नई दिल्ली. :क्रिकेट को अक्सर ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, जहाँ नियम और मर्यादा सर्वोपरि होते हैं लेकिन 1999 के विश्व कप के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने खेल की नियमावली को फिर से लिखने पर मजबूर कर दिया. कल्पना कीजिए कि मैदान पर खेल रहा कप्तान सीधे ड्रेसिंग रूम में बैठे अपने कोच से लाइव निर्देश ले रहा हो! यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लग सकता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए ने इसे हकीकत बना दिया था. क्रिकेट के मैदान पर ये क्राइम सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली जैसे बड़े खिलाड़ियो के सामने हुआ.
भारत के खिलाफ मैच में ईयरपीस पहनकर उतरने के उनके फैसले ने न केवल क्रिकेट पंडितों को चौंकाया, बल्कि तकनीक और नैतिकता के बीच एक नई बहस छेड़ दी. भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका15 मई 1999 को ब्राइटन के होव मैदान पर दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच मुकाबला था.
जैसे ही मैच शुरू हुआ, भारतीय टीम के फील्डरों और अंपायरों ने गौर किया कि दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए और तेज गेंदबाज एलन डोनाल्ड के कानों में कुछ अजीब सी चीज लगी है. यह एक छोटा सा वायरलेस ईयरपीस था. जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, भारतीय बल्लेबाज सौरव गांगुली ने सबसे पहले अंपायरों का ध्यान इस ओर खींचा. जल्द ही अंपायर स्टीव बकनर और डेविड शेफर्ड ने क्रोनिए से पूछताछ की क्रोनिए ने बड़ी सहजता से स्वीकार किया कि वे ड्रेसिंग रूम में बैठे कोच बॉब वूल्मर के साथ सीधे संपर्क में हैं.
बॉब वूल्मर का ‘मास्टरमाइंड’ और तकनीक का इस्तेमाल
बॉब वूल्मर को क्रिकेट की दुनिया में एक ‘इनोवेटर’ के रूप में जाना जाता था. वे हमेशा खेल को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों के पक्षधर रहे. उनका तर्क सरल था यदि अन्य खेलों (जैसे अमेरिकी फुटबॉल) में कोच और खिलाड़ी के बीच लाइव कम्युनिकेशन हो सकता है, तो क्रिकेट में क्यों नहीं? वूल्मर चाहते थे कि वे बाउंड्री लाइन के बाहर से खेल की स्थिति को देखकर फील्डिंग में बदलाव और गेंदबाजों को रणनीतिक सलाह दे सकें. उन्होंने सोचा कि इससे कप्तान का बोझ कम होगा और फैसले लेने में सटीकता आएगी.
अंपायरों का फैसला और विवाद
हैरानी की बात यह थी कि उस समय ICC के नियमों में स्पष्ट रूप से ऐसा कुछ नहीं लिखा था कि खिलाड़ी ईयरपीस का उपयोग नहीं कर सकते. हालांकि, मैच रेफरी तलत अली ने अंपायरों के साथ चर्चा के बाद इसे खेल की गरिमा और ‘फेयर प्ले’ के खिलाफ माना. ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान, आईसीसी के अधिकारियों ने क्रोनिए और डोनाल्ड को ईयरपीस उतारने का निर्देश दिया. खेल फिर से सामान्य रूप से शुरू हुआ, लेकिन इस घटना ने पूरे विश्व कप में हलचल मचा दी. सौरव गांगुली ने बाद में मजाक में कहा था, “हमें लगा कि शायद वे कमेंट्री सुन रहे हैं! सबक और प्रभावइस घटना के तुरंत बाद, ICC ने अपनी नियमावली में संशोधन किया और मैदान पर बाहरी संचार उपकरणों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया.
टेक्नीक का भरपूर इस्तेमाल
वूल्मर का यह ‘प्रयोग’ भले ही अल्पकालिक रहा, लेकिन इसने दिखाया कि क्रिकेट किस तरह तकनीक को अपनाने की ओर बढ़ रहा था. आज के समय में ड्रेसिंग रूम में लैपटॉप और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग सामान्य है, लेकिन लाइव ‘ईयरपीस’ आज भी प्रतिबंधित है. हैंसी क्रोनिए की यह घटना हमें याद दिलाती है कि क्रिकेट में जीत की भूख कभी-कभी नियमों की सीमाओं को भी चुनौती दे सकती है.
हैंसी क्रोनिए और बॉब वूल्मर की यह जोड़ी क्रिकेट इतिहास की सबसे प्रभावी जोड़ियों में से एक थी. ईयरपीस की घटना ने वूल्मर की दूरदर्शिता और क्रोनिए के निडर स्वभाव को उजागर किया हालांकि इसे एक ‘चीटिंग’ के रूप में नहीं, बल्कि एक फेल्ड इनोवेशन के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसने आधुनिक क्रिकेट में तकनीक की भूमिका पर एक गंभीर विमर्श शुरू किया,


