Last Updated:
मऊ जनपद में करोड़ों रुपए खर्च कर घाटों का सुंदरीकरण तो करा दिया गया, लेकिन घाटों के बीच से बह रहा गंदा नाला अब श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट पहुंचा रहा है. करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए दो प्रमुख घाट आज भी नगर के गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों के बीच से पूरे कस्बे का गंदा पानी नदी में गिरता है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान और पूजा-पाठ करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
मऊः उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में करोड़ों रुपए खर्च कर घाटों का सुंदरीकरण तो करा दिया गया, लेकिन घाटों के बीच से बह रहा गंदा नाला अब श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट पहुंचा रहा है. करीब तीन करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए दो प्रमुख घाट आज भी नगर के गंदे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों के बीच से पूरे कस्बे का गंदा पानी नदी में गिरता है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान और पूजा-पाठ करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
नाले के गंदे पानी से नहीं हो सकता स्नान
स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों घाटों के बीच बह रहे नाले का पानी इतना गंदा है कि लोग वहां स्नान तक नहीं कर पा रहे हैं. पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लालजी वर्मा ने बताया कि पूरे नगर का गंदा पानी इसी नाले के माध्यम से घाटों के बीच होकर नदी में जाता है. इसकी वजह से लोग ना तो स्नान कर पा रहे हैं और ना ही पूजा के लिए शुद्ध जल ले पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च कर घाटों का सौंदर्यीकरण कराया गया, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यानी गंदे नाले को जस का तस छोड़ दिया गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेष रूप से रामघाट पर स्थिति ज्यादा खराब है, क्योंकि नाले का पूरा गंदा पानी इसी घाट के पास से होकर गुजरता है. यहां स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के ऊपर तक गंदा पानी पहुंच जाता है, जिससे लोग घाट पर जाने से भी बचने लगे हैं. डाला छठ और देव दीपावली जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पूजा करने आते हैं, लेकिन गंदे पानी के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है.
करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी बनी है समस्या
मनोज गुप्ता और विनोद शुक्ला जैसे स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद यदि श्रद्धालु गंदे नाले के बीच खड़े होकर पूजा करने को मजबूर हैं, तो यह पूरे विकास कार्य पर सवाल खड़ा करता है. उनका कहना है कि यदि नाले को दूसरी दिशा में मोड़ दिया जाए तो श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिल सकती है और घाटों की वास्तविक सुंदरता भी दिखाई देगी.
इस मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दीपक गुप्ता डायमंड ने बताया कि नाले को दूसरी तरफ ले जाने का मामला सिंचाई विभाग से जुड़ा हुआ है. शासन और प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और मंजूरी मिलते ही नाले को दूसरी दिशा में शिफ्ट कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि सुंदरीकरण कार्य के दौरान ही इस संबंध में पत्र भेज दिया गया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द समाधान निकलने पर श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी और घाटों की भव्यता का वास्तविक लाभ लोगों को मिल पाएगा.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


