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Prince Yadav Purple cap race: युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स के अपनी सनसनीखेज गेंदबाजी से पर्पल कैप पर कब्जा कर लिया है. महज 30 लाख रुपये में खरीदे गए इस खिलाड़ी ने 7 मैचों में 13 विकेट चटकाकर दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है. खेतों में टेनिस बॉल से क्रिकेट की शुरुआत करने वाले प्रिंस की यह कहानी संघर्ष, प्रतिबंध के झटके और फिर शानदार वापसी की है, जो अब उन्हें भारतीय क्रिकेट का नया उभरता सितारा बना रही है.
प्रिंस यादव पर्पल कैप की रेस में पहले नंबर पर पहुंच गए हैं.
नई दिल्ली. आईपीएल के 32वें मुकाबले के बाद क्रिकेट के गलियारों में एक ही नाम की गूंज है प्रिंस यादव. लखनऊ सुपर जायंट्स का यह 24 वर्षीय युवा तेज गेंदबाज इस समय न केवल अपनी टीम का ‘प्रिंस’ बना हुआ है, बल्कि सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेकर ‘पर्पल कैप’ की रेस में भी सबको पीछे छोड़ चुका है. राजस्थान के खिलाफ हालिया मैच में 4 ओवर में सिर्फ 29 रन देकर 2 विकेट चटकाने वाले प्रिंस ने यह साबित कर दिया है कि रफ्तार और सटीक यॉर्कर का मेल कितना घातक हो सकता है. अब तक खेले गए 7 मुकाबलों में प्रिंस ने अपनी आग उगलती गेंदों से 13 शिकार किए हैं. उनकी सफलता की सबसे बड़ी खासियत उनकी इकॉनमी है. भले ही चेन्नई के अंशुल कंबोज भी 13 विकेट के साथ उनके बराबर खड़े हैं, लेकिन 8.38 की शानदार इकॉनमी रेट ने प्रिंस को लिस्ट में पहले पायदान पर पहुंचा दिया है. हैदराबाद के ईशान मलिंगा और गुजरात के प्रसिद्ध कृष्णा 12-12 विकेटों के साथ इस रेस को और रोमांचक बना रहे हैं, लेकिन फिलहाल ताज प्रिंस के सिर पर सज रहा है.
प्रिंस यादव (Prince Yadav) की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. दिल्ली के पास नजफगढ़ के करीब स्थित दरियापुर खुर्द गांव से आने वाले प्रिंस ने 17 साल की उम्र तक कभी लेदर बॉल (चमड़े की गेंद) को छुआ तक नहीं था. वह गांव के खेतों में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करते थे. धीरे-धीरे उनकी गेंदबाजी की चर्चा दिल्ली के बाहर तक होने लगी और वह टेनिस-बॉल टूर्नामेंट्स के प्रोफेशनल खिलाड़ी बन गए. सूरत से लेकर कोलकाता तक वह अपनी यॉर्कर के दम पर मशहूर होने लगे थे. हालांकि, उनके पिता रामनिवास, जो रेलवे से सेवानिवृत्त होकर अब खेती करते हैं. पिता चाहते थे कि प्रिंस पढ़ाई-लिखाई कर अपनी बहन की तरह एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पा लें. प्रिंस का मन पढ़ाई में कभी नहीं लगा. वह अक्सर स्कूल बंक कर क्रिकेट खेलने निकल जाया करते थे.
प्रिंस यादव पर्पल कैप की रेस में पहले नंबर पर पहुंच गए हैं.
वो टर्निंग पॉइंट जिसने बदली किस्मत
प्रिंस की किस्मत तब बदली जब दिल्ली के क्रिकेटर ललित यादव ने उनकी प्रतिभा को पहचाना. गांव में एक स्थानीय टूर्नामेंट के दौरान ललित और विजन पांचाल जैसे खिलाड़ियों ने प्रिंस को गेंदबाजी करते देखा और उन्हें नजफगढ़ की एक क्रिकेट एकेडमी (स्पोर्टिंग क्रिकेट क्लब) ज्वाइन करने की सलाह दी. यहीं से प्रिंस का सफर टेनिस बॉल से लेदर बॉल की ओर मुड़ा. टेनिस बॉल क्रिकेट में प्रिंस की सबसे बड़ी ताकत ‘यॉर्कर’ थी. वह बताते हैं कि टेनिस बॉल से तेज गति निकालने के लिए जमीन पर जोर से गेंद पटकनी पड़ती थी, जिससे उनकी ‘आर्म स्पीड’ बहुत तेज हो गई. यही गति आज आईपीएल में उनकी ताकत बनी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि आईपीएल में उनके शुरुआती तीनों विकेट यॉर्कर पर ही मिले, जिसमें ट्रेविस हेड जैसे दिग्गज का विकेट भी शामिल था.
प्रतिबंध का झटका और शानदार वापसी
सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए प्रिंस को एक बड़ा झटका भी लगा. साल 2020 में बीसीसीआई ने उन पर उम्र की धोखाधड़ी के चलते दो साल का प्रतिबंध लगा दिया. उस मुश्किल दौर में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वापस टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने लगे. प्रतिबंध खत्म होने के बाद उन्होंने दिल्ली की सीनियर टीम में जगह बनाई और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी व विजय हजारे ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने. लखनऊ सुपर जायंट्स ने प्रिंस यादव को 2025 के मेगा ऑक्शन में महज 30 लाख रुपये के बेस प्राइस पर खरीदा था. पिछला सीजन उनके लिए कुछ खास नहीं रहा था. 6 मैचों में वह केवल 3 विकेट ही ले पाए थे. लेकिन टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा बनाए रखा. इस सीजन में जहीर खान के मार्गदर्शन और कप्तान ऋषभ पंत के भरोसे ने प्रिंस को एक अलग ही स्तर का गेंदबाज बना दिया है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


