Kerala Chuna Left Plan: लेफ्ट ने अपने आखिरी ‘किले’ को बचाने का बना लिया मेगा प्लान, लाल गढ़ को बचाएगी एलडीएफ?

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लेफ्ट ने अपने आखिरी ‘किले’ को बचाने का बना लिया प्लान, लाल गढ़ को बचाएगी LDF?

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Kerala Chunav Left Plan: केरल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. 9 अप्रैल को यहां वोटिंग होनी है. इस बार चुनाव में एलडीएफ ने 110 सीटों का टारगेट तय किया है. बागियों को लेकर पार्टी ने कहा है कि उनका कोई असर नहीं पड़ेगा. तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए लेफ्ट ने मेगा प्लान तैयार किया है, इसमें विकास और संगठन की ताकत पर जोर है.

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केरल विधानसभा चुनाव से पहले एलडीएफ ने 110 सीटों का लक्ष्य रखा. (फोटो PTI)

Kerala Chunav Left Plan: केरल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. सियासी मैदान सज चुका है और अब सबसे बड़ी लड़ाई ‘लाल गढ़’ को बचाने की है. सवाल साफ है क्या लेफ्ट अपना आखिरी मजबूत गढ़ बचा पाएगा? या फिर सत्ता का समीकरण बदल जाएगा? हालात बता रहे हैं कि इस बार मुकाबला आसान नहीं है. अंदरूनी असंतोष की खबरें हैं. बगावत की आहट भी है. लेकिन इसके बावजूद लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) पूरी ताकत से मैदान में उतर चुका है. दावा बड़ा है 110 सीटें जीतने का टारगेट तय किया गया है. और इरादा साफ है, तीसरी बार सत्ता में वापसी. यह सिर्फ चुनाव नहीं है. यह अस्तित्व की लड़ाई भी है. बता दें कि 9 अप्रैल को केरल में मतदान होना है.

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसरा कन्नूर से जो संदेश आया है, वह साफ संकेत देता है कि पार्टी आत्मविश्वास से भरी हुई है. CPI(M) के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने बगावत को छोटा मुद्दा बताया है. उन्होंने साफ कहा कि कुछ नेताओं के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन सियासी जानकार मानते हैं कि चुनाव में छोटी-छोटी दरारें भी बड़ा असर डाल सकती हैं. ऐसे में एलडीएफ का मेगा प्लान अब चर्चा में है. विकास के मुद्दे, संगठन की ताकत और विपक्ष पर सीधा हमला. यही रणनीति लेकर लेफ्ट मैदान में उतर चुका है.

एलडीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती है लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करना. (फोटो PTI)

तीसरी बार सत्ता की तैयारी

  • एलडीएफ ने साफ कर दिया है कि उसका फोकस पूरी तरह चुनावी जीत पर है. पार्टी का दावा है कि उसके पास 5.5 लाख सदस्य और 2.5 लाख समर्थक हैं. ऐसे में पांच-छह नेताओं के जाने से कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. एम वी गोविंदन ने कहा कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद नहीं है और जो भी मुद्दे हैं, उन्हें संगठन के भीतर ही सुलझा लिया जाता है.
  • दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ पर भी एलडीएफ ने हमला तेज कर दिया है. गोविंदन ने कहा कि पिछले एक दशक में यूडीएफ ने विकास के किसी भी काम में सहयोग नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्य को केंद्र से समर्थन की जरूरत थी, तब भी यूडीएफ ने साथ नहीं दिया. वहीं बीजेपी के साथ किसी भी तरह की साठगांठ के आरोपों को भी उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया.

एलडीएफ का ‘मेगा प्लान’ क्या है?

एलडीएफ का मेगा प्लान विकास और संगठनात्मक मजबूती पर आधारित है. पार्टी का फोकस अपने कार्यों को जनता तक पहुंचाने और विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करने पर है. साथ ही, 110 सीटों का लक्ष्य तय कर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह तीसरी बार सत्ता में लौटने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है.

क्या बागियों से एलडीएफ को नुकसान होगा?

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बागियों की संख्या बहुत कम है और उनका असर चुनाव परिणामों पर नहीं पड़ेगा. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि करीबी मुकाबले में छोटे फैक्टर भी बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं.

यूडीएफ और बीजेपी पर एलडीएफ के आरोप क्या हैं?

एलडीएफ ने यूडीएफ पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया है. वहीं, बीजेपी के साथ किसी भी तरह की सांठगांठ के आरोपों को निराधार बताया गया है. पार्टी का कहना है कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है.

तीसरी बार सत्ता की चुनौती

एलडीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती है लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करना. केरल की राजनीति में यह आसान नहीं माना जाता. लेकिन पार्टी का दावा है कि उसकी सरकार ने जनता के मुद्दों को प्रभावी तरीके से हल किया है. अब देखना होगा कि क्या यह दावा चुनावी नतीजों में बदलता है या नहीं.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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