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Murshidabad and Malda SIR Latest Update: पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े अपीलीय ट्रिब्यूनलों ने केवल 6,581 मामलों का निपटारा किया है. यह संख्या, मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ दायर की गई लगभग 25 लाख अपीलों का लगभग 0.26 प्रतिशत है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 19 में से 12 न्यायाधिकरणों द्वारा 14 मई तक निपटाए गए मामलों में से 4,043 अपीलें स्वीकार कर ली गईं. इसका अर्थ है कि निपटाए गए मामलों में से लगभग 61.5 प्रतिशत लोगों के नाम वापस मतदाता सूची में शामिल हो गए, जबकि 1,267 अपीलें खारिज कर दी गईं.
ट्रिब्यूनल ने SIR ने एसआईआर में कटे कितने नाम जोड़े
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद मतदाता सूची से हुए बड़े पैमाने पर डिलिशन पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, बनाई गई अपीलीय ट्रिब्यूनल्स की प्रक्रिया बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर में करीब 25 लाख अपीलों में से अब तक सिर्फ 6,581 मामलों का ही निपटारा हो सका है जो कुल का लगभग 0.26% है.
इन 6,581 निपटाए गए मामलों में से 4,043 अपीलें स्वीकार की गईं यानी करीब 61.5% मामलों में वोटर्स के नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ दिए गए. वहीं 1,267 अपीलें खारिज कर दी गईं. बाकी 1,200 से अधिक निपटाए गए मामलों की स्थिति डेटा में साफ नहीं है. अधिकारियों के अनुसार, ताजा आंकड़ों के मुताबिक निपटाए गए मामलों की संख्या अब बढ़कर लगभग 10,000 तक पहुंच गई है, हालांकि इसका अपडेटेड आधिकारिक डेटा अभी जारी नहीं हुआ है.
मुशिर्दाबाद और मालदा का क्या है हाल?
मुर्शिदाबाद और मालदा में एसआईआर के दौरान सबसे ज्यादा नाम काटे गए और अपीलें दाखिल हुईं लेकिन वहां निपटारा बेहद कम है. मुर्शिदाबाद में 6.29 लाख से अधिक अपीलों में से सिर्फ 112 मामलों पर फैसला हुआ, जबकि मालदा में 5.26 लाख से ज्यादा अपीलों में से केवल 185 मामलों का निपटारा हो सका. यानी इन दो जिलों में चुनाव के बाद बहुत ही सीमित संख्या में वोटर्स ही अभी तक वापस लिस्ट में जुड़ पाए हैं.
कोलकाता नार्थ और साउथ में क्या हुआ?
कोलकाता नॉर्थ और कोलकाता साउथ के लिए गठित ट्रिब्यूनल ने कुल 1,777 मामलों का निपटारा किया जो अब तक तय किए गए सभी मामलों का करीब 27% है. इन दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए बनी ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम कर रहे थे जिन्होंने 7 मई को निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया. इन दो जिलों में अभी भी 51,000 से अधिक अपीलें लंबित हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को चुनाव आयोग और तत्कालीन बंगाल सरकार के बीच मतदाता सूची को लेकर भरोसे की कमी का जिक्र करते हुए रिविजन प्रक्रिया में न्यायिक दखल का आदेश दिया था. इसके बाद 20 मार्च को अपीलीय ट्रिब्यूनल्स गठित किए गए, जिनमें सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जजों को नियुक्त किया गया. साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने करीब 700 न्यायिक अधिकारियों की सिफारिश की जिन्होंने चुनाव आयोग की वेरिफिकेशन प्रक्रिया में चिह्नित 60 लाख से अधिक मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच की.
SIR में क्या हुआ था?
इस विशेष रिविजन के दौरान विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल) से पहले 27 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. ट्रिब्यूनल्स द्वारा पहले और दूसरे चरण के मतदान से 48 घंटे पहले तक जिन 1,607 वोटर्स को क्लियर किया गया, उन्हें मतदान करने की अनुमति दी गई. अधिकारियों के अनुसार, सुनवाई ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हुई हालांकि फिजिकल अपीयरेंस सीमित रहे. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरी अपीलीय प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप चल रही है और कोशिश है कि हर पात्र मतदाता को अपना पक्ष रखने का मौका मिले. एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, यह पूरी कवायद मतदाता सूची की शुचिता, सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए की गई है.


