फरीदाबाद: खेत में रात का समय… चारों तरफ अंधेरा… किसान फसल की सिंचाई कर रहा होता है. तभी अचानक पैर के पास कुछ हलचल होती है और पता चलता है कि सांप ने काट लिया. ऐसे समय में अक्सर लोग घबरा जाते हैं. कोई रस्सी बांध देता है कोई जहर चूसने लगता है तो कोई झाड़-फूंक करवाने के लिए दौड़ पड़ता है. लेकिन यही घबराहट कई बार मरीज की हालत और बिगाड़ देती है. फरीदाबाद जैसे इलाकों में जहां गांवों और खेतों के आसपास कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं वहां सही जानकारी होना बेहद जरूरी है.
लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉक्टर सुमित आपातकालीन एवं ट्रॉमा प्रबंधन विभाग के प्रभारी बताते हैं सांप काटने के बाद सबसे जरूरी चीज घबराना नहीं बल्कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना है. हर बार सांप काटने पर जहर शरीर में जाए ऐसा जरूरी नहीं होता. कई बार ड्राई बाइट होती है यानी सांप काटता है लेकिन जहर नहीं छोड़ता. वहीं कई बार सांप जहर भी इंजेक्ट कर देता है. ऐसी स्थिति में मरीज खुद यह तय नहीं कर सकता कि जहर गया है या नहीं इसलिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है.
सांप के काटने पर क्या न करें
डॉक्टर सुमित बताते हैं गांवों में लोग अक्सर कई गलतियां कर बैठते हैं. कोई काटी हुई जगह पर कपड़ा या रस्सी कसकर बांध देता है तो कोई मुंह से खून चूसकर जहर निकालने की कोशिश करता है. कुछ लोग ब्लेड से काटकर खून निकालने लगते हैं. यह सब बिल्कुल गलत है और जानलेवा भी हो सकता है.
डॉक्टर सुमित बताते हैं जहां सांप ने काटा है वहां मुंह से खून चूसने या ब्लेड से काटने से कोई फायदा नहीं होता. यह सिर्फ फिल्मों और पुराने मिथकों में दिखाया जाता है. कई बार लोग सोचते हैं कि रस्सी या कपड़ा कसकर बांध देंगे तो जहर ऊपर नहीं चढ़ेगा जबकि हकीकत इसके उलट है. ज्यादा टाइट बांधने से खून का संचार रुक जाता है और अस्पताल में खोलने के बाद शरीर को और नुकसान पहुंच सकता है.
झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता
डॉक्टर सुमित बताते हैं झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता. गांवों में आज भी कई लोग मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने ले जाते हैं जिससे इलाज में देरी हो जाती है. जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा उतनी जल्दी एंटी-वेनम देकर उसकी जान बचाई जा सकती है.
कोबरा और करैत जैसे सांप जहरीले
डॉक्टर सुमित बताते हैं बरसात के मौसम में फरीदाबाद में सांप काटने के मामले ज्यादा आते हैं. उस समय सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. यहां सबसे ज्यादा कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं. अगर इन सांपों ने जहर छोड़ दिया, तो कुछ घंटों के भीतर मरीज की जान भी जा सकती है अगर समय पर इलाज न मिले.
कब दिया जाता है एंटी-वेनम
डॉक्टर सुमित बताते हैं अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहले हम मरीज की जांच करते हैं. कई बार शरीर पर सांप काटने के निशान होते हैं, लेकिन जहर के कोई लक्षण नहीं दिखते. ऐसी स्थिति को ड्राई बाइट कहा जाता है और उसमें एंटी-वेनम की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर मरीज में जहर के लक्षण दिखने लगें तो तुरंत एंटी-वेनम दिया जाता है.
इलाज में देरी से ज्यादा नुकसान
ज्यादातर मरीज दो से चार दिनों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए तो जहर शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार मरीज को वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ जाती है. किडनी खराब होना ब्लीडिंग होना या शरीर के अन्य अंग प्रभावित होना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
डॉक्टर सुमित बताते हैं कई बार सांप काटने के तुरंत बाद लक्षण नहीं आते. कुछ मरीजों में दो से तीन दिन बाद भी असर दिखाई देता है. इसी वजह से ऐसे मरीजों को अस्पताल में निगरानी में रखा जाता है.
गांवों में एक और अंधविश्वास देखने को मिलता है. कई लोग मानते हैं कि अगर सांप काटने से किसी की मौत हो जाए तो शव को जलाने की बजाय गंगा में बहा देने से वह जिंदा हो सकता है. इस पर डॉक्टर सुमित बताते हैं यह पूरी तरह मिथक है. अगर किसी व्यक्ति की मौत हो चुकी है तो पानी में डालने से वह जिंदा नहीं होगा.
क्या सांप को मार देने से जहर नहीं चढ़ता
डॉक्टर सुमित बताते हैं कई लोग सांप काटने के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय पहले सांप को मारने में लग जाते हैं. लोगों को लगता है कि सांप को मार देंगे तो जहर नहीं चढ़ेगा. यह बिल्कुल गलत सोच है. मरीज को छोड़कर सांप के पीछे भागने में समय बर्बाद होता है और यही देरी जानलेवा साबित हो सकती है.
मरीज के लक्षण देखकर शुरू होता है इलाज
डॉक्टर सुमित बताते हैं सांप को देखकर यह समझने में मदद मिल सकती है कि वह जहरीला था या नहीं लेकिन इसके लिए अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर मरीज के लक्षण देखकर भी इलाज शुरू कर देते हैं. सांप काटने पर सबसे पहले मरीज को शांत रखें और बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं.


