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Agriculture News: खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी मानी जाती है. अगर किसान समय रहते गहरी जुताई, बीज चयन, कंपोस्ट तैयार करने और हरी खाद जैसी तकनीकों पर ध्यान दें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है. बलिया के कृषि एक्सपर्ट प्रो. अशोक कुमार सिंह ने किसानों को अभी से तैयारी शुरू करने की सलाह दी है, ताकि बारिश शुरू होने के बाद किसी तरह की परेशानी न हो और फसल से ज्यादा मुनाफा मिल सके.
बलिया: खरीफ फसल की तैयारी करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद जरूरी है. क्योंकि खेती में अच्छी पैदावार सिर्फ बारिश पर नहीं, बल्कि समय से की गई तैयारी पर भी निर्भर करती है. अगर किसान अभी से खेत और बीज की तैयारी शुरू कर दें, तो आगे चलकर काफी फायदा मिल सकता है. बलिया के श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के एचओडी प्रो. अशोक कुमार सिंह पिछले 21 साल से किसानों को खेती की नई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने खरीफ सीजन से पहले किसानों को कुछ जरूरी काम करने की सलाह दी है.
कृषि विशेषज्ञ प्रो. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि खरीफ सीजन में मुख्य रूप से धान्य फसलें जैसे ज्वार, बाजरा और मक्का बोई जाती हैं. इसके अलावा मिलेट्स जैसे सांवा, कोदो, मडुआ, रागी और कंगनी की भी खेती की जाती है. दलहनी फसलों में मूंग, उड़द और अरहर शामिल हैं, जबकि तिलहनी फसलों में सोयाबीन और मूंगफली प्रमुख हैं. किसान इन सभी फसलों की बुवाई के लिए अभी से खेत की तैयारी शुरू कर दें.
प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह ने बताया कि इस समय किसानों को सबसे पहले अपने खेतों की गहरी जुताई करवा देनी चाहिए. मई के महीने की तेज धूप के कारण मिट्टी के अंदर मौजूद सभी नुकसानदायक कीटाणु, कीड़े-मकोड़े और फसलों को लगने वाली पुरानी बीमारियां पूरी तरह खत्म हो जाती हैं. इसके साथ ही पिछली फसल के जो भी अवशेष खेत में बचे रहते हैं, वे पहली बारिश होते ही मिट्टी में सड़कर अच्छी तरह मिल जाते हैं. इस आसान प्रक्रिया से खेत की उपजाऊ शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
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इसके अलावा यह समय घर पर ही जैविक खाद तैयार करने के लिए भी सबसे उत्तम है. खेतों या आसपास जो भी सूखी घास और पत्तियां मौजूद हैं, उन्हें एक जगह इकट्ठा कर लें और कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दें. अगर आप अभी से यह काम शुरू करेंगे, तो अगली फसल की बुवाई तक यानी करीब एक से डेढ़ महीने में एक बेहतरीन और शुद्ध कंपोस्ट खाद बनकर तैयार हो जाएगी.
धान के बीजों का चयन अभी से करना क्यों है जरूरी?
धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह समय अहम है. अगर आप जून के मध्य (15 या 16 जून) से धान की नर्सरी लगाना चाहते हैं, तो बीजों का इंतजाम अभी से कर लें. आपको अपने खेत में सुगंधित धान उगाना है, ज्यादा पैदावार देने वाली किस्म लगानी है या मोटे धान की खेती करनी है, इसका फैसला अभी से कर के बीज सुरक्षित कर लें.
इसके साथ ही जिन किसान भाइयों के पास पानी के अच्छे साधन मौजूद हैं, वे धान की नर्सरी डालने से पहले अपने खेतों में ‘ढैंचा’ की बुवाई कर सकते हैं. धान की रोपाई शुरू होने तक ढैंचा की फसल खेत में ही पलटने के लायक हो जाती है, जो यूरिया की निर्भरता को कम कर देगी.
सूरन, अदरक और हल्दी लगाने शानदार मौका
जो किसान अपने खेतों में सूरन, अदरक और हल्दी जैसी नकदी फसलें उगाना चाहते हैं, उनके लिए यह समय अच्छा है. बिना देर किए इसकी प्लांटिंग या बुवाई कर लेनी चाहिए. इसके अलावा जो लोग चारे या मक्के की अगेती खेती करना चाहते हैं, वे कोशिश करें कि उन्हें सरकारी संस्थाओं से प्रमाणित और किफायती बीज मिल जाएं. अगर सरकारी बीज न मिलें, तो पहले से ही प्राइवेट डीलर्स से बातचीत करके रख लें.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें


