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45 सेमी पर सबसे मीठा फल…ये ट्रिक बदल देगा नर्सरी कटिंग का तरीका, फालसा से लद गई डालियां

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Phalsa Farming : विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ इम्यूनिटी मजबूत करने में भी रामबाण है. उद्यान विभाग की नर्सरी में इस बार फालसे की फसल पर शोध किया गया. शोध का फोकस पौधों की शाखाओं की लंबाई पर था. पौधों की शाखाओं की लंबाई 40 सेमी, 45 सेमी और 50 सेमी रखा गया. सबसे चौंकाने वाले नतीजे 45 सेमी वाली शाखाओं में देखने को मिले. पहले फालसे की फसल पककर तैयार होने में 70 से 75 दिन लगते थे, लेकिन इस बार 63 दिनों में ही फल तैयार हो गए.

कानपुर. यूपी स्थित कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए)  में फालसा की फसल पर हुए शोध ने किसानों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. देखने में छोटे बीज जैसा लगने वाला फालसा अब ‘देसी सुपरफूड’ के रूप में पहचान बना रहा है. विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ इम्यूनिटी मजबूत करने में भी बेहद असरदार है. सीएसए विवि के उद्यान विभाग की नर्सरी में इस बार फालसे की फसल पर खास शोध किया गया. शोध का मुख्य फोकस पौधों की कटिंग यानी शाखाओं की लंबाई पर रखा गया. वैज्ञानिकों ने पौधों की शाखाओं को 40 सेमी, 45 सेमी और 50 सेमी की लंबाई में काटकर छोड़ा. जब पौधों में फल आए तो सबसे चौंकाने वाले नतीजे 45 सेमी वाली शाखाओं में देखने को मिले.

किसानों के लिए क्यों खास

सीएसए विवि के प्रसार निदेशक प्रो. वीके त्रिपाठी ने बताया कि 45 सेमी लंबाई वाली शाखाओं पर सबसे ज्यादा फ्रूटिंग हुई. इन शाखाओं पर लगे फालसे बाकी शाखाओं के मुकाबले ज्यादा मीठे और अच्छी गुणवत्ता वाले पाए गए. 40 सेमी और 50 सेमी वाली शाखाओं में फल कम आए और मिठास भी कम रही. पहले फालसे की फसल पककर तैयार होने में करीब 70 से 75 दिन लगते थे, लेकिन इस बार सही तकनीक से कटिंग करने पर केवल 63 दिनों में ही अच्छी संख्या में फल तैयार हो गए. इससे किसानों को कम समय में बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

और क्या करें

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय अब किसानों को इस नई तकनीक की जानकारी देगा ताकि वे भी अपनी फसल की पैदावार बढ़ा सकें. उन्होंने बताया कि पौधों में समय पर कटिंग करना बेहद जरूरी होता है. गुलाब, गेंदा, गुड़हल और मीठी नीम जैसे पौधों में भी कटिंग के बाद निकलने वाली नई शाखाओं में फूल और फल ज्यादा आते हैं. अगर फालसे की फसल में ज्यादा फ्रूटिंग चाहिए तो पौधों पर इथरेल 1000 पीपीएम का छिड़काव करना चाहिए. इससे उत्पादन बेहतर होने की संभावना रहती है. फालसे का पौधा लोग अपने घर, बगीचे और दफ्तरों में भी लगा सकते हैं. इसके पौधे सीएसए विवि की नर्सरी में उपलब्ध हैं.

गर्मियों में शरीर के लिए संजीवनी

फाल्सा सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है.इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है.इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.गर्मियों में इसका सेवन पेट को ठंडक देने और पाचन को दुरुस्त रखने में भी असरदार माना जाता है.यही वजह है कि अब फाल्सा किसानों के लिए कमाई और लोगों के लिए सेहत दोनों का बड़ा जरिया बनता जा रहा है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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