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बोबाट ने आरसीबी की पहल ‘लैब्स इंडियन स्पोर्ट समिट’ में चुनिंदा मीडिया से कहा, ‘मैं ऐसा महसूस नहीं करना चाहता कि हमने माउंट एवरेस्ट फतेह कर लिया है . हम आगे बढ़ते रहना चाहते हैं. शिकार जारी रहना चाहिए. हम आपस में इसी तरह बात करते हैं कि शिकारी जैसी सोच बनी रहनी चाहिए.
RCB के डायरेक्टर ने बताया कैसे शिकारी वाली सोच ने टीम को प्वाइंट टैली के टॉप पर पहुंचाया
नई दिल्ली. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के क्रिकेट निदेशक मो बोबाट का कहना है कि आईपीएल में टीम का शानदार प्रदर्शन उस ‘शिकारी जैसी सोच’ की वजह से है, जिससे टीम ने पिछली बार खिताब जीतने के बाद भी आत्ममुग्धता से बचाव किया है. आरसीबी इस साल प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम बन गई है जिसके 18 अंक हैं. अभी टीम को एक और मैच खेलना है और वह शीर्ष पर बने रहने की कोशिश करेगी.
बोबाट ने आरसीबी की पहल ‘लैब्स इंडियन स्पोर्ट समिट’ में चुनिंदा मीडिया से कहा, ‘मैं ऐसा महसूस नहीं करना चाहता कि हमने माउंट एवरेस्ट फतेह कर लिया है . हम आगे बढ़ते रहना चाहते हैं. शिकार जारी रहना चाहिए. हम आपस में इसी तरह बात करते हैं कि शिकारी जैसी सोच बनी रहनी चाहिए.
शिकार जारी रखने का प्लान
बोबाट ने कहा, ‘मेरे लिए और सीनियर खिलाड़ियों के लिए भी, जल्दी खुद को ढालना, अपनी सोच को फिर से सेट करना और यह तय करना कि अब आगे किस चीज पर काम करना है, यह बहुत जरूरी है. इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा यह है कि डगआउट में हर तरह के खिलाड़ी हैं, बहुत अनुभवी से लेकर पहली बार खेलने वाले युवा तक. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु की इसी सोच ने उनको लगातार दूसरे सीजन में खिताब जीतने का प्रबल दावेदार बना दिया है क्योंकि एक बात तो साफ है कि शिकार वहीं करता है जो रनों का भूखा हो और टीम में वो जीत की भूख नजर आ रही है.
टीम में डिमांड और सप्लाई का फॉर्मूला
बोबाट ने कहा, ‘टीम में 19 साल का खिलाड़ी भी हो सकता है जिसने पहली बार आईपीएल में कदम रखा है और ऐसा भारतीय खिलाड़ी भी जो बरसों से देश के लिए खेल रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा एक आर्थिक माहौल भी है, जहां मेरा मानना है कि खिलाड़ियों की कमाई का उनकी असल कीमत से कोई लेना-देना नहीं होता. नीलामी में जो कीमत मिलती है, वह असल कीमत नहीं होती, यह सिर्फ ‘मांग और आपूर्ति’ का खेल है.’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए ऐसा भी हो सकता है कि कोई अनुभवी और उपलब्धियाँ हासिल करने वाला खिलाड़ी, किसी नए खिलाड़ी से कम कमा रहा हो क्योंकि उस समय उस नए खिलाड़ी के कौशल की ज्यादा मांग होती है.’ बोबाट ने कहा, ‘इन सभी को एक लक्ष्य के लिए साथ में प्रयास करना होता है. आईपीएल में आठ से दस दिन मिलते हैं, इसलिए यह आसान नहीं है लेकिन रोमांचक चुनौती है.’
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


