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10 records of virat kohli: भारतीय क्रिकेट इतिहास के पन्नों में कुछ नाम सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि अपने जज्बे, जुनून और अनुशासन से अमर हो जाते हैं. वेस्ट दिल्ली की गलियों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने वाले विराट कोहली का सफर किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है. 2008 में जब वह पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर उतरे थे, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह युवा खिलाड़ी आने वाले 17 वर्षों में क्रिकेट को ही बदल कर रख देगा. विराट की ओर से बनाए गए रिकॉर्ड्स आज भी नई पीढ़ी के लिए एक एवरेस्ट पर चढ़ाई करने की तरह है.
विराट कोहली (Virat Kohli) का नाम वनडे क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है. उन्होंने वनडे फॉर्मेट में 54 शतक जड़कर वह मुकाम हासिल किया, जो कभी किसी के लिए नामुमकिन सा लगता था. एक समय था जब सचिन तेंदुलकर के 49 शतकों का रिकॉर्ड अटूट माना जाता था, लेकिन विराट ने अपनी निरंतरता और रन बनाने की भूख से न केवल उस रिकॉर्ड को तोड़ा, बल्कि उसे 54 तक पहुंचा दिया. यह उपलब्धि केवल रनों की संख्या नहीं है, बल्कि यह दबाव में बल्लेबाजी करने की उनकी अद्भुत मानसिक शक्ति को दर्शाती है.वे जानते हैं कि कब गियर बदलना है और कब अंत तक टिककर मैच फिनिश करना है, और यही कारण है कि वे वनडे क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाज माने जाते हैं.

क्रिकेट में अक्सर देखा गया है कि लंबी उम्र के साथ बल्लेबाजी औसत गिर जाता है, लेकिन विराट कोहली ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया. 14,000 से ज्यादा वनडे रन बनाने के बावजूद उनका बल्लेबाजी औसत 58.71 का है, जो दुनिया के किसी भी दिग्गज बल्लेबाज से बेहतर है. उन्होंने अब तक 311 मैचों में 14,797 रन बनाए हैं. यह आंकड़ा साबित करता है कि विराट के लिए रन बनाना एक आदत बन चुकी है। उनकी फिटनेस और बल्लेबाजी तकनीक का सही मिश्रण ही उन्हें इस फॉर्मेट में एक ऐसा स्तंभ बनाता है, जिसे गिराना विपक्षी गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है.

टेस्ट क्रिकेट को क्रिकेट का असली इम्तिहान माना जाता है, और विराट कोहली ने इस परीक्षा में खुद को बार-बार साबित किया है. उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 7 दोहरे शतक दर्ज हैं, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. यह उपलब्धि दिखाती है कि विराट लंबी पारियां खेलने में कितने माहिर थे. जब वे क्रीज पर जम जाते थे, तो उनके लिए कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता था. उनकी एकाग्रता, धैर्य और गेंदबाजों को थका देने की क्षमता ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट का महानतम बल्लेबाज बनाया. यह रिकॉर्ड उनकी उस भूख को दर्शाता है, जिसमें वे हमेशा मैदान पर अधिक से अधिक समय बिताना चाहते थे.
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IPL 2016 का सीजन विराट कोहली के करियर का वह दौर था, जिसे क्रिकेट प्रेमी कभी नहीं भूल सकते. उस साल विराट का बल्ला नहीं, बल्कि मानो ज्वालामुखी फूट रहा था. उन्होंने उस पूरे सीजन में 973 रन बनाकर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसे तोड़ना आज भी किसी भी बल्लेबाज के लिए सबसे कठिन काम है. उन्होंने बल्लेबाजी के हर कौशल का प्रदर्शन किया, चाहे वह क्लासिक ड्राइव्स हों या फिर आक्रामक शॉट्स.उस सीजन में उनकी निरंतरता का स्तर इतना ऊंचा था कि विपक्षी टीमें भी केवल उनके आउट होने की प्रार्थना कर सकती थीं. यह रिकॉर्ड उनके टी20 प्रारूप पर दबदबे का सबसे बड़ा प्रमाण है.

एक बल्लेबाज की असली परख उसकी तकनीकी श्रेष्ठता और निरंतरता से होती है, जिसे आईसीसी की टेस्ट रेटिंग मापती है. विराट कोहली ने 937 रेटिंग अंकों के साथ वह मुकाम हासिल किया, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा हासिल किया गया अब तक का सर्वोच्च अंक है. यह रेटिंग दर्शाती है कि एक समय ऐसा था जब विराट को दुनिया का कोई भी गेंदबाज किसी भी परिस्थिति में आउट नहीं कर पा रहा था. चाहे वह इंग्लैंड की सीमिंग पिचें हों, ऑस्ट्रेलिया की तेज उछाल वाली पिचें या भारत की स्पिन ट्रैक, विराट ने हर जगह अपनी तकनीक का लोहा मनवाया और दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज बने.

2014 की ऑस्ट्रेलिया सीरीज विराट कोहली के करियर का वह मोड़ थी, जिसने उन्हें एक साधारण बल्लेबाज से विश्व-स्तरीय खिलाड़ी बना दिया. उस सीरीज में उन्होंने चार शतक जड़े, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज का विदेशी टेस्ट सीरीज में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है. शुभमन गिल जैसे युवा खिलाड़ियों ने बाद में इस प्रदर्शन की बराबरी करने की कोशिश की है, लेकिन उस समय विराट का जो आक्रामक अंदाज और विपक्षी टीम के प्रति जो निडर रवैया था, उसने भारतीय टीम को एक नई पहचान दी. उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय बल्लेबाज अब विदेशी धरती पर केवल रक्षात्मक नहीं खेलेंगे, बल्कि मुकाबला करेंगे.

विराट कोहली केवल एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि एक बेहतरीन कप्तान भी रहे. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने लगातार 9 टेस्ट सीरीज जीतकर रिकी पोंटिंग के महान रिकॉर्ड की बराबरी की. यह उपलब्धि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक ‘स्वर्ण युग’ की तरह है. उनके नेतृत्व में टीम ने एक ऐसा अनुशासन और आक्रामकता अपनाई कि घरेलू मैदान पर भारत को हराना लगभग नामुमकिन हो गया. विराट ने टीम में जीत की भूख पैदा की और खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाना सीखा, जो उनके नेतृत्व कौशल का सबसे बड़ा उदाहरण है.

विराट कोहली की रनों के प्रति भूख कितनी तीव्र है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मात्र 205 पारियों में ही 10,000 वनडे रन पूरे कर लिए थे. विश्व क्रिकेट में उनसे तेज यह उपलब्धि किसी और ने नहीं पाई है. यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि विराट ने करियर की शुरुआत से ही किस गति से रन बनाए हैं. वे कभी भी स्थिर नहीं रहे और हर मैच के साथ अपनी औसत और गति को बढ़ाते रहे. यह उनकी मानसिक परिपक्वता का प्रमाण है कि इतनी कम पारियों में इतना विशाल स्कोर खड़ा करना केवल एक महान खिलाड़ी ही कर सकता है.

विराट कोहली के नाम एक और बड़ा रिकॉर्ड है विदेशों में सबसे सफल भारतीय कप्तान होने का. उनके नेतृत्व में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और वेस्टइंडीज जैसी टीमों को उनके ही घर में मात दी. विराट ने ‘विदेशी धरती पर भारतीय टीम कमजोर होती है’ वाली मानसिकता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया. उन्होंने अपनी टीम को सिखाया कि कैसे आंख में आंख डालकर मुकाबला करना है.उनके दौर में भारत ने विदेशी सरजमीं पर जीत का एक ऐसा सिलसिला शुरू किया, जिसने भारतीय क्रिकेट को वैश्विक मंच पर एक नई ऊँचाई और सम्मान दिलाया.

आज विराट कोहली वनडे क्रिकेट में सक्रिय हैं और उनके प्रशंसक हर मैच में उनके बल्ले से एक नई दास्तान सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं. उनका सफर हमें सिखाता है कि अगर जुनून सच्चा हो और अनुशासन अडिग, तो दुनिया का कोई भी रिकॉर्ड तोड़ा जा सकता है. विराट कोहली सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक युग हैं, जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे.


