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आईपीएल 2026 में अंशुल कंबोज और प्रिंस यादव ने 13-13 विकेट लेकर पर्पल कैप रेस में दबदबा बना रखा है.
अंशुल कंबोज और प्रिंस यादव, दोनों ही IPL2026 में यादगार प्रदर्शन कर रहे है.
भारतीय क्रिकेट में हमेशा से एक ‘क्लासिक’ बहस रही है, क्या हमारे पास बुमराह और शमी के बाद कोई ऐसा है जो मैच का रुख पलटने का दम रखता हो? आईपीएल 2026 ने इस सवाल का जवाब दो नए नामों के साथ दिया है. अंशुल कंबोज और प्रिंस यादव. ये दोनों गेंदबाज इस सीजन में केवल रन नहीं रोक रहे, बल्कि विपक्षी बल्लेबाजों के स्टंप्स उखाड़कर चयनकर्ताओं के दरवाजों पर दस्तक दे रहे हैं. आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि ये जोड़ी भारत की तेज गेंदबाजी को कैसे एक अलग लेवल पर ले जा सकती है.
1. अंशुल कंबोज, चेन्नई का ‘नया बुमराह’
चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए खेल रहे अंशुल कंबोज इस समय पर्पल कैप की रेस में सबसे आगे हैं. उनके आंकड़े किसी भी विश्व स्तरीय गेंदबाज को टक्कर देने के लिए काफी हैं. ताजा आंकड़े, 6 मैचों में 13 विकेट। प्रिंस ने 7 मैचों में 13 विकेट लिए हैं, जबकि अंशुल ने केवल 6 मैचों में ही यह कारनामा कर दिखाया है। उनका बेस्ट स्पैल 3/22 रहा है। अंशुल की काबिलियत यह है कि वे एमएस धोनी (मेंटोर) और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में डेथ ओवर्स में खतरनाक यॉर्कर और कटर डाल रहे हैं। जहां 2026 के आईपीएल में 10 रन प्रति ओवर ‘नॉर्मल’ हो गया है, वहां अंशुल का इकोनॉमी रेट काफी नीचे है. अंशुल के पास बुमराह जैसी सटीक यॉर्कर और एक बहुत ही ‘डिसेप्टिव’ धीमी गेंद है. वे पावरप्ले में भी उतने ही प्रभावी हैं जितने डेथ ओवर्स में.
2. प्रिंस यादव, पर्पल कैप के नए ‘बादशाह’
लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के प्रिंस यादव इस समय आईपीएल 2026 के सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे हैं. ताजा आंकड़े, 7 मैचों में 13 विकेट. प्रिंस का गेंदबाजी औसत 16.77 का है, जो यह दिखाता है कि वे हर 16-17 रन के अंदर एक विकेट निकाल रहे हैं. इकोनॉमी. 8.38 की इकोनॉमी के साथ उन्होंने न केवल विकेट लिए हैं, बल्कि रनों की गति पर भी लगाम लगाई है. राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ पिछले मैच में उनके 2 विकेट ने उन्हें लिस्ट में टॉप पर पहुंचा दिया है.
कैसे ये जोड़ी भारत को ‘अजेय’ बना सकती है?
A. वर्कलोड मैनेजमेंट में मदद.
बुमराह और शमी जैसे सीनियर गेंदबाजों पर से दबाव कम करने के लिए भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत थी जो विकेट टेकिंग ऑप्शन हों. अंशुल और प्रिंस दोनों ने साबित किया है कि वे दबाव में नहीं बिखरते.
B. हर परिस्थिति के लिए तैयार.
अंशुल कंबोज जहां चेन्नई की धीमी पिचों पर अपनी ‘कटर’ और वेरिएशन से प्रभावी हैं, वहीं प्रिंस यादव लखनऊ या मुंबई जैसी सपाट पिचों पर अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को डरा सकते हैं. तेज पिचों पर तो वो और खतरनाक हो जाएंगे.
C. ‘विकेट-टेकिंग’ माइंडसेट.
पुराने समय में भारतीय गेंदबाज रन रोकने पर ध्यान देते थे, लेकिन प्रिंस और अंशुल का माइंडसेट ‘अटैकिंग’ है. वे चौका खाने के बाद भी अगली गेंद विकेट के लिए डालते हैं.
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