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कानपुर के एलएलआर अस्पताल में अब गर्भवती महिलाओं के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई तकनीक की मदद ली जाएगी. शहर के सरकारी अस्पताल में यह पहली बार होगा, जब महिला मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से तैयार किया जाएगा और उसी के आधार पर डॉक्टर आगे की संभावित परेशानियों का अंदाजा लगा सकेंगे. इससे इलाज पहले से ज्यादा आसान, तेज और सटीक होने की उम्मीद है.
कानपुरः कानपुर के एलएलआर अस्पताल में अब गर्भवती महिलाओं के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई तकनीक की मदद ली जाएगी. शहर के सरकारी अस्पताल में यह पहली बार होगा, जब महिला मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से तैयार किया जाएगा और उसी के आधार पर डॉक्टर आगे की संभावित परेशानियों का अंदाजा लगा सकेंगे. इससे इलाज पहले से ज्यादा आसान, तेज और सटीक होने की उम्मीद है.
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की वरिष्ठ डॉक्टर डा. सीमा द्विवेदी ने बताया कि कई बार गर्भवती महिलाएं इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर चली जाती हैं, लेकिन कुछ समय बाद अचानक उन्हें गंभीर दिक्कतें होने लगती हैं.ऐसे मामलों में पहले से खतरे का पता लगाना मुश्किल होता था.अब एआई तकनीक की मदद से मरीजों की पुरानी रिपोर्ट, इलाज, बीमारी और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण किया जाएगा.इससे डॉक्टरों को समय रहते सही फैसला लेने में मदद मिलेगी.
एआई बताएगा मरीज की परेशानी
अस्पताल में आने वाली हर गर्भवती महिला का अलग-अलग डेटा तैयार किया जाएगा. इसमें उनकी जांच रिपोर्ट, ब्लड प्रेशर, शुगर, पहले की बीमारी और इलाज से जुड़ी जानकारी शामिल रहेगी. इसके बाद एआई तकनीक इन सभी जानकारियों का विश्लेषण करेगी और बताएगी कि किस मरीज को भविष्य में ज्यादा खतरा हो सकता है.डॉक्टरों का मानना है कि इससे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को पहले ही पहचान लिया जाएगा.समय पर इलाज मिलने से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा बेहतर हो सकेगी.अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में यह तकनीक महिला मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी.
छात्रों की पढ़ाई होगी आसान
डा. सीमा द्विवेदी ने बताया कि एआई सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों की पढ़ाई में भी बड़ी मदद करेगा.कुछ दिन पहले अस्पताल के प्राचार्य डा. संजय काला ने सभी विभागों को एआई तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के निर्देश दिए थे.इसके बाद कई विभागों में नई तकनीक के प्रयोग पर काम शुरू हो गया है.उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्राएं और जूनियर डॉक्टर अब अपने रिसर्च प्रोजेक्ट, डेटा तैयार करने और पढ़ाई से जुड़े काम एआई की मदद से आसानी से कर सकेंगे.इससे उन्हें नई मेडिकल तकनीकों को समझने में मदद मिलेगी और शोध कार्य भी तेजी से पूरे हो सकेंगे.
इलाज के साथ तकनीक का नया दौर
एलएलआर अस्पताल में शुरू हो रही यह पहल सरकारी अस्पतालों में इलाज के तरीके को बदलने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले समय में एआई तकनीक मरीजों की देखभाल को और बेहतर बनाएगी.खासकर गर्भवती महिलाओं के इलाज में यह तकनीक कई गंभीर परेशानियों को पहले ही पहचानने में मददगार साबित हो सकती है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


