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भिंडी से लौकी तक…बारिश में ये 8 सब्जियां किसानों के लिए जैकपॉट, गोंडा के कृषि वैज्ञानिक से जानिए तरीका

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भिंडी से लौकी तक…बारिश में ये 8 सब्जियां किसानों के लिए जैकपॉट

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Agri Tips for Rainy Season : थोड़े दिन में मानसून दस्तक देने वाला है. बारिश का मौसम सब्जियों की खेती का सबसे अच्छा समय माना जाता है. जून और जुलाई में खेतों में नमी अच्छी रहती है, जिससे सब्जियों की खेती आसानी से की जा सकती है. किसान अगर समय पर सही सब्जी की बुवाई करें, तो कम लागत में अच्छी पैदावार पाई जा सकती है. बरसात में ऐसी कौन सी सब्जियों की खेती सबसे अच्छी है, इस बारे में लोकल 18 ने गोंडा के कृषि एक्सपर्ट डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा से बात की. वे बताते हैं कि बरसात के मौसम में ऐसी आठ सब्जियां हैं, जिनकी खेती किसानों को जरूर करनी चाहिए.

खीरा की खेती : खीरे की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है. खीरा गर्मी और बरसात दोनों मौसम में खूब पसंद किया जाता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. इसकी खेती के लिए हल्की और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. गोंडा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कहते हैं कि समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से उत्पादन बेहतर होता है. खीरे की फसल जल्दी तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में बिक्री शुरू कर सकते हैं. शहरों और गांवों दोनों जगह इसकी अच्छी कीमत मिलती है. सही देखभाल और उन्नत बीजों से किसान अच्छी पैदावार पा सकते हैं.

बैंगन की खेती

बैंगन की खेती : बैंगन की खेती किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रही है. इसकी खेती लगभग पूरे साल की जाती है, लेकिन बारिश का मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त है. बैंगन की फसल के लिए उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर रहती है. अच्छी किस्म के बीज, समय पर सिंचाई और संतुलित खाद देने से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है. फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए नियमित निगरानी जरूरी होती है. बैंगन की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है, इसलिए किसान इसकी खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं. सही देखभाल से बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है.

करेला की खेती

करेला की खेती : करेले को कई लोग इसके औषधीय गुणों के कारण पसंद करते हैं. बारिश के मौसम में करेला की बेल तेजी से बढ़ती है और अच्छी पैदावार देती है. इसकी खेती के लिए गर्म और नम जलवायु उपयुक्त है. समय पर सिंचाई, खाद और बेलों को सहारा देने से उत्पादन बढ़ता है. करेला की फसल कम समय में तैयार हो जाती है.

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भिंडी की खेती

भिंडी की खेती : भिंडी की खेती जून-जुलाई के मौसम में किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. भिंडी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त है. समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और संतुलित खाद देने से उत्पादन बढ़ता है. किसान उन्नत किस्मों का चयन करके बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. भिंडी की फसल लगभग 45 से 60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है.

सेम की खेती

सेम की खेती : सेम की खेती बारिश के मौसम में किसानों के लिए काफी लाभदायक है. इस फसल की बेल तेजी से बढ़ती और फैलती है, जिससे कम समय में उत्पादन शुरू हो जाता है. सेम की खेती के लिए उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर है. समय पर सिंचाई, खाद और बेलों को सहारा देने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है. सही देखभाल और उन्नत बीजों का उपयोग करने पर किसान कम लागत में अच्छी कमाई कर सकते हैं.

मिर्च की खेती

मिर्च की खेती : डॉ. अभिषेक बताते हैं कि हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है. इसकी मांग हर रसोई में रहती है, इसलिए बाजार में इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है. जून-जुलाई में हरी मिर्च की रोपाई करने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और अच्छी पैदावार मिलती है. इसके लिए उपजाऊ और जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और संतुलित खाद देने से उत्पादन बढ़ता है. सही देखभाल और उन्नत बीजों से अच्छी कमाई पक्की है.

लौकी की खेती

लौकी की खेती : कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बरसात के मौसम में लौकी की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है. लौकी की फसल की सही तरीके से देखभाल की जाए तो कम लागत में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है. यह फसल लगभग 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है.

तोरई की खेती

तोरई की खेती : तोरई की खेती बारिश के मौसम में बेस्ट है. यह फसल कम लागत में आसानी से तैयार हो जाती है. गर्म और नमी वाला मौसम तोरई की बढ़वार के लिए मुफीद है. इसके लिए बुवाई के बाद समय-समय पर सिंचाई और खाद देने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं. बेलों को सहारा देने से फल की गुणवत्ता अच्छी रहती है. अगर किसान मचान पर तोरई की खेती करते हैं तो पैदावार बढ़ जाती है.



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