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Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी का इंटरनेशनल क्रिकेट में इंतजार लंबा हो गया है. उन्हें आयरलैंड के खिलाफ लगातार दूसरे टी20 मैच में नहीं खिलाया गया. वैभव अब इंग्लैंड दौरे पर डेब्यू कर सकते हैं. भारत का इंग्लैंड दौरा 1 जुलाई से शुरू होगा.
वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड दौरे तक डेब्यू के लिए करना पड़ा इंतजार.
नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के सबसे उभरते हुए और युवा सितारों में से एक वैभव सूर्यवंशी के इंटरनेशनल डेब्यू का इंतजार फैंस के लिए थोड़ा और लंबा हो गया है. आयरलैंड के खिलाफ खेली जा रही मौजूदा टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में भी जब भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन की घोषणा हुई, तो उसमें वैभव का नाम शामिल नहीं था. लगातार दूसरे मैच में उन्हें बेंच पर बैठना पड़ा, जिसने क्रिकेट गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. हालांकि, इस युवा खब्बू बल्लेबाज के हौसले पस्त नहीं हुए हैं, और अब सबकी निगाहें 1 जुलाई से शुरू होने वाले भारत के ऐतिहासिक इंग्लैंड दौरे पर टिक गई हैं. माना जा रहा है कि इंग्लैंड की तेज और सीमिंग पिचों पर वैभव अपना पहला इंटरनेशनल कैप हासिल कर सकते हैं.
बिहार से आने वाले वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने घरेलू क्रिकेट और जूनियर स्तर पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चयनकर्ताओं को बेहद प्रभावित किया है.जब उन्हें आयरलैंड दौरे के लिए स्क्वाड में शामिल किया गया, तो कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें बतौर ओपनर या टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज आजमाया जाएगा. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अपनी अलग रणनीतियां होती हैं. भारतीय टीम मैनेजमेंट इस समय आगामी बड़े टूर्नामेंट्स को देखते हुए एक तय कॉम्बिनेशन के साथ मैदान पर उतर रहा है. अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी और टीम में पहले से सेटल ओपनिंग पेयर के कारण वैभव को शुरुआती एकादश में जगह नहीं मिल सकी. कप्तान और कोच का मानना था कि विदेशी पिचों पर पहले से खेल रहे सीनियर खिलाड़ियों को निरंतरता देना जरूरी है. इसके बावजूद, ड्रेसिंग रूम का माहौल और सीनियर खिलाड़ियों के साथ समय बिताना 15 वर्षीय वैभव के लिए एक बेहतरीन लर्निंग एक्सपीरियंस साबित हो रहा है.
क्या ‘क्रैडल ऑफ क्रिकेट’ में होगा नया सवेरा?
आयरलैंड का दौरा अब बीती बात होने जा रहा है और भारतीय टीम का अगला पड़ाव है इंग्लैंड. भारत का इंग्लैंड दौरा 1 जुलाई से आधिकारिक तौर पर शुरू हो रहा है. क्रिकेट पंडितों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दौरा उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. इंग्लैंड की परिस्थितियां हमेशा से बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण रही हैं, जहां गेंद हवा में स्विंग और टप्पा खाने के बाद तेजी से सीम होती है. ऐसे में वैभव जैसी तकनीक और निडर दृष्टिकोण वाले बल्लेबाज की टीम को सख्त जरूरत हो सकती है.
सफेद गेंद के क्रिकेट में एक्स-फैक्टर
वैभव के पास पावरप्ले का फायदा उठाने और तेज गेंदबाजों के खिलाफ फ्रंट फुट पर आकर खेलने की गजब की क्षमता है. इंग्लैंड की पिचों पर यदि शुरुआती ओवरों में गेंद को सही से टैकल कर लिया जाए, तो वहां रन बनाना आसान हो जाता है. टीम मैनेजमेंट हमेशा एक मजबूत बाएं और दाएं हाथ के कॉम्बिनेशन की तलाश में रहता है. वैभव इस समीकरण में बिल्कुल फिट बैठते हैं.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें


