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अक्सर बढती उम्र के साथ-साथ और उम्र ढलते ही लोगों को चीजें विसरने लगती है लेकिन मनीषी जी ने ना तो शिक्षा का क्षेत्र छोड़ ना समाज सेवा. इसके साथ ही धर्म क्षेत्र में भी उन्होंने नाम कमाया. अमेठी जिले के साथ-साथ पूरे भारत में बड़े-बड़े विद्वानों ने भी उनकी सराहना की. वजह कि उनकी गीता पर अद्भुत पकड़ है. जिले में यह पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने गीता पर अपार ज्ञान प्राप्त किया है, किस अध्याय में कौन सा श्लोक हैं उन्हें सब कुछ याद है.
अमेठी: जिले में एक शख्स ऐसे हैं, जिनकी कहानी प्रेरणादायक है. जिन्होंने अपने आप को 94 साल बाद भी युवा कहनें में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है और अपने आप को हर मंच पर वे 94 साल का बुजुर्ग नहीं युवा बताते हैं. शिक्षा जगत में उनका अनोखा नाम है लोग उन्हें उनके नाम से नहीं बल्कि एक पदवी के नाम से जानते हैं और आज भी समाज के लिए वें एक आदर्श रूप से जाने जाते हैं.
अमेठी के 94 सल के जगदंबा त्रिपाठी मनीषी की जो अमेठी जिले के सरला मनीष इंदिरा गांधी पीजी कॉलेज मनीषी महिला माहाविद्यालय इंटर कॉलेज साहित आधा दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक और मालिक हैं कभी संघर्षों से उन्होंने संस्थान को स्थापित किया और आज उनका नाम इसी क्रम में शिक्षाविद और मनीषी के रूप में जाना जाता है.
गीता पर है मजबूत पकड़
अक्सर बढती उम्र के साथ-साथ और उम्र ढलते ही लोगों को चीजें विसरने लगती है लेकिन मनीषी जी ने ना तो शिक्षा का क्षेत्र छोड़ ना समाज सेवा इसके साथ ही धर्म क्षेत्र में भी उन्होंने नाम कमाया. अमेठी जिले के साथ-साथ पूरे भारत में बड़े-बड़े विद्वानों ने भी उनकी सराहना की वजह कि उनकी गीता पर अद्भुत पकड़ है जिले में यह पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने गीता पर अपार ज्ञान प्राप्त किया है, किस अध्याय में कौन सा श्लोक हैं उन्हें सब कुछ याद है.
लोकल 18 से बातचीत मे उन्होंने कहा कि कहानी उनकी ऐसी है कि वह बचपन में बीमार हो गए. डॉक्टर ने उन्हें दो महीने घर पर रेस्ट करने की सलाह दी, लेकिन उनके मन में आया कि वह आराम के साथ-साथ कुछ ऐसा भी करेंगे जो उनका मन शांत रख सके और उन्हें किसी प्रकार की कोई ऊब ना लगे. इसके बाद उन्होंने छोटी सी गीता की किताब ली और उसे घर पर अध्ययन करना शुरू किया. उन्होंने बताया कि करीब 2 महीने में उन्होंने पूरी भागवत गीता का एक-एक पन्ना याद कर लिया.
खुद को बताते हैं 94 साल का युवा
स्कूल की कहानी बताते हुए उन्होंने कहा कि पिताजी का बचपन से शौक था और वह भी एक आदर्श प्रधानाध्यापक बनना चाहते थे. इसके बाद उन्होंने पिताजी के देहांत के बाद 1995 में पहला स्कूल छप्पर का खोला. फिर धीरे-धीरे लोगों का सहयोग मिलता गया और आज उनके 9 से अधिक स्कूल और शिक्षण संस्थान है. जहां बच्चे इंजीनियर डॉक्टर के साथ विभिन्न सरकारी नौकरी में अपना योगदान दे रहे हैं. उनसे जब सवाल पूछा गया की वे 94 साल का अपने को युवा बताते हैं बुजुर्ग नहीं तो उन्होंने कहा की जी हां पांच बातें जिसमें पवित्रता, एकता, आदर्श सहित पांच बातें ऐसी हैं जो बुजुर्ग से बुजुर्ग व्यक्ति को युवा बनाती हैं, हमारे अंदर वह हैं तो इसलिए हम अपने आप को 94 साल का युवा कहते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


