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छतरपुर जिले राजनगर ब्लॉक के ओटापुरवा गांव के काशीराम परिवार पालने के लिए दिल्ली और जम्मू में काम करते थे. एक दिन काशीराम को बकरी पालन योजना के बारे में पता चला. उसके बाद उन्होंने बकरी पालन शुरू कर दिया. अब बकरी पालन से अच्छी कमाई कर रहें है
मध्यप्रदेश सरकार पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाई जा रही बकरी पालन योजना हितग्राहियों के लिए किसी वरदान से कम नही है. छतरपुर जिले राजनगर ब्लॉक के ओटापुरवा गांव के काशीराम जिनके पास न तो खेती के लिए जमीन थी और न ही गांव में कोई रोजगार था. मजबूरन परिवार पालने के लिए पत्नी-बच्चों समेत दिल्ली और जम्मू पलायन कर जाते थे. जब इन्हें बकरी पालन योजना के बारे में पता चला तो इन्होंने बकरी पालन करने का सोचा और आज काशीराम शहर छोड़ गांव में ही रहकर बकरी पालन कर रहे हैं. जिससे उन्हें अपने गांव में रोजगार मिल गया है.
योजना में मिली इतनी बकरियां
काशीराम बताते हैं कि शुरुआत में योजना के तहत 11 बकरियों के बच्चे दिए गए थे. जिसमें 1 बकरा भी शामिल था. इसके बाद 7 बकरियां और दी गईं. हमारे पास कुल 18 नग हैं. हालांकि, 2 बकरियां हमनें रिश्तेदारों को दे दी हैं.
योजना में मिली इतनी छूट
बता दें, इनकों 2023-24 में बकरी पालन इकाई 10 प्लस 1 योजना के तहत लाभ मिला था, जिसमें लागत 77 हजार 456 रूपए आई और 30 हजार 982 रूपए का अनुदान प्राप्त हुआ था. इस योजना के लाभ से काशीराम का जीवन बदल गया है.काशीराम बताते हैं कि आवेदन करने के 6 महीने बाद जब मेरा लिस्ट में नाम आया तो मुझसे बोला गया कि आप अपने अकाउंट में 8 हजार रुपए रखिए. इसके बाद हमें बकरी खरीदकर दे दी गई. एचडीएफसी बैंक ने मेरा लोन अप्रूवल किया था. जिसमें मुझे 1100 रुपए की किश्त लगती है. ये किश्त देना मेरे लिए बड़ी बात नहीं है. बकरी पालन के लिए टीन शेड भी बनाया गया है.
पलायन की बजाय घर में मिला रोजगार
काशीराम बताते हैं कि उन्हें पहले परिवार खर्च के लिए दिल्ली और जम्मू में जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी. लेकिन बकरी पालन योजना से अब घर बैठें ही रोजगार मिल गया है. बकरियों से दूध भी बेच लेते हैं. हर दिन 4 लीटर तो दूध ही बेच लेते हैं. हालांकि, बच्चों को भी दूध पिलाते हैं. साथ ही खाद भी बेच लेते हैं.
मजदूरी छोड़ शुरू किया व्यवसाय
काशीराम बताते हैं कि सालभर में बकरियों के बच्चे तैयार हो जाते हैं. 1 बकरी या बकरा 8 से 10 हज़ार रुपए का बिक जाता है. इसके साथ ही हर दिन 3 से 4 किलो दूध भी 50 से 60 रुपए किलो बेच लेते हैं. सालभर में सब मिलाकर लगभग 2 लाख रुपए की कमाई आसान से कर सकते हैं.


