Last Updated:
Shani Jayanti 2026: हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान शनि देव का जन्म हुआ था. शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता कहा जाता है, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. अगर आप व्रत भी नहीं रख रहे हैं तो जरूर करें ये छोटे-छोटे 5 काम…
Shani Jayanti 2026: शनि जयंती का पर्व 16 मई को मनाया जाएगा, हर वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव को न्याय का प्रतीक माना जाता है और कर्मों के फल देने वाले देवता के रूप में उनका विशेष स्थान है. इस बार शनि जयंती पर 13 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है क्योंकि शनि जयंती का पर्व शनिवार को दिन पड़ रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार शनि जयंती पर करीब 300 साल बाद सूर्य-बुध युति से बुद्धादित्य योग, गजकेसरी योग, शश महापुरुष योग और सौभाग्य योग एक साथ बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. अगर आप शनि जयंती का व्रत भी नहीं कर रहे हैं तो उनकी कृपा प्राप्त करने और शनि दोष से मुक्ति के लिए कुछ कार्य अवश्य करने चाहिए. आइए जानते हैं शनि जयंती पर 13 साल बाद बन रहे दुर्लभ संयोग में क्या करने चाहिए…

शनि जयंती का उद्देश्य भगवान शनि की कृपा प्राप्त करना और जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाना माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और शनि देव को तेल, काला तिल, उड़द तथा नीले फूल अर्पित करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं. शनिदेव का नाम सुनते ही कई लोगों को भय लगने लगता है क्योंकि ज्यादातर लोगों को लगता है कि शनिदेव की वजह से जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन ऐसा नहीं है, शनिदेव हमेशा कर्मों के आधार पर ही न्याय करते हैं.

शनि पूजा में शरीर और मन की पवित्रता अत्यंत महत्वपूर्ण है. ज्योतिषाचार्य पूजा से पहले स्नान करने और काले व नीले वस्त्र पहनने का सुझाव देते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि काला व नीला रंग शनि के लिए सबसे शुभ रंग माना जाता है. हिंदू परंपरा के अनुसार, सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद शनि की पूजा करना शुभ माना जाता है. माना जाता है कि संध्या काल में शनि की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी होती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष के अनुसार, भगवान शनि पश्चिम दिशा के स्वामी हैं, इसलिए, शनि मंत्रों का जाप करते समय या पूजा करते समय पश्चिम की ओर मुख करना उचित है. ज्योतिषाचार्य यह भी कहते हैं कि भगवान शनि की मूर्ति के ठीक सामने नहीं खड़ा होना चाहिए. मूर्ति के बगल में खड़े होकर दर्शन करना शुभ माना जाता है.

शनि पूजा में नीले फूलों का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि संभव हो तो नीले फूल अर्पित करना शुभ होता है. यह भी माना जाता है कि शाम को शनि की मूर्ति के पास या रवी वृक्ष के नीचे सरसों के तेल से भरा चार मुख वाला दीपक जलाने से शनि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. शनि और रवी वृक्ष की सात बार परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है. भक्तों का मानना है कि इससे शनि के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है.

शनि देव को कर्मों का दाता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा करने वालों को ईमानदारी से जीवन जीना चाहिए, झूठ नहीं बोलना चाहिए और कुकर्मों से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि अच्छे कर्मों से शनि की कृपा प्राप्त की जा सकती है. ज्योतिष के अनुसार, शनि पूजा में लोहे के बर्तनों का प्रयोग और दान शुभ माना जाता है. हालांकि, तांबे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि तांबा सूर्य का प्रतीक माना जाता है.

शनि जयंती पर जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार काले तिल, काले कंबल, चाय का पाउडर या लोहे की वस्तुएं दान करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि जरूरतमंदों को दान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि जयंती पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी विशेष लाभ मिलता है.


