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तपती रेत पर चलने से मिलेगी मुक्ति, पक्के घाटों के पास लौटेंगी सरयू की लहरें, 20 हजार हेक्टेयर खेत भी होंगे हरे-भरे, जानिए क्या है मेगा प्लान

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Ayodhya Saryu Barrage Project: अयोध्या के पौराणिक घाटों और ‘राम की पैड़ी’ पर अब सालभर सरयू नदी का पानी लबालब रहेगा. श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अब तपती रेत पर लंबी दूरी नहीं तय करनी होगी. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की घोषणा के बाद ₹2921 करोड़ की लागत वाली 820 मीटर लंबी सरयू बैराज परियोजना को रफ्तार मिल रही है. 45 गेट वाले इस बैराज से न सिर्फ पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि बस्ती के किसानों की 20 हजार हेक्टेयर भूमि भी सिंचित होगी.

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Ayodhya Saryu Barrage Project: राम नगरी अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत अच्छी और बड़ी खबर है. पौराणिक और रामायणकालीन घाटों से दूर हो चुकी सरयू नदी की लहरें जल्द ही फिर से घाटों के पास किलोल करती नजर आएंगी. दरअसल, अयोध्या में पक्के घाटों और ‘राम की पैड़ी’ पर पानी का जलस्तर स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए सरयू बैराज परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. मौजूदा समय में हालात यह हैं कि श्रद्धालुओं को सरयू स्नान के लिए तपती रेत पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. लेकिन इस महत्वाकांक्षी बैराज के बनते ही श्रद्धालुओं की यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपने अयोध्या दौरे के दौरान इस खास बैराज परियोजना के निर्माण की घोषणा की थी. इसके बाद से ही इसे रामनगरी की सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है.

कैसा होगा सरयू बैराज? जानिए इसकी खासियतें
प्रस्तावित योजना के अनुसार, अयोध्या में नया घाट-गोंडा मार्ग के पुराने पुल और रेलवे पुल के बीच इस बैराज का निर्माण किया जाएगा. यह बैराज करीब 820 मीटर लंबा, 50 मीटर चौड़ा और 23 मीटर ऊंचा होगा. पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए इसमें कुल 45 गेट लगाए जाएंगे. इस बैराज का जल संग्रहण क्षेत्र 87,220 वर्ग मीटर का होगा, जो लखीमपुर और बहराइच की सीमा से घाघरा नदी के हिस्से को कवर करते हुए अयोध्या तक फैलेगा. सबसे खास बात यह है कि इस बैराज की निगरानी के लिए इसके चारों तरफ टू-लेन सड़क बनाई जाएगी, जिस पर हल्के वाहन भी आसानी से चल सकेंगे.

लागत बढ़ने की उम्मीद, तैयार होगी नई डीपीआर
आपको बता दें कि करीब सात साल पहले जब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी, तब इसकी अनुमानित लागत 2921 करोड़ रुपए आंकी गई थी. हालांकि, समय बीतने के साथ अब इसकी लागत बढ़ना तय माना जा रहा है. सिंचाई विभाग की अनुसंधान एवं नियोजन इकाई (बस्ती) के अधीक्षण अभियंता डीसी वर्मा के मुताबिक, परियोजना को शुरू करने के लिए अब एक संशोधित डीपीआर तैयार की जाएगी.

सिर्फ एक एनओसी का इंतजार, बाकी आपत्तियां दूर
इस महाप्रोजेक्ट के लिए लगभग सभी सरकारी विभागों से हरी झंडी मिल चुकी है. रेलवे, वन विभाग और मॉडल स्टडी समेत कुल 8 में से 7 जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल चुके हैं. अब सिर्फ केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. इसके लिए साल 2025 में ही गोंडा और बस्ती के किसानों की जनसुनवाई भी पूरी की जा चुकी है. पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलते ही इस प्रोजेक्ट को केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा.

अयोध्या के साथ-साथ किसानों की भी चमकेगी किस्मत
इस बैराज के बनने से न सिर्फ अयोध्या के घाटों पर सालभर पानी रहेगा, बल्कि पड़ोसी जिले बस्ती की सरयू पंप कैनाल को भी 12 महीने पानी मिल सकेगा. अभी तक किसानों को केवल खरीफ सीजन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल पाता था, लेकिन बैराज बनने के बाद रबी और खरीफ दोनों सीजन में पानी मिलेगा. इससे क्षेत्र की लगभग 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई आसान हो जाएगी, जिससे किसानों की फसल और आमदनी दोनों बेहतर होगी.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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