भारत की नई चाल, पाकिस्‍तान का हर दाव होगा फेल, शाहीन और गौरी मिसाइल्‍स नहीं आएंगी काम – anant shastra Quick Reaction Surface to Air Missile system

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Anant Shastra QRSAM: बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए भारत ने ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ यानी बिना सीधे टकराव वाले युद्ध की तैयारी तेज कर दी है. भारत ने इस दिशा में ₹2.19 लाख करोड़ की लागत वाली 6 प्रमुख रक्षा परियोजनाओं पर काम शुरू कर दिया है, जिनमें उन्नत ‘अनंत शस्त्र’ सिस्‍टम प्रमुख है. यह कदम भारत की सैन्य क्षमताओं को भविष्य के खतरों के अनुरूप ढालने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. रक्षा मामलों से जुड़ी संसदीय समिति की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य ड्रोन, हाइपरसोनिक वेपन और साइबर हमलों जैसे उभरते खतरों का मुकाबला करना है. मौजूदा वैश्विक तनाव, विशेष रूप से ईरान से जुड़े घटनाक्रम ने इस दिशा में तेजी लाने की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है.

इन योजनाओं के केंद्र में ‘अनंत शस्त्र’ (Quick Reaction Surface-to-Air Missile) सिस्‍टम है, जिसे तेजी से प्रतिक्रिया देने और एक साथ कई ड्रोन तथा कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया जा रहा है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रणाली भारतीय वायु रक्षा को एरियल वॉरफेयर की चुनौतियों के खिलाफ मजबूत बनाएगी, जहां दुश्मन कन्‍वेंशनल वॉर के बजाय छोटे, तेज और तकनीकी हमलों का सहारा लेता है. इसके अलावा स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली भी विकसित की जा रही है, जो रूस की S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम के समकक्ष मानी जा रही है. यह दुश्मन के विमान, मिसाइल और बैलिस्टिक खतरों को लंबी दूरी से ही निष्क्रिय करने में सक्षम होगी, जिससे विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी.

हवाई ताकत बढ़ाने वाले प्रोजेक्‍ट को रफ्तार

हवाई ताकत के क्षेत्र में भारत का महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अब डिजाइन चरण से आगे बढ़कर विकास के चरण में पहुंच चुका है. यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा, जिसमें स्वदेशी इंजन के विकास पर भी काम चल रहा है. इसके साथ ही छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भी विचार किया जा रहा है, जिन्हें ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा. वहीं, नेवी के लिए एडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जो दुश्मन के सेंसर और कम्‍यूनिकेशन सिस्‍टम को जाम कर सकें. इससे समुद्री क्षेत्रों में भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा और क्षमता दोनों में वृद्धि होगी.

भारत एयर डिफेंस सिस्‍टम को धार देने में जुटा है. (फाइल फोटो/Reuters)

AI बेस्‍ड वेपन पर भी फोकस

साइबर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस रणनीति के अहम स्तंभ हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अपने बजट का बड़ा हिस्सा एआई आधारित हथियारों और साइबर सुरक्षा पर खर्च कर रहा है, ताकि संभावित साइबर हमलों को पहले ही रोका जा सके और स्वायत्त हथियार प्रणालियों का प्रभावी उपयोग किया जा सके. मिसाइल सिस्‍टम के क्षेत्र में भी ‘अस्त्र’, ‘नाग’ और ‘ध्रुवास्त्र’ के मार्क-2 संस्करणों पर काम जारी है, जिनमें रेंज, सटीकता और मारक क्षमता को बढ़ाया जा रहा है. ये सुधार भारतीय सशस्त्र बलों को तेजी से बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखने में मदद करेंगे. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा निवेश का प्रावधान ₹2,19,306.47 करोड़ रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.84 प्रतिशत अधिक है. वहीं कुल रक्षा बजट ₹7.84 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग ₹1 लाख करोड़ अधिक है. यह वृद्धि पिछले एक दशक में सबसे बड़ी मानी जा रही है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा फोकस

विशेषज्ञों के अनुसार, 6 मई 2025 को शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा चुनौतियों ने इस तरह के निवेश की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है. इस ऑपरेशन ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में सटीकता, गति और तकनीकी श्रेष्ठता कितनी अहम हो गई है. ये परियोजनाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देती हैं और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती हैं. आने वाले समय में भारत न केवल अपनी सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि उभरते नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर के दौर में वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली सैन्य शक्ति के रूप में भी उभरेगा.



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