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भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर बसी है राननगरी, कभी अयोध्या का नाम था साकेत, सरयू नदी का भी है एक रहस्य

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Ayodhya Latest News: मान्यताओं के अनुसार अयोध्या नगरी भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर बसी हुई है. कहते हैं कि अयोध्या पहले साकेत नाम से जानी जाती थी. आइए विस्तार से सबकुछ.

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं बल्कि भारत की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी नगरियों में से एक मानी जाती है. यही वजह है कि इस नगरी को सिर्फ अयोध्या नाम से नहीं बल्कि साकेत के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस नगरी का वर्णन इतने अद्भुत तरीके से किया गया है कि कई बातें सुनकर आज भी लोगों को यकीन नहीं होता है. पवित्र सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या को हिंदू धर्म की सप्तपुरियों में स्थान प्राप्त है. माना जाता है कि जिस प्रकार मथुरा, काशी, हरिद्वार, द्वारिका मोक्षदायिनी नगरी है. उसी प्रकार अयोध्या भी मानव जीवन को मुक्ति प्रदान करने वाली पवित्र नगरी मानी जाती है. अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर कहा गया है और इसकी तुलना स्वर्ग से की गई है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या की स्थापना स्वयं मनु ने की थी. यही नगरी आगे चलकर सूर्यवंश और रघुवंश के राजाओं की राजधानी बनी. रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म इसी पावन भूमि पर हुआ था. कहा जाता है कि अयोध्या पर शासन करने वाले राजा दशरथ इस वंश के 63वें शासक थे. बहुत कम लोग जानते हैं कि अयोध्या का प्राचीन नाम साकेत था. पवन दास शास्त्री बताते हैं कि स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि यह नगरी भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर बसी हुई है. मान्यता है कि जब भगवान विष्णु ने रामावतार लेने का निर्णय लिया, तब उन्होंने ब्रह्मा, मनु, देव शिल्पी विश्वकर्मा और महर्षि वशिष्ठ को पृथ्वी पर उपयुक्त स्थान चुनने के लिए भेजा. इसके बाद देव शिल्पी विश्वकर्मा ने इस दिव्य नगरी का निर्माण किया.

अयोध्या से जुड़ी एक और अनसुनी बात यह है कि यहां की सरयू नदी को केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी धारा माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि सरयू स्नान से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां स्नान और दर्शन के लिए पहुंचते हैं. आज भले ही अयोध्या आधुनिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन इसकी गलियों, घाटों और मंदिरों में आज भी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की जा सकती है. यही वजह है कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक मानी जाती है.

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Abhijeet ChauhanSub-Editor

अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…और पढ़ें



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