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Vaibhav Suryavanshi eyes 4 records Sachin Tendulkar: अंडर 19 के बाद आईपीएल में अपनी तूफानी बल्लेबाजी से चर्चा में आए वैभव सूर्यवंशी की तुलना अब महान सचिन तेंदुलकर से हो रही है. वैभव ने सचिन से भी कम उम्र में फर्स्ट क्ला क्रिकेट में कदम रखा है, लेकिन ‘मास्टर ब्लास्टर’ के चार ऐसे बड़े रिकॉर्ड हैं, जिन्हें अगले दो साल में तोड़ना उनके लिए एवरेस्ट चढ़ने जैसा होगा. इनमें डेब्यू रणजी शतक, सबसे कम उम्र में वनडे-टेस्ट डेब्यू और टेस्ट अर्धशतक शामिल हैं. क्या बिहार का यह लाल सचिन के इस अभेद्य चक्रव्यूह को भेद पाएगा?
आरसीबी के खिलाफ महज 26 गेंदों पर 78 रनों की तूफानी पारी खेलकर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) रातों-रात क्रिकेट जगत के नए सनसनी बन गए हैं. जिस उम्र में बच्चे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, उस 15 साल की उम्र में वैभव दुनिया की सबसे कठिन लीग में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा रहे हैं. उनकी इस प्रतिभा को देख क्रिकेट प्रेमी उनकी तुलना महान सचिन तेंदुलकर से करने लगे हैं.

यह सच है कि वैभव ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सचिन (15 साल 230 दिन) से कहीं पहले 12 साल की उम्र में कदम रख दिया था, लेकिन जब बात उपलब्धियों की आती है, तो सचिन का कद हिमालय जैसा है। आने वाले दो साल वैभव के करियर के लिए निर्णायक होंगे, क्योंकि सचिन के 4 ऐसे महारिकॉर्ड हैं जो आज भी किसी युवा खिलाड़ी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं.

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने बिहार के लिए अब तक 8 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं, लेकिन उनके बल्ले से अभी तक कोई बड़ी पारी नहीं निकली है. सचिन तेंदुलकर ने 11 दिसंबर 1988 को जब गुजरात के खिलाफ अपना रणजी डेब्यू किया, तो उन्होंने 15 साल 232 दिन की उम्र में नाबाद 100 रन जड़कर दुनिया को चौंका दिया था.
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वैभव के पास आगामी रणजी सीजन में इस रिकॉर्ड को तोड़ने का मौका तो है, लेकिन उनकी वर्तमान फॉर्म (औसत 17.25) और आक्रामक शैली को देखते हुए रेड-बॉल क्रिकेट में धैर्य दिखाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. क्या वह 16 साल का होने से पहले अपना पहला फर्स्ट क्लास शतक लगा पाएंगे?

आईपीएल की फॉर्म को देखते हुए चर्चा है कि वैभव को जल्द ही भारतीय वनडे टीम में शामिल किया जा सकता है. सचिन तेंदुलकर ने अपना पहला वनडे मैच पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल 238 दिन की उम्र में खेला था. वैभव के पास इस रिकॉर्ड को अपने नाम करने के लिए लगभग डेढ़ साल का समय है. सफेद गेंद के क्रिकेट में वैभव का अंदाज प्रभावी है, लेकिन इंटरनेशनल स्टेज पर जगह बनाने के लिए उन्हें घरेलू क्रिकेट में निरंतरता साबित करनी होगी.

टेस्ट क्रिकेट किसी भी खिलाड़ी के कौशल की असली पहचान है. सचिन ने कराची के मैदान पर महज 16 साल 205 दिन की उम्र में टेस्ट कैप पहनकर इतिहास रचा था. भारतीय क्रिकेट के मौजूदा ढांचे में इतनी कम उम्र में टेस्ट टीम में जगह बनाना लगभग असंभव माना जाता है. वैभव के लिए असल चुनौती यह है कि क्या वे रणजी ट्रॉफी के अगले सीजन में रनों का ऐसा अंबार लगा पाएंगे कि चयनकर्ता उन्हें 17 साल का होने से पहले टेस्ट टीम में शामिल करने पर मजबूर हो जाएं?

अगर वैभव टेस्ट डेब्यू कर भी लेते हैं, तो उनके सामने सचिन का वह रिकॉर्ड होगा जो उन्होंने सियालकोट में बनाया था. सचिन ने 16 साल 214 दिन की उम्र में पाकिस्तान के घातक तेज गेंदबाजों के सामने अपना पहला टेस्ट अर्धशतक जड़ा था. वैभव की बल्लेबाजी शैली ‘टी-20’ वाली है, ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढालकर अर्धशतक तक पहुंचना उनके लिए एक कठिन मनोवैज्ञानिक और तकनीकी युद्ध होगा.

इसमें कोई शक नहीं कि वैभव सूर्यवंशी एक दुर्लभ प्रतिभा हैं. लेकिन सचिन तेंदुलकर बनने का सफर सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लंबी अवधि के अनुशासन और निरंतरता का नाम है. अगले 24 महीने यह तय करेंगे कि क्या वैभव वाकई सचिन की विरासत को चुनौती देने वाले अगले ‘वंडर बॉय’ साबित होंगे.


