मुगलों की राजधानी हुआ करता था. इसी परिसर में मुगल बादशाह निवास करते थे, लेकिन यहां पानी की भारी किल्लत होने के कारण मुगलों को यह स्थान छोड़ना पड़ा. इसके बाद मुगल बादशाह आगरा की ओर चले गए. वर्तमान समय में फतेहपुर सीकरी की ये ऐतिहासिक इमारतें अपनी भव्यता और अद्भुत वास्तुकला के कारण सौंदर्य का प्रतीक मानी जाती हैं.

किस्से

फतेहपुर सीकरी में एक स्थान अनूप तालाब के नाम से प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि मुगल काल में अनूप तालाब के पास बने चबूतरे पर बैठकर संगीत सम्राट Tansen राग प्रस्तुत किया करते थे. मुगल बादशाह Akbar बड़े ध्यान से उनका संगीत सुनते थे और मनोरंजन किया करते थे. वर्तमान समय में फतेहपुर सीकरी की इन ऐतिहासिक इमारतों को देखने के लिए हजारों पर्यटक पहुंचते हैं और इसकी अद्भुत खूबसूरती का दीदार करते हैं.

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