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महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ भी नहीं, लेकिन साथ भी नहीं.. क्‍यों अखिलेश यादव इसके खिलाफ वोट करने की तैयारी में हैं?

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Akhilesh Yadav on Women Reservation Bill : कुल मिलाकर महिला आरक्षण बिल को लेकर जहां सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. अखिलेश यादव ने भी अपने बयान से इस बहस को और तेज कर दिया है कि विपक्ष इसका किस कदर विरोध करने जा रहा है. संसद में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और राजनीतिक टकराव की पूरी संभावना बनी हुई है. आइये जानते हैं महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव की राय..

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महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव की राय..

लखनऊ : केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जाने को लेकर देश की राजनीति गरमाई हुई है. एक तरफ सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष के कई दल इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर गंभीर आपत्ति जताई है. दिल्ली में संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा, ‘हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस जल्दबाजी में इसे लाया जा रहा है, हम उसके खिलाफ हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला ‘खुफिया लोगों की गुप्त योजना’ का हिस्सा है और सरकार असली मुद्दों से बचने की कोशिश कर रही है.

अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा, ‘अगर जनगणना होगी तो देश जातिगत जनगणना की मांग करेगा और जब जातिगत जनगणना होगी तो देश आरक्षण मांगेगा. सरकार इन सब से बचना चाहती है.’ उन्होंने आगे कहा कि सही आंकड़ों के बिना आरक्षण देना न्यायसंगत नहीं हो सकता. उनका सीधा सवाल था कि जब तक आंकड़ा सही नहीं होगा तो हम आरक्षण कैसे सही देंगे?

अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह बिल सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. ये पीड़ित, दलित, मुस्लिम, पिछड़ा आदि आबादी के खिलाफ लोग हैं. देश में अगर आंकड़ों को देखें तो आरक्षण के साथ-साथ संरक्षण की भी जरूरत है. अखिलेश यादव ने यह भी जोड़ा कि सरकार का यह कदम वास्तविक सशक्तिकरण नहीं बल्कि तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है.

  • अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण के प्रतिशत और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी सवाल खड़े किए.
  • उन्होंने कहा कि अगर हम पिछड़ों की आबादी 66% भी मान लें, तो आप 33% का आरक्षण देकर क्या महिलाओं का ही अधिकार सीमित नहीं कर रहे?
  • उनके मुताबिक, यह व्यवस्था समाज के विभिन्न वर्गों के बीच असंतुलन पैदा कर सकती है.

इसके साथ ही उन्होंने परिसीमन (Delimitation) और पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू करने पर भी कड़ा विरोध जताया. उनका कहना है कि जब तक नई जनगणना नहीं होती, तब तक 2011 के आंकड़ों के आधार पर किसी भी तरह का आरक्षण तय करना उचित नहीं है.

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Sandeep KumarSenior Assistant Editor

Senior Assistant Editor in News18 Hindi with the responsibility of Regional Head (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Bihar, Jharkhand, Rajasthan, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Himachal Pradesh, Haryana). Active in jou…और पढ़ें





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