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Supreme Court On Stray Dogs: ‘सुप्रीम कोर्ट ने तो इस गंभीर मामले से अपने हाथ ही धो लिए’, आवारा कुत्तों पर फैसले से क्यों भड़कीं मेनका गांधी?

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सुप्रीम कोर्ट ने तो अपने हाथ ही धो लिए… आवारा कुत्तों पर फैसले से नाराज मेनका

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Supreme Court On Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है. डॉग लवर्स की बदलाव वाली याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है. इस पर एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपने हाथ धो लिए हैं. सरकार और एनजीओ के बीच एक बड़ा माफिया काम कर रहा है.

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मेनका गांधी ने क्यों कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से हाथ धो लिए? (File Photo : PTI)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश में लगातार बढ़ती डॉग बाइट की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पुराने आदेश को बदलने से साफ मना कर दिया. डॉग लवर्स की याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने पुराना फैसला बरकरार रखा है. इस बड़े फैसले पर एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और सांसद मेनका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से अपने हाथ धो लिए हैं. कोर्ट ने कह दिया कि अब हमारे पास मत आइए और सीधे हाई कोर्ट जाइए. नवंबर के आदेश पर सात महीने बाद भी कोई अमल नहीं हुआ है.

आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से कैसे हटाया जा सकता है?

मेनका गांधी ने कहा कि जानवर हमेशा उसी जगह जाते हैं जहां उन्हें आसानी से खाना मिलता है. रेलवे स्टेशन, कॉलेज और अस्पतालों जैसी जगहों पर कुत्तों को खाना मिल जाता है. ऐसे में उन्हें इन सार्वजनिक जगहों से कैसे हटाया जा सकता है. कोर्ट ने पहले स्टेट एनिमल बोर्ड बनाने की बात कही थी जो आज तक नहीं बने. अब सार्वजनिक जगहों से जानवरों को हटाने की बात से सड़कों पर दोनों पक्षों में फिर मारामारी शुरू होगी.

देश के एबीसी सेंटर्स और फर्जी एनजीओ का क्या है पूरा सच?

मेनका गांधी के अनुसार देश के सभी 780 जिलों में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर खुलने चाहिए थे. आज तक देश में एक भी नया सेंटर नहीं खोला गया है. दिल्ली में नए सेंटर बनने की बजाय पुराने 10 सेंटर्स को बंद कर दिया गया. गंगानगर में कुत्तों के काटने के 1080 मामले आए लेकिन वहां एक भी एबीसी सेंटर नहीं खुला. पूरे देश में सिर्फ 16 एनजीओ ऐसे हैं जिनके पास सही ट्रेनिंग है. बाकी जगहों पर बिना ट्रेनिंग के नकली एनजीओ का एक बड़ा माफिया काम कर रहा है.

आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने का क्या है सही समाधान?

मेनका ने कहा कि इस बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए एनिमल वेलफेयर बोर्ड की एसओपी को बेहतर करना होगा. बोर्ड में अच्छे और ईमानदार लोगों की नियुक्ति बहुत जरूरी है. सरकार को इस पूरे प्रोग्राम के लिए कम से कम दो से तीन हजार करोड रुपए का बजट जारी करना चाहिए. जब देश से पोलियो को खत्म करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च हो सकते हैं तो यहां क्यों नहीं. सभी एनजीओ को सही ट्रेनिंग दी जाए और एक शहर में सिर्फ एक ही एनजीओ को कॉन्ट्रैक्ट मिले.

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दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें





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