नई दिल्ली. अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले आगामी टेस्ट मैच के लिए जब भारतीय टीम का एलान हुआ, तो उसमें एक नाम ऐसा था जिसने राजस्थान के एक छोटे से सीमावर्ती शहर में खुशियों का सैलाब ला दिया. यह नाम था 23 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार का. जैसे ही मानव को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किए जाने की खबर आई, उनके पिता जगदीश सुथार की आंखों से आंसू छलक पड़े. पिछले कई दिनों से, जब से मानव के चयन की चर्चाएं शुरू हुई थीं, तब से जगदीश लगातार भगवान से यही प्रार्थना कर रहे थे कि उनके बेटे का टीम इंडिया में सेलेक्शन हो जाए. बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता पर जब उनसे बात करने की कोशिश की गई, तो वह अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाए और फोन पर ही फूट-फूटकर रोने लगे. आख़िरकार उनकी पत्नी ने फोन संभाला और भारी आवाज में कहा, ‘उनके अंदर से सारे इमोशन्स बाहर आ रहे हैं. वैसे तो वो बहुत सख्त इंसान हैं, लेकिन यह पल हमारे लिए बहुत ज्यादा भावुक करने वाला है.’
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मानव सुथार (Manav Suthar) के पिता फोन पर भी रोने लगे. थोड़ी देर बाद जब मानव के पिता जगदीश (Jagdish) ने खुद को संभाला और दोबारा फोन लिया, तो उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, ‘यह हमारे लिए जीवनभर का सपना था. इसके लिए हमने बहुत कड़ी मेहनत की है. आज मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मैं कितना खुश हूं.’ भारतीय क्रिकेट की अन्य कहानियों की तरह, सुथार परिवार की कहानी भी त्याग और लगन की मिसाल है. पाकिस्तान सीमा से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित श्रीगंगानगर में एक स्कूल के पीई (शारीरिक शिक्षा) टीचर जगदीश सुथार के लिए कभी क्रिकेट ही सब कुछ था. हालांकि, वह खुद स्कूल स्तर से आगे नहीं खेल सके. ऐसे में जब उनके बेटे मानव ने क्रिकेट में दिलचस्पी दिखाई, तो पिता ने बिना समय गंवाए 11 साल की उम्र में उसे क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया.
मानव सुथार के पिता फोन पर रो पड़े.
दिलचस्प बात यह है कि जगदीश अपने बेटे को एक बेहतरीन बल्लेबाज बनाना चाहते थे. लेकिन मानव के कोच धीरज शर्मा की नजर कुछ और ही देख रही थी. जगदीश याद करते हैं, ‘मैं चाहता था कि वह बल्लेबाजी करे. लेकिन ट्रेनिंग के पहले ही दिन कोच धीरज शर्मा ने मुझसे कहा था आपका बेटा बल्लेबाजी के लिए नहीं, बल्कि गेंदबाजी के लिए बना है.’और कोच का वह फैसला आज मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ.
विराट-रोहित को छकाकर आए थे चर्चा में
मानव सुथार पहली बार राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की रडार पर तब आए, जब उन्हें 2023 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम के तैयारी शिविर में नेट बॉलर के रूप में बेंगलुरु बुलाया गया था. कैंप में जाने से पहले ही घरेलू क्रिकेट में उनके नाम की काफी चर्चा थी, लेकिन बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में उन्होंने जो किया, उसने सबको हैरान कर दिया. नेट सत्र के दौरान मानव ने अपनी फिरकी से भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली जैसे दिग्गजों को खासा परेशान किया. उस कैंप के बाद वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच यह आम चर्चा बन गई थी कि यदि यह लड़का सफेद गेंद (व्हाइट बॉल) को इतनी हवा में ड्रिफ्ट करा सकता है, तो लाल गेंद (रेड बॉल) से तो यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कहर ढा सकता है.
आईपीएल का बेंच वॉर्मर और लगातार उपेक्षा का दौर
भारतीय टीम तक पहुंचने का यह रास्ता मानव के लिए कतई आसान नहीं था. हाल के दिनों में पूरा सुथार परिवार भारी तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था. आज के दौर में जहां आईपीएल में चमकने वाले खिलाड़ियों को तुरंत तवज्जो मिलती है, वहीं मानव को किस्मत का साथ नहीं मिल रहा था. गुजरात टाइटंस ने उन्हें 2025 के पूरे सीजन बेंच पर बिठाए रखा क्योंकि टीम में आर. साई किशोर जैसे सीनियर स्पिनर मौजूद थे. अगले सीजन (2026) में भी उन्हें सिर्फ चार मैचों में खेलने का मौका मिला.
बात यहां तक पहुंच गई थी कि श्रीगंगानगर के स्थानीय क्रिकेट हलकों में लोग बातें बनाने लगे थे कि मानव शायद बड़े स्तर के खिलाड़ी नहीं हैं. किस्मत ने उनसे कई बार परीक्षा ली. जब वह 2025 में इंडिया-ए टीम के साथ इंग्लैंड लॉयंस के खिलाफ खेलने यूके गए, तो उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला. दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन ने उनकी जगह सारांश जैन और हर्ष दुबे को प्राथमिकता दी और मानव को ‘ड्रिंक्स’ ढोना पड़ा. पिछले साल सितंबर में ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ पहले टेस्ट में भी उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ा था.
‘तुम्हें एक दिन लाल गेंद मिलेगी…’
लगातार मिल रही उपेक्षा के बीच मानव काफी नर्वस और निराश होने लगे थे. ऐसे समय में उनके कोच धीरज शर्मा ने उनका हौसला बनाए रखा. धीरज ने कहा, ‘ जब हर तरफ आईपीएल और मौकों को लेकर बातें हो रही थीं, मैंने मानव से सिर्फ एक ही बात कही थी ‘यदि तुम भारत के लिए खेलोगे, तो लाल गेंद से खेलोगे. वे एक दिन तुम्हारे हाथ में रेड बॉल जरूर थमाएंगे, और जब ऐसा हो, तो उस मौके को कभी हाथ से मत जाने देना.’ वह विशुद्ध रूप से टेस्ट क्रिकेट के लिए बना है.’ आखिरकार, पिछले साल ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ दूसरे टेस्ट में मानव को मौका मिला. दबाव के उस क्षण में उन्होंने शानदार 5 विकेट चटकाकर चयनकर्ताओं को अपनी ताकत का अहसास कराया और साबित कर दिया कि उनका टेंपरामेंट इंटरनेशनल लेवल का है.
क्लासिकल स्पिनर और टेस्ट माइंडसेट
राजस्थान की टीम से खेलने के कारण (जो हाल के वर्षों में नॉकआउट तक नहीं पहुंच पाई) मानव को अपनी प्रतिभा दिखाने के सीमित अवसर मिलेण् उनके नाम 29 प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मैचों में 25.76 की औसत से 129 विकेट दर्ज हैं. हालांकि ये आंकड़े बेहद असाधारण नहीं दिखते, लेकिन चयनकर्ता उनके आंकड़ों से परे उनकी अद्भुत खेल शैली (स्किलसेट) और क्लासिकल गेंदबाजी एक्शन से प्रभावित हुए हैं.


