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भारतीय घरेलू क्रिकेट में जब भी कोई गेंदबाज लगातार दो सीजन तक बल्लेबाजों के लिए काल बन जाए, तो राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के मामले में ऐसा नहीं हुआ. रणजी ट्रॉफी 2024-25 में 44 विकेट और फिर 2025-26 के ऐतिहासिक सीजन में 60 विकेट (कुल 104 विकेट) का अंबार लगाने वाले आकिब को आगामी सीरीज और टीम इंडिया की मुख्य स्कीम से फिलहाल दूर रखा गया है.
दो सीजन में 104 विकेट लेने के बावजूद नहीं हुआ आकिब नबी का सेलेक्शन
नई दिल्ली. अगर आपके हाथ में गेंद बोलती है तो आपको भी बोलने की जरूरत है नहीं तो आपका भी वहीं हाल होगा जो आकिब नबी का हुआ. रणजी ट्रॉफी के दो सीजन में कुल 104 विकेट चटकाकर जम्मू-कश्मीर को पहली बार चैंपियन बनाने वाले आकिब नबी को भारतीय टीम में शामिल न किए जाने के फैसले ने हर किसी को हैरान किया है. पूर्व कप्तान सौरव गांगुली जैसी बड़ी हस्तियों द्वारा अजीत अगरकर की चयन समिति को उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका देने की वकालत के बावजूद, सिलेक्टर्स ने इस होनहार गेंदबाज को फिलहाल इंतजार कराने का फैसला किया है.
भारतीय घरेलू क्रिकेट में जब भी कोई गेंदबाज लगातार दो सीजन तक बल्लेबाजों के लिए काल बन जाए, तो राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाते हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के मामले में ऐसा नहीं हुआ. रणजी ट्रॉफी 2024-25 में 44 विकेट और फिर 2025-26 के ऐतिहासिक सीजन में 60 विकेट (कुल 104 विकेट) का अंबार लगाने वाले आकिब को आगामी सीरीज और टीम इंडिया की मुख्य स्कीम से फिलहाल दूर रखा गया है.
क्यों नही हुआ चयन?
अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए टीम जो चुनी गई वो देखने के बाद हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन में एक ही सवाल है- आखिर रणजी के इस सबसे सफल गेंदबाज के खिलाफ क्या बात गई? आकिब नबी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सटीक लाइन-लेंथ और गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता है. उन्होंने फाइनल में केएल राहुल और करुण नायर जैसे दिग्गजों को अपनी इसी कला से चारों खाने चित किया था. हालांकि, चयनकर्ताओं के गलियारे में उनकी गति को लेकर लगातार चर्चा होती रही है.
स्विंग के किंग पर भारी पड़ी रफ्तार की डिमांड
आकिब अमूमन 130 से 135 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं. आज के दौर में जहां टीम इंडिया विदेशी पिचों को ध्यान में रखकर 140+ की गति वाले एक्सप्रेस गेंदबाजों को प्राथमिकता दे रही है, वहीं आकिब की यह मध्यम-तेज गति उनके खिलाफ चली गई. सिलेक्टर्स का मानना है कि भारतीय पिचों पर जो स्विंग और सीम कहर ढाती है, वह ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका की सपाट व उछाल भरी पिचों पर बिना अतिरिक्त गति के बेअसर साबित हो सकती है.
अंशुल कंबोज जैसी जल्दबाजी नहीं दोहराना चाहते सिलेक्टर्स
सूत्रों और क्रिकेट पंडितों के अनुसार, बीसीसीआई की चयन समिति डोमेस्टिक सीजन के तुरंत बाद किसी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झोंकने की जल्दबाजी में नहीं है. हरियाणा के तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज को घरेलू स्तर पर दमदार प्रदर्शन के तुरंत बाद मौका दिया गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच के दबाव और विविधताओं के कारण उन्हें पूरी तरह स्थापित होने में समय लग रहा है. अजीत अगरकर और उनकी टीम आकिब नबी के मामले में पूरी सावधानी बरत रही है. सिलेक्टर्स चाहते हैं कि आकिब पहले इंडिया-ए के दौरों पर खुद को साबित करें, जहां पिचों का मिजाज अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसा होता है. सीधे मुख्य टीम में शामिल कर उन पर दबाव बनाने के बजाय, उन्हें क्रमिक रूप से तैयार करने की रणनीति अपनाई गई है.
चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की दलील
BCCI चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने आकिब नबी की प्रतिभा और उनके 104 विकेटों के रिकॉर्ड को पूरी तरह स्वीकार किया है हालांकि, चयनकर्ताओं की दलील है कि डोमेस्टिक रेड-बॉल क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के स्तर में बड़ा अंतर होता है. अगरकर का मानना है कि आकिब को अभी अपने गेंदबाजी कार्यभार को संभालने और सफेद गेंद के प्रारूप (IPL और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी) में खुद को और अधिक निखारने की जरूरत है. आईपीएल 2026 में दिल्ली कैपिटल्स द्वारा 8.4 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के बाद आकिब को बड़े मंच का अनुभव तो मिला, लेकिन वहां उनकी गति और विविधताओं की असल परीक्षा होनी अभी बाकी है. सेलेक्टर्स का साफ संदेश है- आकिब उनकी रडार पर हैं, लेकिन टीम इंडिया की कैप हासिल करने के लिए उन्हें थोड़े और कड़े इम्तिहानों से गुजरना होगा.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


