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सुल्तानपुर में कैसे हुआ ‘वचगोती’ वंश का जन्म? वरियार शाह से जुड़ी है रोचक कहानी, जानिए वो रहस्यमयी इतिहास

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Sultanpur News: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की धरती सिर्फ राजनीति का अखाड़ा नहीं, बल्कि शौर्य और बुद्धिमानी के अनूठे इतिहास की गवाह भी रही है. यहां एक ऐसा क्षत्रिय वंश निवास करता है, जिसकी उत्पत्ति के पीछे एक गहरा और रोमांचक रहस्य छिपा है ‘वचगोती वंश’. आखिर क्या वजह थी कि दिल्ली के सुल्तान के खौफ और एक युद्ध को टालने के लिए वीर चौहानों ने अपनी पहचान बदलकर खुद को ‘वचगोती’ कहना शुरू कर दिया? 50 हजार से ज्यादा की आबादी वाले इस गौरवशाली वंश के जन्म की कहानी आज भी इतिहास के पन्नों में कौतूहल पैदा करती है.

Sultanpur News: वचगोती वंश का इजाद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से ही माना जाता है लेकिन इस वंश का जन्म कैसे हुआ इसके पीछे भी एक रहस्य छिपा हुआ है. इस रहस्य को तो हम जानेंगे ही लेकिन इसके पहले हम यह जानेंगे कि आखिर इसकी आबादी सुल्तानपुर जिले में लगभग कितनी है. आपको बता दें कि 50,000 से भी अधिक वचगोती वंश के राजपूतों की जनसंख्या वर्तमान सुल्तानपुर में मौजूद है. सिर्फ सुल्तानपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिले अयोध्या, प्रतापगढ़, अमेठी, जौनपुर और अंबेडकरनगर में भी वचगोती वंश के लोग मौजूद हैं, ऐसे में आइए जानते हैं क्या है इस वंश का इतिहास और किस तरह से इस वंश का जन्म हुआ.

राजा रामदेव और वरियार शाह का टकराव
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि एक समय बेलखर के राजा रामदेव प्रजा के बहुत ही प्रेमी हुआ करते थे. उन्होंने बहुत से लोगों को भूमि दान दी थी, जब वरियार शाह ने उनसे ज्यादातर उनकी भूमि का हिस्सा छीन लिया तो उन्हीं लोगों ने दिल्ली सुल्तान से वरियार शाह की शिकायत कर दी. शिकायत में कहा कि वह एक दिन रामदेव की तरह आप पर भी आक्रमण करके दिल्ली का विनाश कर देगा. इस पर दिल्ली के सुल्तान ने आवेश में आकर अपने सूबेदार को आदेश दे दिया कि वह बेलखर राज्य पर कब्जा करने वालों पर आक्रमण करें और उनका कत्ल कर दे.

वरियार शाह की रणनीतिक चाल और गोत्र का परिवर्तन
इतिहासकार राजेश्वर सिंह अपनी किताब में लिखते हैं कि जब इसकी सूचना गुप्त सूत्रों से वरियार शाह और उनके पुत्र राज शाह को बेलखर क्षेत्र में प्राप्त हुई तो उन्होंने अपने मंत्री से मीटिंग की और यह तय किया कि यवनों (विदेशी हमलावरों) को हिंदुओं के गोत्र, कुल, जाति और भाषा की अभी जानकारी नहीं है. इसलिए यहां चौहान वंशीय क्षत्रिय अपने को ‘चौहान’ ना कहके ‘वत्स गोत्रीय’ कहने लगे और जिसका तद्भव रूप कालांतर में ‘वचगोती’ हो गया.

जब दिल्ली के सैनिकों को खानी पड़ी मात
दिल्ली सुल्तान के सूबेदार अपने सैनिकों के साथ जब बेलखर राज आए तो उन्हें चतुराई से यह सूचना दे दी गई कि चौहान तो आगे बढ़ गए हैं, यहां कोई चौहान नहीं है. यहां पर सभी वचगोती रहते हैं. चूंकि सुल्तान की सेना सिर्फ चौहानों की तलाश में आई थी, इसलिए सूबेदार की सेना बेलखर से वापस चली गई. तभी से यहां के अग्नि वंशी चौहान ‘वचगोती’ कहे जाने लगे. सुल्तानपुर में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां पर हजारों की संख्या में वचगोती ठाकुर बसे हुए हैं और अपनी गौरवशाली परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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