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Karnataka Employees Salary Delay News: खाली जेब और अप्रैल का महीना, सैलरी के चक्कर में कर्नाटक के कर्मचारियों को आया पसीना! कहां गया सरकारी खजाना?

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अप्रैल में खाली जेब, सैलरी को तरसे कर्नाटक के कर्मचारी, उठा खजाने पर सवाल

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Karnataka Employees Salary Delay: अप्रैल खत्म होने को है, लेकिन कर्नाटक के हजारों सरकारी कर्मचारी अब भी मार्च की सैलरी का इंतजार कर रहे हैं. तकनीकी गड़बड़ी और फंड को लेकर उठ रहे सवालों ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है. कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है और सरकार पर दबाव भी. अब सबकी नजर इस बात पर है कि आखिर कब मिलेगी मेहनत की कमाई.

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कर्नाटक के सरकारी कर्मचारियों को मार्च की सैलरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है. (फाइल फोटो)

Karnataka Employees Salary Delay News: अप्रैल का महीना वैसे भी जेब पर भारी पड़ता है. स्कूल फीस, किराया, रोजमर्रा के खर्च और ऊपर से महंगाई का दबाव. ऐसे समय में अगर सैलरी ही समय पर न आए तो हालात कितने मुश्किल हो सकते हैं, इसका अंदाजा कर्नाटक के सरकारी कर्मचारियों की स्थिति से लगाया जा सकता है. महीने के आखिरी पड़ाव पर पहुंचने के बावजूद मार्च की सैलरी का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों के लिए यह सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि आर्थिक असुरक्षा का संकेत बन गया है. सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सरकारी खजाने में ऐसा क्या हुआ कि नियमित भुगतान की व्यवस्था ही लड़खड़ा गई.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु समेत राज्य के कई विभागों के कर्मचारी अब तक वेतन का इंतजार कर रहे हैं. आमतौर पर महीने की शुरुआत में मिलने वाली सैलरी इस बार लेट हो गई है. सरकार की ओर से तकनीकी कारण और विभागीय स्तर पर ढिलाई की बात कही जा रही है. लेकिन अंदरखाने फंड की कमी और धन के इस्तेमाल को लेकर अलग ही चर्चा चल रही है. इससे कर्मचारियों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई हैं.

कई विभागों के कर्मचारी प्रभावित, देरी पर उठे सवाल

  • राजस्व, शिक्षा, पुलिस, पशुपालन और सूचना विभाग जैसे अहम विभागों के कर्मचारी इस देरी से प्रभावित हैं. ये वे विभाग हैं जहां आमतौर पर वेतन समय पर जारी होता है. लेकिन इस बार अप्रैल खत्म होने को है और मार्च की सैलरी अब तक नहीं आई है. कर्मचारियों का कहना है कि यह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई, जिससे उनकी आर्थिक योजना पूरी तरह बिगड़ गई है.
  • देरी के पीछे दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं तकनीकी गड़बड़ी और वित्तीय दबाव. कुछ सूत्रों का दावा है कि सरकार ने उपचुनाव से पहले गृहलक्ष्मी योजना के लिए करीब 6000 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया. इससे नकदी प्रवाह पर असर पड़ा. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चा ने मामले को और गर्मा दिया है.
  • रिपोर्ट के मुताबिक वित्त विभाग के प्रमुख सचिव रितेश कुमार सिंह ने इन आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि वेतन वितरण की जिम्मेदारी विभाग प्रमुखों पर होती है और इसमें किसी तरह की फंड की कमी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ विभागों के अधिकारियों की सुस्ती के कारण यह देरी हो सकती है.

कर्मचारियों की बढ़ती चिंता और सरकार पर दबाव

कर्मचारियों का कहना है कि अगर जल्द ही सैलरी जारी नहीं हुई तो उनके सामने आर्थिक संकट गहरा सकता है. दूसरी ओर विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है और पारदर्शिता की मांग कर रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालती है.

सैलरी में देरी की असली वजह क्या है?

आधिकारिक तौर पर तकनीकी गड़बड़ी और विभागीय स्तर पर ढिलाई को कारण बताया गया है. हालांकि, कुछ सूत्र फंड की कमी और योजनाओं में पैसे के इस्तेमाल को भी वजह मान रहे हैं. सच क्या है, यह विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगा.

किन-किन विभागों के कर्मचारी प्रभावित हैं?

राजस्व, शिक्षा, पुलिस, पशुपालन और सूचना विभाग जैसे प्रमुख विभागों के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं. ये वे विभाग हैं जहां आमतौर पर सैलरी समय पर मिलती है, इसलिए इस बार की देरी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है.

सरकार का इस पर क्या कहना है?

वित्त विभाग ने फंड डायवर्जन के आरोपों को खारिज किया है. सरकार का कहना है कि सैलरी देने में कोई आर्थिक समस्या नहीं है और यह केवल प्रशासनिक स्तर की देरी है.

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में कर्मचारियों को राहत मिलेगी. सरकार पर दबाव बढ़ रहा है और अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है. कर्मचारियों की उम्मीद है कि जल्द ही सैलरी जारी होगी और यह संकट खत्म होगा.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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