लखनऊ: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ कथित रूप से ‘आय से अधिक संपत्ति’ अर्जित करने के मामले में बड़ा और सख्त कदम उठाया है. हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले में मिली शिकायत पर कानून के तहत जांच करने और एक्शन लेने का आदेश दिया है. इसके साथ ही, अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों बड़ी एजेंसियों से आगामी 20 जुलाई तक जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी तलब कर ली है.
बीजेपी कार्यकर्ता की याचिका पर आया आदेश
यह पूरा मामला कर्नाटक के एक बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दायर की गई एक आपराधिक रिट याचिका से जुड़ा है. न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की. दरअसल, इस संवेदनशील मामले की सुनवाई बीते 12 मई को कोर्ट के चैंबर में गोपनीय तरीके से हुई थी, जिसके बाद गुरुवार को हाईकोर्ट का यह आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया.
याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और कारपोरेट कार्य मंत्रालय को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है.
’54 विदेश दौरे और 60 करोड़ का खर्च’
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर का दावा है कि राहुल गांधी ने अपनी कमाई के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा कर रखी है. याचिका में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आरोप राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर लगाया गया है. आरोप के मुताबिक, पिछले 22 सालों में राहुल गांधी ने कुल 54 विदेश यात्राएं की हैं, जिन पर लगभग ₹60 करोड़ खर्च हुए हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह भारी-भरकम खर्च राहुल गांधी की घोषित आय से बिल्कुल मेल नहीं खाता है. गौरतलब है कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे के अनुसार, राहुल गांधी ने अपनी कुल चल और अचल संपत्ति लगभग ₹20.39 करोड़ घोषित की थी.
CBI-ED और SFIO को 8 हफ्ते का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगर जांच एजेंसियों को इस मामले से जुड़ी शिकायत मिली है, तो वे आरोपों का कानूनी तौर पर सत्यापन करें और जो भी जरूरी कार्रवाई बनती है, उसे तुरंत शुरू करें. कोर्ट ने केवल CBI और ED ही नहीं, बल्कि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस के निदेशक, प्रशिक्षण विभाग और वित्त मंत्रालय को भी 8 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है.
इस पर CBI ने कोर्ट को बताया कि उन्हें शिकायत मिल चुकी है और वे तय समय के भीतर अपना जवाब दाखिल कर देंगे. वहीं, ED ने भी शिकायत मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि वे आरोपों की जांच कर रहे हैं और जल्द ही कोर्ट को वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगे.
दस्तावेज रहेंगे ‘सील बंद’ लिफाफे में सुरक्षित
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपने सीनियर रजिस्ट्रार को एक खास निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता की तरफ से पेश किए गए सभी सबूत, पेपर बुक और अन्य अहम दस्तावेजों को एक सील बंद लिफाफे में पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए. इन दस्तावेजों को अब सीधे अगली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के सामने ही खोला जाएगा.
हालांकि, कोर्ट में राहुल गांधी की तरफ से इस याचिका के कानूनी अधिकार (पोषणीयता) पर सवाल भी उठाए गए, जिस पर कोर्ट ने कहा कि वे सभी पक्षों का जवाब और हलफनामा आने के बाद ही इस बिंदु पर विचार करेंगे. अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी, जिस दिन देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियां कोर्ट के सामने अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करेंगी.


