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मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला को मिलेगा पूरा हक, देना ही पड़ेगा गुजारा भत्ता, कलकत्ता HC का बड़ा फैसला

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मुस्लिम से शादी करने वाली हिंदू महिला को गुजारा भत्ता देना पड़ेगा, HC का फैसला

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कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी करने वाली हिंदू महिला भी गुजारा भत्ता पाने की हकदार है. अदालत ने साफ किया कि जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा विवाह को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक पति को भरण-पोषण देना होगा. हाई कोर्ट ने पश्चिम बर्द्धमान की मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें महिला को 5 हजार रुपये और उसके नाबालिग बेटे को 4 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था.

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हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल तकनीकी आधारों पर किसी महिला और बच्चे को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता है.

Calcutta High Court: कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर कोई हिंदू महिला मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार शादी करती है, तब भी उसे गुजारा भत्ता पाने का पूरा अधिकार होगा. अदालत ने कहा कि जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा शादी को अवैध घोषित नहीं किया जाता, तब तक पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए जिम्मेदार रहेगा.

यह मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले का है. यहां एक हिंदू महिला ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसके पति ने उसे छोड़ दिया और घरेलू हिंसा भी की. इसके बाद महिला ने मजिस्ट्रेट अदालत का दरवाजा खटखटाया. अदालत ने महिला को अंतरिम भरण-पोषण के तौर पर हर महीने 5 हजार रुपये और उसके नाबालिग बेटे के लिए 4 हजार रुपये देने का आदेश दिया था.

हालांकि, फरवरी 2024 में आसनसोल की एक पुनरीक्षण अदालत ने इस आदेश को रद्द कर दिया था. पति ने दलील दी थी कि शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है, इसलिए भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता. पुनरीक्षण अदालत ने इसी आधार पर मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज कर दिया था. लेकिन अब कलकत्‍ता हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया है. न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी ने अपने आदेश में कहा है कि पुनरीक्षण अदालत ने सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनी सिद्धांतों को नजरअंदाज किया.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल तकनीकी आधारों पर किसी महिला और बच्चे को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी को भरण-पोषण देने के लिए बाध्य है, जब तक विवाह को किसी सक्षम अदालत द्वारा अमान्य घोषित न कर दिया जाए. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट अदालत के पुराने आदेश को फिर से बहाल कर दिया और पति को निर्देश दिया कि वह तय की गई अंतरिम भरण-पोषण राशि का भुगतान करे.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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