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पलिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कांप टांडा गांव में आजादी से अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिस कारण बिजली से चलने वाले उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं. ग्रामीणों ने बताया कि जंगल के रास्तों से होकर गांव तक आना होता है अभी तक कोई सड़क का निर्माण भी नहीं हो पाया है. कच्ची सड़कों पर निकलना बरसात के मौसम में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, परंतु जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि इस पर कोईध्यान नहीं दे. गांव तक एंबुलेंस तक भी नहीं आ पाती है.
लखीमपुर खीरीः यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव जहां पर आजादी के बाद भी बिजली की रोशनी नहीं पहुंच सकी. बचपन से बिजली के बल्ब की रोशनी का इंतजार कर रहे ग्रामीणों की जवानी में ढल चुकी है. इसके बावजूद गांव के लोग विद्युतीकरण की राह ताक रहे हैं. बिजली की समस्या को लेकर गांव के लोग अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की गुहार लगाकर थक चुके हैं. लेकिन बिजली के नाम पर उन्हें अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है.
धूप नहीं निकलती है तो गांव में हो जाता है अंधेरा
पलिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कांप टांडा गांव में आजादी से अब तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जिस कारण बिजली से चलने वाले उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं. ग्रामीणों ने बताया कि जंगल के रास्तों से होकर गांव तक आना होता है अभी तक कोई सड़क का निर्माण भी नहीं हो पाया है. कच्ची सड़कों पर निकलना बरसात के मौसम में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, परंतु जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि इस पर कोईध्यान नहीं दे. गांव तक एंबुलेंस तक भी नहीं आ पाती है. जिस कारण मरीजों को भी काफी दिक्कत तो का सामना करना पड़ता है. वही गांव में लोग सोलर लाइट का प्रयोग कर रहे हैं. जब धूप नहीं निकलती है तब अंधेरा रहता है. पढ़ाई करने वाले युवाओं को आज भी कठिनाइयों का सामना करना पर रहा है.
युवाओं को पढ़ाई करने में होती है समस्या
बातचीत करते हुए रीना देवी बताती हैं कि गांव जंगल के चारों ओर है गांव में जंगली जानवर आ जाते हैं. जिस कारण घटनाएं भी हो जाते हैं और गांव में लाइट न होने के कारण हम लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं जिससे बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते हैं और उनका भविष्य खतरे में है. शोभित सिंह बताते हैं कि हम एक युवा हैं और पढ़ाई कर रहे हैं बिजली ना हो पाने के कारण पढ़ाई बाधित हो जाती है. गांव में सोलर पैनल लगा हुआ है. वही 2 घंटे लाइट मिलती है 2 घंटे में हम कितनी देर पढ़ाई कर लेंगे वहीं अगर धूप नहीं निकलती है तो गांव में अंधेरा रहता है ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. यह गांव पूरा जंगलों के बीच में बसा हुआ है हम लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


