रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में बांग्लादेश के लगभग 50 लाख बच्चों को पूरी तरह टीका नहीं लग पाया. इनमें करीब 70 हजार ऐसे बच्चे थे जिन्हें एक भी वैक्सीन डोज़ नहीं मिली, जबकि 4 लाख से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण अधूरा रह गया. UNICEF, WHO और Gavi Vaccine Alliance ने चेतावनी दी है कि शहरी झुग्गी बस्तियों और पिछड़े इलाकों में रहने वाले बच्चों के बीच टीकाकरण में बड़ी कमी है. आइये समझते हैं असल में “खसरा” क्या होता है:
कुछ लोग खसरे को सिर्फ हल्के दाने और बुखार वाली बीमारी मानते हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाती है. लेकिन खसरा गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में. खसरा बेहद संक्रामक बीमारी है. यदि एक व्यक्ति को खसरा हो जाए, तो उसके संपर्क में आने वाले 10 में से लगभग 9 लोग संक्रमित हो सकते हैं, अगर उन्हें सुरक्षा नहीं मिली हो.
खसरे से बचाव का सबसे अच्छा तरीका MMR वैक्सीन है. MMR वैक्सीन खसरे के खिलाफ लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है.
खसरा (Measles) और उसके लक्षण क्या होते हैं?
खसरा (Measles) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है. खसरा संक्रमित व्यक्ति की नाक, मुंह या गले से निकलने वाली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से फैलता है. इसके शुरुआती लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 10–14 दिन बाद दिखाई देते हैं, जिनमें तेज बुखार, नाक बहना, आंखों का लाल होना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे शामिल हैं. कुछ दिनों बाद शरीर पर दाने निकलने लगते हैं, जो पहले चेहरे और गर्दन के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाते हैं.
खसरा बेहद संक्रामक बीमारी है. यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा के जरिए फैलता है. जिस कमरे में खसरे से संक्रमित व्यक्ति मौजूद रहा हो, वहां केवल रहने से भी संक्रमण हो सकता है. यहां तक कि उस व्यक्ति के कमरे से जाने के 2 घंटे बाद तक भी खसरा फैलने का खतरा बना रहता है.
गंभीर खसरा (Severe Measles) क्या होता है?
गंभीर खसरे का खतरा कुपोषित छोटे बच्चों में अधिक होता है, खासकर उन बच्चों में जिनके शरीर में विटामिन A की कमी हो या जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली HIV/AIDS या अन्य बीमारियों के कारण कमजोर हो चुकी हो. इसके सबसे गंभीर दुष्प्रभावों में अंधापन, एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन पैदा करने वाला संक्रमण), गंभीर दस्त और उससे होने वाला डिहाइड्रेशन, तथा निमोनिया जैसे गंभीर श्वसन संक्रमण शामिल हैं.
आज तक दुनिया खसरे से क्यों जूझ रही है?
सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद यह आज भी दुनिया भर में छोटे बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण बनी हुई है. हालांकि टीकाकरण के कारण वर्ष 2000 से 2024 के बीच अनुमानित 5.9 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, फिर भी खसरा कई निम्न-आय वाले देशों में व्यापक रूप से फैला हुआ है, खासकर अफ्रीका और एशिया के कुछ हिस्सों में. वर्ष 2024 में अनुमानित 95,000 लोगों की मौत खसरे के कारण हुई. इनमें 95% से अधिक मौतें उन देशों में हुईं जहां प्रति व्यक्ति आय कम है और स्वास्थ्य ढांचा कमजोर है.
यह आंकड़ा वर्ष 2000 के बाद सबसे कम वार्षिक मौतों में शामिल है, लेकिन ऐसी बीमारी से होने वाली हर मौत अस्वीकार्य है, जिसे बेहद प्रभावी और सस्ते टीके से रोका जा सकता है. मौतों में कमी आने के बावजूद दुनिया भर में खसरे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. वर्ष 2024 में अनुमानित 1.1 करोड़ लोग खसरे से संक्रमित हुए, जो महामारी से पहले वर्ष 2019 के मुकाबले करीब 8 लाख अधिक हैं.
बच्चों को नियमित रूप से खसरे का टीका लगाना और जिन देशों में टीकाकरण कम होता है, वहां बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाना, खसरे से होने वाली मौतों को कम करने का सबसे असरदार तरीका है.
खसरे का टीका 1960 के दशक से इस्तेमाल हो रहा है. यह सुरक्षित, असरदार और सस्ता है. World Health Organization (WHO) का कहना है कि हर बच्चे और ऐसे वयस्क को खसरे का टीका लगना चाहिए, जिन्हें यह टीका दिया जा सकता है.
हर बच्चे तक खसरे की 2 डोज पहुंचाना जरूरी है. यह टीका अकेले खसरे का हो सकता है या MR, MMR और MMRV जैसी संयुक्त वैक्सीन के रूप में दिया जा सकता है. यही सभी देशों के टीकाकरण कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए.
खसरे के लिए कोई विशेष एंटीवायरल इलाज मौजूद नहीं है. इलाज का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना होता है, जब तक शरीर खुद वायरस से लड़कर ठीक न हो जाए. आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना और पौष्टिक भोजन लेना मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद कर सकता है. खसरे से पीड़ित बच्चों को गंभीर जटिलताओं से बचाने के लिए विटामिन A की खुराक दी जाती है. अगर खसरे के दौरान बैक्टीरिया से दूसरा संक्रमण हो जाए, जैसे निमोनिया या कान का संक्रमण, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं.
खसरा कई गंभीर Complications से जुड़ा हुआ है, इनमें शामिल हैं:
दस्त (Diarrhea) / कान का संक्रमण (Ear Infection) / निमोनिया (Pneumonia)
– क्रूप यानी सांस लेने में दिक्कत पैदा करने वाली बीमारी
– शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर होना
– एन्सेफलाइटिस, यानी दिमाग में सूजन (कुछ दुर्लभ मामलों में यह कई साल बाद भी हो सकता है)
– गर्भावस्था के दौरान खसरा होने पर समय से पहले डिलीवरी और कम वजन वाले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है.
– छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग, खसरे की गंभीर Complications के सबसे ज्यादा खतरे में होते हैं.


