पपीता-papaya फरवरी- मार्च एवं मई से अक्टूबर तक में महीनों में बहुतायत से पाया जानेवाला फल है।
कच्चे पपीते-papaya के दूध में पेपेइन नामक पाचक रस (enzyme) होता है ऐसा आज के वैज्ञानिक कहते हैं।
किंतु कच्चे पपीते-papaya का दूध इतना अधिक गर्म होता है, कि अगर उसे गर्भवती स्त्री खाए तो उसके गर्भस्राव की संभावना रहती है और ब्रह्मचारी खाए तो वीर्य नाश होने की संभावना रहती है।
पके हुए पपीते-papaya स्वाद में मधुर, रुचिकारक, पित्तदोष नाशक, पचने में भारी, गुण में गर्म, स्निग्घतावर्धक, दस्त साफ लानेवाले, वीर्य वर्धक, हृदय के लिए हितकारी, वायुदोष नाशक, मूत्र साफ लानेवाले तथा पागलपन, यकृत वृद्धि, तिल्ली वृद्धि, अग्निमांद्य, आंतों के कृमि एवं उच्च रक्तचाप आदि रोगों को मिटाने में मदद रूप होते है।
आधुनिक विज्ञान के मतानुसार पपीते-papaya में विटामिन ‘ए’ पर्याप्त मात्रा में होता है। उसका सेवन शारीरिक वृद्धि एवं आरोग्यता की रक्षा करता है।
पके हुए पपीते-papaya में विटामिन ‘सी’ की भी अच्छी मात्रा होती है। इसके सेवन से सूखा रोग (स्कर्वी) मिटता है।
बवासीर, कब्जियत, क्षयरोग, कैंसर, अल्सर, अम्लपित्त, मासिकस्राव की अनियमितता, मधुमेह, अस्थि – क्षय ( Bone T.B.) आदि रोगों में इसके सेवन से लाभ होता है।
लिटन बर्नार्ड नामक एक डॉक्टर का मंतव्य है कि प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) दवाएं लेने से आंतों में रहने वाले शरीर के मित्र जीवाणु नष्ट हो जाते हैं, जबकि पपीते-papaya का रस लेने से लाभ करता जीवाणुओं की पुनः वृद्धि होती है।
पपीते को शहद के साथ खाने से पोटैशियम तथा विटामिन ‘ ए’, ‘ बी’, ‘ सी’, कमी दूर होती है।
पपीता-papaya खाने के बाद अजवाइन चबाने अथवा उसका चूर्ण लेने से फोड़े – फुंसी, पसीने की दुर्गंध, अजीर्ण के दस्त एवं पेट के कृमि आदि का नाश होता है। इससे शरीर निरोगी, पुष्ट एवं फुर्तीला बनता है।
औषधि प्रयोग :
१. बालकों का अल्प विकास : नोट, अविकसित एवं दुबले-पतले बालकों को रोज उचित मात्रा में पका हुआ पपीता खिलाने से उनकी लंबाई बढ़ती है, शरीर मजबूत एवं तंदुरुस्त बनता है।
२. मंदाग्नि, अजीर्ण : रोज सुबह खाली पेट पपीते की फांक पर नींबू, नमक एवं काली मिर्च अथवा संतकृपा चूर्ण डालकर खाने से मंदाग्नि, अरुचि तथा अजीर्ण मिटता है।
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