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Iqra Hasan Protest : कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने सिटी मजिस्ट्रेट से वार्ता के बाद अपना धरना खत्म कर दिया है. इकरा के जिन पांच समर्थकों को जेल भेजा गया था, उनको जमानत का आश्वासन मिलने के बाद सपा सांसद धरने से उठ गईं. कैराना सांसद करीब 3 घंटे सदर थाने में धरने पर बैठी रहीं. इकरा हसन एक बुजुर्ग पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए समर्थकों के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं.
इकरा हसन ने सिटी मजिस्ट्रेट से वार्ता के बाद अपना धरना खत्म कर दिया है.
सहारनपुर. यूपी के कैराना से सपा की लोकसभा सांसद इकरा हसन का धरना खत्म हो गया है. सिटी मजिस्ट्रेट से वार्ता के बाद उन्होंने धरना खत्म करने का फैसला किया. इकरा के पांच समर्थक, जिन्हें जेल भेजा गया था, उनको जमानत का आश्वासन मिलने के बाद सपा सांसद धरने से उठ गईं. कैराना सांसद करीब 3 घंटे से ज्यादा सदर थाने में धरने पर बैठी रहीं. सहारनपुर में आज (मंगलवार) उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब कैराना सांसद इकरा हसन एक बुजुर्ग पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए समर्थकों के साथ सीधे डीआईजी कार्यालय पहुंच गईं. जहां पार्किंग में गाड़ी करने को लेकर विवाद हो गया.
भड़क गईं सांसद
इकरा को तो कुछ देर बाद छोड़ दिया गया लेकिन उनके पांच समर्थकों को नहीं छोड़ा गया. उनके समर्थकों को तुरंत चालन कर जेल भेज दिया गया. इस कार्रवाई से सपा सांसद भड़क गईं. उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी को सहारनपुर की ओर मोड़ दिया. इसके बाद पुलिस ने इकरा हसन को रोकने के लिए जगह-जगह बेरिकेडिंग की लेकिन कैराना सांसद उनको चकमा देकर सहारनपुर के थाना सदर बाजार पहुंच गईं. यहां एसपी सिटी से उनकी काफी बहस हुई. बाद में वे धरने पर बैठ गईं.
पुलिस ने बताया पूरा मामला
धरना खत्म कर क्या बोलीं इकरा
धरना खत्म होने के बाद मीडिया से इकरा हसन ने कहा, ‘हम धरने पर बैठे थे क्योंकि एक मां जिसके बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी गई, वो अपनी गुहार लेकर डीआईजी के पास आई थी. लेकिन उन्हीं के परिजनों को जेल भेज दिया गया. उनके साथ मुझे भी महिला थाने में ले जाया गया. हम यहां यह जानने के लिए बैठे थे कि उनकी क्या खता थी, किस वजह से उन्हें जेल में भेजा गया. हम सब ने उनके रिहाई के लिए धरना दिया. अभी हमारे बीच में सिटी मजिस्ट्रेट साहब आये थे. उन्होंने उनकी जमानत मंजूर कर ली है, लेकिन जेल के प्रोटोकोल की वजह से वो सुबह छूटेंगे. अधिकारियों के कहने पर और अपनी मांग की पूर्ति पर हमने इस धरने को खत्म कर दिया है.’
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


