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विकास लोहिया को जानते हैं आप, 6 साल में 153 गुना बढ़ा दिया कंपनी का मार्केट कैप, सरकार से मिला है करोड़ों का ठेका

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Jupiter Wagons : हुरुन ने हाल में एक लिस्‍ट जारी की है, जिसमें ऐसे युवा उद्यमियों के नाम हैं जिन्‍होंने विरासत में मिले कारोबार को पंख लगा दिए. इस लिस्‍ट में सबसे तेजी से संपत्ति बढ़ाने वालों में विकास लोहिया का नाम सबसे ऊपर आता है. विकास जुपिटर वैगंस नाम की कंपनी संभालते हैं, जो रेलवे के लिए कोच बनाती है.

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विकास लोहिया ने 6 साल में जुपिटर वैगंस का कारोबार कई गुना बढ़ा दिया है.

नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी के बाद देश में युवा उद्यमियों की कमाई जबरदस्‍त तरीके से बढ़ी है. हुरून इंडिया ने ‘एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया सक्सेसर्स 50’ की लिस्‍ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि कॉरपोरेट जगत के युवा उत्‍तराधिकारियों में विकास लोहिया का नाम सबसे तेजी से संपत्ति बढ़ाने वालों में शामिल है. उनकी अगुवाई में बीते 6 साल में कंपनी का मार्केट कैप 153 गुना बढ़ गया है. आइये समझते हैं कि विकास किस तरह की कंपनी की अगुवाई करते हैं.

हुरुन इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे और मेट्रो के कोच बनाने वाली कंपनी जुपिटर वैगंस के उप प्रबंध निदेशक विकास लोहिया भारतीय कॉरपोरेट जगत के उत्तराधिकारियों के बीच सबसे तेजी से संपत्ति बढ़ाने वाले व्यक्ति के रूप में उभरे हैं. पिछले 6 वर्षों के दौरान जुपिटर वैगंस के बाजार पूंजीकरण में 152.8 गुना वृद्धि हुई है. इसके साथ ही प्रवर्तक परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य लोहिया ने पहली ‘एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया सक्सेसर्स 50’ सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है.

46 साल पहले शुरू हुई थी कंपनी
जुपिटर वैगंस की शुरुआत 28 जुलाई, 1979 में हुई थी और आज भी इसका मुख्‍यालय कोलकाता में है. यह कंपनी खासकर रेलवे की मालगाड़ी के वैगन बनाती है. इसके अलावा मेट्रो और रेल के यात्री कोच और उनके पुर्जे बनाने में भी इसकी बड़ी भूमिका है. भारतीय रेलवे में वैगन और कोच को लेकर पिछले कुछ साल से लगातार बड़ा बदलाव चल रहा है और यही वजह है कि कंपनी को भी सरकार से बड़े ठेके मिल रहे हैं. पिछले 6 साल में हो रही इसकी बढ़ोतरी में बड़ी भूमिका रेलवे कोच में हो रहे बदलाव की भी है.

कितनी है कंपनी की क्षमता
जुपिटर वैगन भारतीय रेलवे के साथ निजी ग्राहकों के लिए भी वैगन और पैसेंजर कोच बनाती है. कंपनी हर महीने करीब 700 से 1,000 वैगन बनाने की क्षमता रखती है. फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 12 हजार करोड़ रुपये के आसपास है. रेलवे के अलावा यह कंपनी कॉमर्शियल वाहनों और कंटेनर निर्माण में भी जुड़ी है. देश में तेजी से बढ़ते माल ढुलाई कंटेनर की जरूरतों को देखकर लग रहा है कि इसकी ग्रोथ आने वाले समय में और तेज होने वाली है.

एमपी की एक कंपनी को भी खरीदा
जुपिटर वैगंस ने मध्‍य प्रदेश की दिवालिया हो चुकी कॉमर्शियल इंजीनियर्स एंड बॉडी बिल्‍डर्स कंपनी को साल 2019 में खरीदा था, जो टिपलर, ट्रेलर और विशेष रक्षा वाहन बनाने का काम करती है. इसके अधिग्रहण के बाद कंपनी की उत्‍पादन क्षमता में तेजी से विकास हुआ. समूह की अनुषंगी कंपनी जुपिटर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने ई-वाहन बनाने के क्षेत्र में कदम रख है और ग्रेटर नोएडा में हुए ऑटो एक्‍सपो में अपने प्रोडक्‍ट भी पेश किए हैं.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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