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यह कहानी भारत के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के एक ‘अधूरे शतक’ और श्रीलंका के ऑफ स्पिनर सूरज रणदीव के करियर के ‘पूर्ण विराम’ की है. मैदान पर की गई एक घटिया हरकत ने कैसे एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया, यह खेल इतिहास का सबसे कड़वा सबक है.
सहवाग को शतक बनाने से रोकने के लिए श्रीलंकाई स्पिनर ने जानबूझकर फेंका था नो-बॉल
नई दिल्ली. क्रिकेट की अनिश्चितताओं के बीच जीत और हार के कई किस्से बनते हैं, लेकिन साल 2010 की एक घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि खेल भावना से की गई गद्दारी कैसे किसी खिलाड़ी का पूरा भविष्य निगल सकती है. 16 साल पहले क्रिकेट के मैदान पर एक ऐसी घटना देखने को मिली जिसको देखकर उनके ही देश के फैंस ने उस खिलाड़ी को जमकर कोसा.
यह कहानी भारत के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के एक ‘अधूरे शतक’ और श्रीलंका के ऑफ स्पिनर सूरज रणदीव के करियर के ‘पूर्ण विराम’ की है. मैदान पर की गई एक घटिया हरकत ने कैसे एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया, यह खेल इतिहास का सबसे कड़वा सबक है.
दांबुला का वो शर्मनाक पल
16 अगस्त 2010 को दांबुला में भारत और श्रीलंका के बीच त्रिकोणीय सीरीज का मैच खेला जा रहा था. भारत जीत की दहलीज़ पर था और उसे मैच जीतने के लिए महज 1 रन की दरकार थी. दूसरी छोर पर वीरेंद्र सहवाग 99 रन बनाकर खेल रहे थे. सहवाग को अपना शतक पूरा करने के लिए एक रन चाहिए था और भारत को जीत के लिए भी एक ही रन की जरूरत थी. गेंद श्रीलंका के उभरते हुए ऑफ स्पिनर सूरज रणदीव के हाथों में थी. रणदीव राउंड द विकेट आए और जैसे ही उन्होंने गेंद फेंकी, सहवाग ने क्रीज से बाहर निकलकर एक गगनचुंबी छक्का जड़ दिया. भारतीय खेमे में जश्न का माहौल था, लेकिन तभी अंपायर का इशारा आया. वह गेंद एक बहुत बड़ी और जानबूझकर फेंकी गई ‘नो-बॉल’ थी. क्रिकेट के नियमों के अनुसार, नो-बॉल होते ही भारत को 1 अतिरिक्त रन मिल गया और मैच वहीं खत्म हो गया. मैच खत्म होने के कारण सहवाग का वह छक्का अमान्य करार दिया गया और वह 99 रन पर ही नाबाद रह गए.
रणदीव की शर्मनाक हरकत
रणदीव की इस ओछी रणनीति ने सहवाग को शतक से तो रोक दिया, लेकिन खुद रणदीव के लिए तबाही का रास्ता खोल दिया. सजा, पतन और करियर का अंतइस घटना के बाद क्रिकेट जगत में रणदीव की थू-थू हुई. आईसीसी और श्रीलंकाई क्रिकेट बोर्ड ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए रणदीव पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया और उनकी मैच फीस काट ली. जांच में यह भी सामने आया कि रणदीव को ऐसा करने के लिए सीनियर खिलाड़ी तिलकरत्ने दिलशान ने उकसाया था.
सहवाग से मांगी माफी
हालांकि रणदीव ने होटल जाकर सहवाग से माफी मांगी, लेकिन कुदरत के कानून ने उन्हें कभी माफ नहीं किया. इस विवाद के बाद रणदीव मानसिक रूप से बिखर गए और उनके प्रदर्शन का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा. जिस खिलाड़ी को श्रीलंका क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था, वह टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए तरस गया. वह अपने पूरे करियर में केवल 17 टेस्ट मैच ही खेल सके साल 2012 से 2016 के बीच उन्हें सिर्फ 4 वनडे मैचों में मौका मिला और 2016 के बाद उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए.
मेलबर्न की सड़कों पर ‘ड्राइविंग’ करता स्पिनर
क्रिकेट से पूरी तरह बाहर होने के बाद रणदीव के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया. अंततः उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा. आज सूरज रणदीव ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में बस चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े-बड़े बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचाने वाला यह स्पिनर अब मेलबर्न में एक फ्रांसीसी परिवहन कंपनी ‘ट्रांसदेव’ के लिए बस और भारी ट्रक चलाकर अपना गुजारा कर रहा है. वह अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे क्लब क्रिकेट भी खेलते हैं. दांबुला की वह नो-बॉल सिर्फ एक अवैध गेंद नहीं थी, बल्कि रणदीव के सुनहरे भविष्य पर लगा वह दाग थी जिसने उन्हें फर्श पर ला दिया.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


