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भिंडी की फसल में मकड़ी जैसे जाले दिखें तो हो जाएं सावधान, समय रहते करें ये असरदार उपाय वरना होगा सिर्फ नुकसान

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भिंडी की फसल में मकड़ी जैसे जाले दिखें तो हो जाएं सतर्क, जानिए असरदार उपाय

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भिंडी की फसल में माइट्स का हमला किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है. ये छोटे कीड़े पत्तियों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों ने समय रहते पहचान, दवा के छिड़काव और नीम ऑयल के उपयोग की सलाह दी है.

बलिया: मौसम के साथ खेतों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अगर बात भिंडी की खेती की करें, तो इस फसल का एक खतरनाक दुश्मन भी इस समय सक्रिय हो गया है. जी हां, बिल्कुल सही सुना आपने. खेती का यह काल इतना छोटा होता है कि पहली नजर में दिखाई भी नहीं देता, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरी फसल को तबाह करने की क्षमता रखता है. इसे आमतौर पर माइट्स के नाम से जाना जाता है. यह छोटे-छोटे कीड़े भिंडी की पत्तियों और तनों पर मकड़ी के जाले जैसी आकृति बनाकर पौधों का पूरा रस चूस लेते हैं और धीरे-धीरे फसल को बहुत कमजोर बना देते हैं. आइए जानते हैं, इसको लेकर एक्सपर्ट ने क्या कुछ कहा…

भिंडी पर माइट्स का हमला

बलिया जनपद के श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ डॉ. संजीत कुमार सिंह ने बताया कि फील्ड में घूमने पर, खास तौर पर जनपद बलिया में, भिंडी की खेती में एक खास समस्या देखने को मिल रही है. यह माइट्स का हमला है. माइट्स का प्रकोप बढ़ने पर भिंडी की पत्तियां मुड़ने लगती हैं और उनका रंग पीला पड़ जाता है. इससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है. अगर समय रहते इसका उपाय नहीं किया गया, तो खेत की हरियाली कुछ ही दिनों में खत्म हो सकती है. इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की कमाई पर पड़ता है. अंत में किसान मायूस हो जाता है और उसकी कमर टूट जाती है.

कौन सी दवाओं का करें छिड़काव

भिंडी में लगे माइट्स की पहचान होते ही तुरंत समाधान शुरू कर देना किसानों के लिए बेहद जरूरी है. खेतों का नियमित निरीक्षण करते रहना चाहिए. ध्यान रखें, पत्तियों के नीचे जाले या कीड़ों के लक्षण दिखते ही दवा का छिड़काव जरूर करें. ओमाइट, फेनप्रॉक्सिमेट और डाइकोफॉल जैसी दवाएं इसके नियंत्रण में काफी असरदार साबित होती हैं. वहीं जैविक खेती करने वाले किसान नीम के तेल का भी उपयोग कर सकते हैं.

कैसे करें दवाओं का इस्तेमाल

दवा का सही मात्रा में उपयोग, जैसे एक लीटर पानी में 1 एमएल नीम ऑयल मिलाकर छिड़काव करने से माइट्स का असर तेजी से कम होता है. यह बिल्कुल सही है कि समय पर दवा, सही देखभाल और नियमित निगरानी से भिंडी की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है. ऐसा करने से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाली भिंडी भी प्राप्त होगी. हमेशा ध्यान रखें, खेती में कोई भी नया या पुराना लक्षण दिखे, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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