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हां मैं लेस्बियन हूं…दुनिया की वो क्रिकेटर, जिसने सरेआम किया था कबूल, मैदान पर धोनी का रिकॉर्ड तोड़ा

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हां मैं लेस्बियन हूं…दुनिया की वो क्रिकेटर, जिसने सरेआम किया था कबूल

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Sarah Taylor lesbian identity revelation: सारा टेलर ने न केवल मैदान पर धोनी का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रचा, बल्कि अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी उतनी ही बेबाक रहीं. साल 2023 में सारा ने लेस्बियन के रूप में अपनी पहचान को सार्वजनिक किया और अपनी पार्टनर की प्रेग्नेंसी पर ट्रोल करने वालों को करारा जवाब दिया था. मेंटल हेल्थ से जंग और निडर फैसलों के बीच सारा की कहानी खेल और साहस का एक अनोखा संगम पेश करती है.

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सारा टेलर ने 2023 में कबूल किया था कि वह लेस्बियन हैं.

नई दिल्ली.  क्रिकेट की दुनिया में जब भी सबसे बेहतरीन विकेटकीपरों का जिक्र होता है, तो एक नाम पूरी शिद्दत के साथ लिया जाता है. वह नाम है सारा टेलर का. इंग्लैंड की इस दिग्गज खिलाड़ी ने न केवल अपनी जादुई विकेटकीपिंग से स्टंप्स के पीछे तहलका मचाया, बल्कि मैदान के बाहर अपनी निजी जिंदगी के फैसलों और संघर्षों को लेकर भी उतनी ही निडर रहीं. सारा की कहानी सिर्फ रनों और स्टंपिंग के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह कहानी है रूढ़ियों को तोड़ने, मेंटल हेल्थ से लड़ने और अपने प्यार को दुनिया के सामने गर्व से स्वीकार करने की. तीन साल पहले सारा ने दुनिया के सामने स्वीकार किया था कि वह लेस्बियन हैं.

साल 2023 में सारा टेलर ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर एक बड़ा खुलासा किया था, जिसने उनकी सोच को एक नई पहचान दी. सारा ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि वह लेस्बियन हैं और लंबे समय से एक महिला पार्टनर के साथ रिश्ते में हैं. जब उन्होंने अपनी पार्टनर की प्रेग्नेंसी की खबर सोशल मीडिया पर साझा की, तो उन्हें ट्रोलर्स का सामना करना पड़ा. सारा ने इन ट्रोलर्स को करारा जवाब देते हुए लिखा कि उनकी पसंद कोई ‘चॉइस’ नहीं है, बल्कि यह उनकी सच्चाई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्यार में हैं और बेहद खुश हैं.जब लोगों ने प्रेग्नेंसी पर सवाल उठाए, तो सारा ने आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया के बारे में खुलकर बताया और कहा कि एक अज्ञात डोनर की मदद से उन्होंने इस खुशहाली की ओर कदम बढ़ाया है. उनका यह संदेश कि ‘प्यार प्यार है’ (Love is Love), समाज की संकुचित सोच पर एक कड़ा प्रहार था.

सारा टेलर ने 2023 में कबूल किया था कि वह लेस्बियन हैं.

सारा ने स्टंपिंग के मामले में धोनी को पीछे छोड़ा
सारा टेलर (Sarah Taylor) की फुर्ती का आलम यह था कि बल्लेबाज के पैर क्रीज से जरा भी हिले नहीं कि गिल्लियां बिखर जाती थीं. आंकड़ों की बात करें तो उन्होंने स्टंपिंग के मामले में भारतीय दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी को भी पीछे छोड़ दिया था. जहां धोनी ने 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 37 स्टंपिंग की थीं, वहीं सारा ने महज 90 मैचों में 51 बार बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. दिलचस्प बात यह है कि सारा ने धोनी का यह खास रिकॉर्ड महज 29 साल की उम्र में ही अपने नाम कर लिया था.

विवाद, फोटोशूट और बेबाक अंदाज
सारा टेलर हमेशा से लीक से हटकर चलने वाली खिलाड़ी रही हैं. साल 2019 में वह तब दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गईं जब उन्होंने एक बिना कपड़ों का (Nude) फोटोशूट करवाया. इस फोटोशूट के पीछे का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य और बॉडी पॉजिटिविटी को बढ़ावा देना था. उनकी उन तस्वीरों ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था, जिसमें वह केवल विकेटकीपिंग ग्लव्स पहने हुए या हाथ में बैट थामे नजर आई थीं. हालांकि इस पर काफी बहस हुई, लेकिन सारा ने हमेशा अपने फैसलों का मजबूती से बचाव किया.

सारा टेलर ने इंग्लैंड के लिए कुल 226 मैच खेले
लंदन में जन्मी सारा टेलर ने इंग्लैंड के लिए कुल 226 मैच खेले. इस दौरान उन्होंने 232 शिकार (कैच और स्टंपिंग मिलाकर) किए, जो उनकी अद्भुत विकेटकीपिंग क्षमता का प्रमाण है. बल्लेबाजी में भी उनका कोई सानी नहीं था. 126 वनडे मैचों में उन्होंने 38.26 की औसत से 4,056 रन बनाए, जिसमें सात शानदार शतक और 20 अर्धशतक शामिल थे. वहीं, टी20 इंटरनेशनल मैचों में उन्होंने 90 मैचों में 2,177 रन जोड़कर अपनी उपयोगिता साबित की. सारा उस ऐतिहासिक टीम का हिस्सा रहीं जिसने तीन बार (2009 और 2017 वनडे विश्व कप, और 2009 टी20 विश्व कप) विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया.

मेंटल हेल्थ से जंग और वापसी
सारा का करियर जितना चमकदार था, उनका संघर्ष उतना ही गहरा था. 2016 मे महज 26 साल की उम्र में उन्होंने ‘एंग्जायटी’ (घबराहट) के कारण क्रिकेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक लेकर सबको चौंका दिया था. उस दौर में मानसिक स्वास्थ्य पर इतनी बात नहीं होती थी, लेकिन सारा ने अपनी कमजोरी को दुनिया के सामने स्वीकार किया. उनकी इच्छाशक्ति ही थी कि एक साल बाद उन्होंने न केवल मैदान पर वापसी की, बल्कि 2017 के घरेलू विश्व कप में इंग्लैंड को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और आखिरकार 2019 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया.

About the Author

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें



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