नई दिल्ली. न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम दर्शकों के शोर से गूंजायमान था. हर कोई एक ऐसे इतिहास का गवाह बन रहा था, जो सदियों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है. राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेले जा रहे इस एलिमिनेटर मुकाबले में 15 साल का एक युवा लड़का मैदान पर नहीं, बल्कि सनराइजर्स के गेंदबाजों के आत्मसम्मान पर बल्लेबाजी कर रहा था. नाम था वैभव सूर्यवंशी. एक छोर से गेंदें बाउंड्री के पार जा रही थीं और दूसरी छोर से रिकॉर्ड्स के पन्ने खुद-ब-खुद पलट रहे थे. लेकिन क्रिकेट का खेल जितना खूबसूरत है, कभी-कभी उतना ही बेरहम भी हो जाता है. इस बेमिसाल कहानी का अंत इतना भावुक होगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी.
पारी का 8वां ओवर चल रहा था. वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) 29 गेंदों पर 97 रन बनाकर खेल रहे थे. उनके नाम के आगे 12 गगनचुंबी छक्के और 5 शानदार चौके दर्ज हो चुके थे. पूरा स्टेडियम खड़ा होकर इस युवा सनसनी के पहले आईपीएल शतक का इंतजार कर रहा था. सिर्फ 3 रन और… और वैभव इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो जाते. पेसर प्रफुल्ल हिंगे ने ओवर की छठी गेंद (7.6 ओवर) फेंकी. यह एक शॉर्ट और वाइड डिलीवरी थी. ऐसी गेंद जिसे वैभव मैच में कहीं भी स्टैंड्स में भेज सकते थे. वैभव ने क्रीज में थोड़ा मूव किया और थर्ड मैन के ऊपर से अपर कट खेलने का प्रयास किया. टाइमिंग में मामूली सी चूक हुई और गेंद ने उतनी दूरी तय नहीं की जितनी उम्मीद थी. थर्ड मैन पर तैनात स्मरण रामचंद्रन ने आगे की तरफ झुकते हुए एक शानदार कैच लपक लिया.
वैभव सूर्यवंशी शतक चूकने के बाद हुए इमोशनल.
मैदान पर सन्नाटा छा गया. सनराइजर्स हैदराबाद के खेमे ने राहत की सांस ली, लेकिन वैभव सूर्यवंशी वहीं फ्रीज हो गए. वे खुद से बेहद निराश थे और मैदान छोड़ने को तैयार नहीं थे. महज 3 रन से शतक चूकने का गम उनके चेहरे पर साफ देखा जा सकता था. जब वह भारी कदमों से पवेलियन की तरफ लौटने लगे, तो उनकी आंखों में आंसू थे. सिर नीचे किए, रोते हुए डगआउट की ओर बढ़ते वैभव को देखकर हर क्रिकेट प्रेमी का दिल बैठ गया. हालांकि, विरोधी टीम (SRH) के खिलाड़ियों ने भी खेल भावना दिखाते हुए आगे बढ़कर वैभव की पीठ थपथपाई, क्योंकि वे जानते थे कि उन्होंने अभी-अभी एक जादुई पारी देखी है.
आंसुओं के पीछे छिपा रिकॉर्ड्स का एवरेस्ट
वैभव भले ही रोते हुए मैदान से बाहर गए, लेकिन आउट होने से पहले वह आईपीएल इतिहास के कई बड़े रिकॉर्ड्स को मलबे में तब्दील कर चुके थे. 15 साल के इस लड़के ने जो किया, वह बड़े-बड़े दिग्गज अपने पूरे करियर में नहीं कर पाते.
पावरप्ले का सुल्तान
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 के इस सीजन में पावरप्ले (1 से 6 ओवर) के दौरान कुल 490 रन बना दिए हैं. उन्होंने डेविड वॉर्नर के 2016 के 467 रनों के ऑल-टाइम रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. इस लिस्ट में ट्रैविस हेड (2024 में 402 रन), साई सुदर्शन (2025 में 402 रन) और एडम गिलक्रिस्ट (2009 में 382 रन) जैसे दिग्गज अब वैभव से पीछे छूट गए हैं.
एक पारी के पावरप्ले में सबसे ज्यादा छक्के
सनराइजर्स के खिलाफ इस एलिमिनेटर मुकाबले में वैभव ने पावरप्ले के शुरुआती 6 ओवरों में ही 8 छक्के जड़ दिए. यह आईपीएल इतिहास में किसी भी बल्लेबाज द्वारा पावरप्ले में लगाए गए सबसे ज्यादा छक्के हैं. उन्होंने सनथ जयसूर्या (2008 में 7 छक्के), जोस बटलर (2018 में 7 छक्के), जॉनी बेयरस्टो (2022 में 7 छक्के) और अभिषेक शर्मा (2026 में 7 छक्के) के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया.
नॉकआउट का दूसरा सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर
आईपीएल के करो या मरो (प्लेऑफ/नॉकआउट) मुकाबलों में पावरप्ले के दौरान सबसे बड़ा स्कोर बनाने के मामले में वैभव अब तीसरे स्थान पर आ गए हैं. उन्होंने पहले 6 ओवरों में ही 60 रन कूट दिए थे. इस लिस्ट में सुरेश रैना (2014 में 87 रन) पहले और एडम गिलक्रिस्ट (2009 में 74 रन) दूसरे स्थान पर हैं.
नॉकआउट में संयुक्त रूप से सबसे तेज अर्धशतक
वैभव ने इस मैच में सिर्फ 16 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने आईपीएल नॉकआउट/प्लेऑफ इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने के सुरेश रैना के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली, जो रैना ने 2014 में किंग्स इलेवन पंजाब के खिलाफ बनाया था. उन्होंने एडम गिलक्रिस्ट (17 गेंद), एमएस धोनी (20 गेंद) और वीरेंद्र सहवाग (21 गेंद) जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया.
वैभव की ये पारी हमेशा याद रहेगी
क्रिकेट के आंकड़े गवाही देते हैं कि वैभव सूर्यवंशी ने मुल्लांपुर और जयपुर की धरती पर क्या कमाल किया है. लेकिन खेल सिर्फ आंकड़ों का नाम नहीं है, यह भावनाओं का समंदर है. 29 गेंदों में 97 रन की यह पारी आईपीएल इतिहास की सबसे मनोरंजक और विस्फोटक पारियों में से एक के रूप में याद रखी जाएगी.
वैभव के आंसू इस बात का सबूत थे कि उनमें रनों की कितनी भूख है और वह इस नॉकआउट मैच में अपनी टीम के लिए अंत तक टिके रहना चाहते थे. वह भले ही 3 रन से अपने शतक से चूक गए और रोते हुए डगआउट में लौटे, लेकिन जब वह मैदान से बाहर जा रहे थे, तो पूरा स्टेडियम उनके सम्मान में खड़ा था. वैभव का शतक तो टूट गया, लेकिन उन्होंने करोड़ों क्रिकेट फैंस का दिल जीत लिया.


