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रामायण-महाभारत के दौर में ले गए वैभव सूर्यवंशी, स्क्रीन पर आए तो सड़कें सूनी, और ‘एपीसोड’ खत्म तो टीवी बंद

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रामायण-महाभारत के दौर में ले गए वैभव सूर्यवंशी, स्क्रीन पर आए तो सड़के सूनी

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क्रिकेट में कभी-कभी एक ऐसा खिलाड़ी आता है जो आँकड़ों से नहीं, उस “रुक जाओ, देखो” वाली बेचैनी से पहचाना जाता है. वैभव सूर्यवंशी वो बेचैनी बनते जा रहे है. आईपीएल 2026 में विराट और रोहित से ज्यादा किसी खिलाड़ी की चर्चा है तो वो हैं सूर्यवंशी

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वैभव सूर्यवंशी के आउट होने के बाद लोग टीवी कर देते है बंद या बदल रहे है चैनल

नई दिल्ली. भारत में जब टीवी बॉक्स के आकार का आता था और रविवार को रामायण और बाद में महाभारत देखने के लिए मोहल्ला का मोहल्ला टीवी के सामने बंधकर बैठ जाता था. फिर उसके बाद उदय हुआ सचिन तेंदुलकर का जिसकी बल्लेबाजी देखने के लिए सड़के सूनसान हो जाती थी. वो ऐसा दौर ता जब सचिन के आउट होने बाद लोग टीवी बंद कर दिया करते थे. अब सालों बाद टीवी पर भीड़, चाय की दुकानों पर चर्चा, और खाने की टेबल पर खाने से ज्यादा चर्चा खेल की होने लगी और ये सब हो रहा है सिर्फ 15 साल के बच्चे की वजह से .

क्रिकेट में कभी-कभी एक ऐसा खिलाड़ी आता है जो आँकड़ों से नहीं, उस “रुक जाओ, देखो” वाली बेचैनी से पहचाना जाता है. वैभव सूर्यवंशी वो बेचैनी बनते जा रहे है. आईपीएल 2026 में विराट और रोहित से ज्यादा किसी खिलाड़ी की चर्चा है तो वो हैं सूर्यवंशी,उनकी बल्लेबाजी देखने के लिए क्या मोबाइल क्या टीवी सब जगह लोग रुककर उनके खेल को जी रहे है. यह सब एक 15 साल के लड़के ने किया जो बिहार के समस्तीपुर के पास एक छोटे से कस्बे से आया है.

वैभव आउट तो टीवी बंद

जयपुर में जो हुआ वो वैभव के लिए आम था पर उस आउट होने के बाद जो हुआ वो खास था.सूर्यवंशी के आउट होने के बाद से भारत में एक अजीब सी बात फिर से होने लगी. जब-जब राजस्थान रॉयल्स का मैच होता है, लोग बस एक सवाल के साथ स्क्रीन ऑन करते हैं “आज वो क्या करेगा?” और आउट होते ही, टीवी बंद. यह विराट कोहली के ज़माने के बाद किसी के साथ नहीं हुआ और यह कोई छोटी बात नहीं है क्योंकि टीवी और मोबाइल तो लोग उनके लिए ऑन करते ही रहेंगे सवाल यह है, जब वो आउट हों तब भी कुछ देखने लायक हो.

ब्रांड वैल्यू, बिना भारत के लिए खेले

वैभव सूर्यवंसी को 1.1 करोड़ में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें खरीदा. 2027 की मेगा नीलामी में ₹28-30 करोड़ का अनुमान? यह अतिशयोक्ति नहीं, कंज़र्वेटिव भी लग सकता है. विराट कोहली का ब्रांड था, जीत की गारंटी. वैभव का ब्रांड है, संभावना का रोमांच. और दूसरा वाला ब्रांड टीआरपी ज़्यादा बेचता है क्योंकि जब तक वो खेलता है, दर्शक जाते नहीं. 27 मार्च 2026 को वैभव 15 के हुए. अब वो टेक्निकली सीनियर इंडिया के लिए एलिजिबल हैं लेकिन एलिजिबल होना और तैयार होना, दो अलग बातें हैं. रवि शास्त्री जैसे एक्सपर्ट कह रहे हैं कि उन्हें पहले मल्टी-डे क्रिकेट में डालो सेलेक्टर्स के सामने क्रिटिकल डिसीज़न है, फास्ट-ट्रैक करें या केयरफुली डेवलप करें. यही वो मोड़ है जहाँ इंडियन क्रिकेट अक्सर जल्दी में जीनियस को जल्दी कंज़्यूम कर लेता है.

सचिन की याद क्यों आती है?
वैभव की तुलना सचिन तेंदुलकर से हो रही है और यही कम्पेरिज़न सबसे भारी बोझ है जो किसी भी भारतीय बच्चे पर डाला जा सकता है. सचिन 16 में आए और वकार यूनिस ने नाक तोड़ी फिर उठे और 24 साल खेले. वैभव के लिए दुआ यही है कि उन्हें वो वक्त मिले कि हम उन्हें देखने की जल्दी में उनका करियर न खा जाएँ. वैभव सूर्यवंशी अभी एक प्रॉमिस हैं, शानदार, चमकदार, असली. इंटरनेशनल क्रिकेट में टेस्ट होना ज़रूरी है होगा भी लेकिन बीसीसीआई और सेलेक्टर्स की ज़िम्मेदारी है कि जब वो सीनियर जर्सी पहनें तो सिर्फ स्पॉटलाइट के लिए नहीं, सही ज़मीन पर खड़े होकर पहनें.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



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