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100 साल पुराना गुरुकुल, मुफ्त शिक्षा के साथ बच्चों को मिलता है घर जैसा माहौल, यहां से निकलकर कई बने अधिकारी

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मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में स्थित हिंदू बाल सेवा सदन एक ऐसी संस्था है, जो दशकों से हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रही है. यह सिर्फ एक स्कूल या आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक पूरा घर है, जिनके पास न तो संसाधन हैं और न ही सहारा. यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, रहने की सुविधा, भोजन और संस्कार मिलते हैं. करीब 1920 में शुरू हुई. इस संस्था का उद्देश्य था गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को सहारा देना.

मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में स्थित हिंदू बाल सेवा सदन एक ऐसी संस्था है, जो दशकों से हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रही है. यह सिर्फ एक स्कूल या आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए एक पूरा घर है, जिनके पास न तो संसाधन हैं और न ही सहारा. यहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा, रहने की सुविधा, भोजन और संस्कार मिलते हैं. करीब 1920 में शुरू हुई. इस संस्था का उद्देश्य था गरीब, अनाथ और जरूरतमंद बच्चों को सहारा देना. उन्हें शिक्षित बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना. इस नेक काम की नींव रखने में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे भगवत राव मंडलोई की अहम भूमिका रही है.

खंडवा के लालचौकी क्षेत्र में करीब 12 एकड़ में फैला यह परिसर आज एक छोटे गुरुकुल की तरह विकसित हो चुका है. यहां रहने वाले बच्चों के लिए हर सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. वह शिक्षा हो, अनुशासन हो या फिर शारीरिक और मानसिक विकास है. यहां पढ़ने वाले बच्चों में ज्यादातर वे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं. जिनके माता-पिता नहीं हैं.संस्था के अध्यक्ष विनय कुमार नेगी बताते हैं कि यहां बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दी जाती है. हर सुबह 5 बजे बच्चों का दिन शुरू होता है. योग, व्यायाम और मेडिटेशन के साथ दिनचर्या की शुरुआत होती है. इसके बाद नियमित पढ़ाई के साथ-साथ अलग से ट्यूशन क्लास भी चलती हैं.

तीन वर्षों से यहां का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा
संस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर होता जा रहा है. पिछले तीन वर्षों से यहां का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा है, जिसमें बच्चों के अंक 88 से 95 प्रतिशत तक आए हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और माहौल मिलने पर कोई भी बच्चा आगे बढ़ सकता है.सहसचिव वीरेंद्र वर्मा बताते हैं कि यहां पहली से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई कराई जाती है. अब नर्सरी कक्षा की भी शुरुआत हो चुकी है. बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ कपड़े, भोजन, किताबें और रहने की पूरी सुविधा दी जाती है.इस संस्था से पढ़कर निकले कई बच्चे आज बड़े पदों पर काम कर रहे हैं. कोई अपर सचिव बन चुका है, तो कोई मंत्रालय और पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा है. ऐसे कई उदाहरण हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह संस्था बच्चों के भविष्य को संवारने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

शिक्षा के साथ बच्चों को मिलता है घर जैसा सहारा
खंडवा के लोग दिल खोलकर यहां दान करते हैं.चाहे वह आम नागरिक हो या बड़े उद्योगपति है. कई लोग अपने बच्चों का जन्मदिन या अपने परिजनों की पुण्यतिथि यहां आकर मनाते हैं और बच्चों के साथ समय बिताते हैं. जिससे उन्हें परिवार जैसा माहौल मिलता है.यहां बच्चों के खान-पान का भी खास ध्यान रखा जाता है. उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन, दूध, फल और नाश्ता दिया जाता है. इसके साथ ही खेल-कूद, गार्डनिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियां भी कराई जाती हैं, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके.कड़े नियमों और अनुशासन के साथ चलने वाली इस संस्था में प्रवेश भी सोच-समझकर दिया जाता है. समिति यह सुनिश्चित करती है कि जिन बच्चों को वास्तव में जरूरत है, उन्हें ही यहां जगह मिले. हिंदू बाल सेवा सदन सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण है, जिसने अब तक हजारों बच्चों का जीवन संवारकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है. यहां से निकले बच्चे आज गर्व से कहते हैं कि उन्होंने इसी गुरुकुल में रहकर अपने सपनों को साकार किया है. यही इस संस्था की सबसे बड़ी सफलता है.



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